आतंकवादियों के खिलाफ भारतीय रिपोर्टिंग से हिला; पाकिस्तानी मीडिया !

मीडिया को यूँ ही ही नहीं लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ कहा गया है, यदि मीडिया अपना काम सही ढंग और ईमानदारी से करे तो देश की आधी से ज्यादा समस्याएं समाप्त हो जाएगी. भारत में कुछ देर की सच्ची रिपोर्टिंग ने पाकिस्तानी मीडिया के कान खड़े कर दिए, रोहित सरदाना और अर्नब गोस्वामी और अन्य पत्रकारों की बेबाक और ईमानदारी से की गई रिपोर्टिंग से पाकिस्तानी मीडिया में हलचल मच गयी .

जम्मू कश्मीर में मारे गए हिजबुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहानवानी की मौत पर हाफिज सईद और लश्कर चीफ सैयद सलाउद्दीन ने मिलकर शोक सभा का आयोजन किया था और भारत में आतंकवादी गतिविधियाँ तेज करने के लिए लोगों को उकसाने का काम किया . भारतीय मीडिया ने हाफिज सईद को निशाना बनाते हुए उसके इस कृत्य के लिए जमकर लताड़ा, उनके इस विरोध की आंच पकिस्तान की मीडिया तक पहुंच गयी और उनके समचार चैनलों में भी भारतीय देशभक्त पत्रकार छाए रहे.

मीडिया की देश के लिए क्या जिम्मेदारी होती है ? उसका कितना त्वरित प्रभाव होता है? उसका इस बात से पता चलता है की आप किस तरह से लोगों के सामने खुद को और देश को प्रस्तुत कर रहे है. बेचना और खरीदना व्यापरियों का काम है ख़बरों को मसाला बनाकर बेचने से पत्रकारिता सिर्फ पतोन्मुखी हो सकती है. ख़बरों को व्यापार बनाने वाले चन्द पत्रकारों और चैनलों ने पूरे देश की मीडिया को हाशिये में ला खड़ा किया है. जिन दलाल पत्रकारों की एजेंडा रिपोर्टिंग ने लोकतंत्र के चौथे स्तम्भ पर सवालिया निशान खड़े किये हैं, उनको इन पत्रकारों से कुछ सबक लेने की आवश्यकता है कि कुछ समय अपने और अपने सरपरस्तों के निजी स्वार्थ से उठकर देश की प्राथमिकताओं पर ध्यान दें.

मैं मानता हूँ कि हर खबर पर मतैक्य होना संभव नहीं है किन्तु जब सवाल राष्ट्र का हो तो एकमत होना अवश्यंभावी हो जाना चाहिए .जिससे विपरीत पक्ष को धनात्मक सन्देश जाता है कि चाहे देश में भिन्न-भिन्न विचारधारा के लोग भले ही हों किन्तु जब बात राष्ट्र की आती है तो उनके सुर एक होते हैं! जैसा अभी देखने में आ रहा है पाकिस्तानी मीडिया में भारतीय समाचार चैनल इस तरह से छाए हुए है जैसे उनके पास इसके अलावा कोई खबर ही नहीं हो दिखने के लिए . यही मीडिया की ताकत है जिसके लिए उसका कहा गया है लोकतंत्र का चौथा स्तम्भ.

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