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दुर्दांत आतंकी ओमर सईद शेख का रिहा होना भारत के लिए अच्छा संकेत नहीं है

निर्देशक हंसल मेहता की ‘ओमेर्टा’ जिसने देखी है, वह जान सकता है कि आतंकी अहमद ओमर सईद शेख इंसानी गलों को किस हैवानियत से रेत डालता था। विशेष रुप से जब गला किसी भारतीय का हो तो उसे रेतते समय ओमर की आँखों में वहशियत चमक उठती थी। आज आतंकी ओमर सईद शेख और ‘ओमेर्टा’ पुनः प्रासंगिक हो गई है।

पाकिस्तान के सिंध उच्च न्यायालय ने जेल में बंद ओमर सईद शेख की रिहाई का आदेश दिया है। ओमर ने अमेरिकन अख़बार ‘द वॉल स्ट्रीट जर्नल’ के पत्रकार डेनियल पर्ल का गला काटकर हत्या कर दी थी। डेनियल अपने अख़बार के लिए दक्षिण एशिया के ब्यूरो चीफ के रुप में कार्य कर रहे थे।

उनका कार्यालय मुंबई में हुआ करता था। एक बार वे किसी ब्रिटिश आतंकी की लिंक जानने के लिए पाकिस्तान गए। वहां उनका अपहरण कर लिया गया। अपहरण के बाद उनकी हत्या कर शव कराची के बाहरी क्षेत्र में फिंकवा दिया गया था। 38 वर्ष का महत्वाकांक्षी युवा एक सिरफिरे की हैवानियत की भेंट चढ़ गया।

ऐसे दुर्दांत आतंकी को रिहा करने के आदेश हुए हैं। ओमर 47 वर्ष का है और लंदन स्कूल ऑफ़ इकॉनॉमिक्स से पढ़ा हुआ है। इंग्लैण्ड में जन्मा ओमर भारतीयों से बहुत घृणा करता है। वह एक बार भारतीय पर्यटकों पर हमले के आरोप में जेल गया।

इसके बाद उसने तालिबान का दामन थाम लिया। 1999 में भारतीय विमान को हाईजैक कर कंधार ले जाने और उसे वापस देने के बदले जिन आतंकियों को रिहा करवाया गया, उनमे एक ओमर भी था। इसके बाद उसने डेनियल पर्ल की हत्या अपने साथियों के साथ मिलकर की। ओमर का अतीत रक्तरंजित रहा है।

ऐसे आतंकी को छोड़ने का मतलब है, भविष्य में होने वाली और भी बड़ी आतंकी वारदातों के लिए विश्व को तैयार रहना होगा। विशेष रुप से भारत को। उमर भारत से बहुत घृणा करता है। हंसल मेहता की ‘ओमेर्टा’ उमर की आतंकवादी मानसिकता के अंदर की यात्रा है।

ओमेर्टा एक इटालियन शब्द है। ये एक तरह का ‘कोड ऑफ़ साइलेंस’ है। ये एक शपथ है, जो गिरोह के सदस्य लेते हैं। इस शपथ के मायने होते हैं, कुछ भी हो जाए, कोई गिरोह का भेद पुलिस के सामने नहीं खोलेगा।  9/11, अल कायदा और 1909 से कार्यरत ब्रिटेन की गुप्तचर संस्था एमआई-6 से भी संबंध रखता है।

9/11 के आतंकी हमले में ओमर की भूमिका रही है। हंसल मेहता की फिल्म के एक दृश्य में इसका संकेत दिया गया है। जैसा कि मैंने ऊपर लिखा, हंसल मेहता की फिल्म ओमर की आतंकी मानसिकता की यात्रा की कहानी है। उसका ट्रेक रिकॉर्ड बहुत ही घातक है और अब वह खुली हवा में सांस लेगा।

पाकिस्तान की दहशतगर्द हवाओं को सांस में भरकर ये दानव अपनी शक्ति बढ़ाएगा। इस कुख्यात मास्टरमाइंड के हाथ में अब एक अस्त्र और आ जाएगा और वह है तकनीक। अदृश्य संचार तरंगें भेद नहीं करती। वह देव-दानव दोनों के लिए उपलब्ध है। 

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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