खुलासा- सोनिया गांधी ने बंद करवाई थी तहलका टेप की जांच!

जितेन्द्र चतुर्वेदी। तहलका टेप की जांच सोनिया गांधी ने बंद करवाई थी, यह सच सामने आ गया है। सोनिया ने जांच क्यों रुकवाई? यह रहस्य है। उसका खुलासा इस रिपोर्ट में है। सोनिया गांधी के खिलाफ मुकदमा होना चाहिए। कारण,उन्होंने सत्ता का इस्तेमाल एक देशद्रोही को बचाने में किया है। उसे अभयदान देने के लिए दस जनपथ ने एक वैधानिक आायोग को भंग कर दिया। उन्होंने ऐसा किस अधिकार से किया? सामाजिक कार्यकर्ता प्रकाश बंधु यही सवाल उठा रहे हैं। उन्होंने इस बाबत प्रवर्तन निदेशालय में शिकायत भी की है। मगर इस मामले में सबसे बड़ा खुलासा जया जेटली ने किया है। उन्होंने सोनिया गांधी का वह पत्र ही सार्वजनिक कर दिया है, जो उन्होंने जांच रुकवाने के लिए तत्कालीन वित्तमंत्री पी. चिदंबरम को लिखा था।

पत्र में सोनिया गांधी लिखती हैं, “मैं आपको वह पत्र भेज रही हूं जो फर्स्ट ग्लोबल कंपनी के निदेशक ने मुझे भेजा था। उनका कहना है कि वित्त मंत्रालय के मातहत काम करने वाली एजेंसियां उन्हें परेशान कर रही हैं। मुझे सूचना मिली है कि इस मसले पर उच्च स्तरीय वार्ता हो चुकी है और उसमें उचित कदम उठाने पर सहमति भी बनी है। मैं आपसे चाहती हूं कि इस मुद्दे को वरीयता के आधार पर देखा जाए और यह सुनिश्चित किया जाए कि याचक के साथ अन्याय न हो।”

यह पत्र सोनिया गांधी का है जो उन्होंने 25 सितंबर 2004 को लिखा था। भेजा वित्तमंत्री पी.चिदंबरम को गया था। इस पत्र के पांच दिन पहले यानि 20 सितंबर 2004 को सोनिया गांधी के पास शंकर शर्मा का पत्र आया था। वही शंकर शर्मा जिनकी कंपनी फर्स्ट ग्लोबल है। इस पर देशद्रोह का आरोप था। इसने तहलका के साथ मिलकर चुनी हुई सरकार को अस्थिर करने की कोशिश की थी। उसी बाबत जांच चल रही थी। वहा जांच रुकवाने के लिए शर्मा ने सोनिया गांधी के दरबार में गुहार लगाई। थी।

वे अपने पत्र में लिखते हैं, “मैडम, जैसा कि आप जानती हैं कि भाजपा शासन के दौरान सरकारी एजेंसियां मसलन आयकर विभाग, प्रवर्तन निदेशालय, सेबी मेरा उत्पीड़न कर रही थीं। उन्होंने मेरे खिलाफ झूठे केस बनाए और परेशान करने लगे। मुझे आपको यह बताते हुए बहुत दुख हो रहा है कि मेरा उत्पीड़न आज की तारीख तक जारी है। कोई भी सरकारी एजेंसी मेरे खिलाफ चल रहे केस को वापस लेने के लिए तैयार नहीं है। जिस तरह का व्यवहार मौजूदा शासन में सरकारी एजेंसियां कर रही हैं, वैसा तो मेरे साथ भाजपा शासन के दौरान भी नहीं किया गया। 10 दिन पहले आयकर विभाग ने मेरी संपत्ति जब्त कर ली। मुझे विदेश भी जाने नहीं दिया जा रहा है। सरकारी एजेंसियों ने मेरा जीना दुश्वार कर दिया है। मेरी आप से गुजारिश है कि आप इन एजेंसियों को मेरा उत्पीड़न करने से राकें।”

उनके इस पत्र पर सोनिया गांधी ने तत्काल सुनवाई की। दस जनपथ से सीधे नार्थ ब्लॉक को आदेश जारी किया। उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा कि जिस व्यक्ति की वे पैरवी कर रही हैं, उस पर देशद्रोह जैसा संगीन आरोप है। उसकी जांच चल रही है। उसके तहत एजेंसियां कार्रवाई कर रही हैं। पर सोनिया गांधी को इसका ख्याल नहीं आया। वे तो शंकर शर्मा का पत्र मिलते ही सक्रिय हो गईं। क्या वे उसी का इंतजार कर रही थीं? बंद करने का आदेश जारी करें। हुआ कुछ ऐसा ही। पत्र आते ही उन्होंने शंकर शर्मा पर हो रही कार्रवाई की रिपोर्ट मांगा ली। चिदंबरम को लिखे गए पत्र में वे इसका जिक्र भी करती हैं।

वे लिखती हैं, “मुझे सूचना मिली है कि इस मसले पर उच्च स्तरीय वार्ता हो चुकी है….। यहां सवाल उठता है कि आखिर शंकर शर्मा और तहलका प्रकरण में उनकी इतनी दिलचस्पी क्यों थी? जाहिर है कुछ तो था, तभी तो उन्हें जांच, उत्पीड़न लग रही थी। शंकर शर्मा को भरोसा था कि सोनिया गांधी उन्हें जांच से बचाएगी।

हुआ भी यही। तहलका टेप और उसको फंड करने वाले शंकर शर्मा की जांच रोक दी गई। फुकन आयोग का गला घोट दिया गया। इसका गठन भारत सरकार ने किया था। उसे तहलका टेप से जुड़े मामलों की जांच करनी थी। यह वही टेप है जिसने सनसनी फैला दी थी। वैसे ही जैसे मौजूदा समय में राफेल ने फैला रखी है। राफेल का सच तो सबको मालूम है। पर तहलका टेप का सच सामने नहीं आया। उसे लेकर बस शोर ही था। जो स्वाभाविक भी था। मामला रक्षा सौदे से जुड़ा था। आरोप तत्कालीन रक्षामंत्री पर था। पर उस टेप में रक्षामंत्री कहीं नहीं थे। फिर भी संदेह के घेरे में थे। घेरा तहलका ने बनाया था या फिर रक्षा सौदे के दलालों ने बनवाया था, यह पता नहीं चल पाया।

कहा जा रहा है कि सोनिया गांधी ने उस सच को बाहर नहीं आने दिया। इस किस्से को जया जेटली ने अपनी किताब ‘लाइफ एमग द स्कार्पियन्स’ में विस्तार से बताया है। उनकी मानें तो सोनिया गांधी फर्स्ट ग्लोबल कंपनी के मालिक शंकर शर्मा और तहलका टीम के साथ खड़ी थीं। उनकी जांच फुकन आयोग कर रहा था। वह दो बातों की जांच कर रहा था। पहला- रक्षा सौदे में गड़बड़ी हुई है या नहीं और दूसरा- तहलका ने जो टेप में दिखाया, सही है या नहीं। यह किस्सा तब शुरू हुआ था जब 2001 में तहलका टेप सार्वजनिक हुआ था। उसमें जो दिखाया गया था, उससे खलबली मच गई थी। सत्तारूढ़ एनडीए पर भ्रष्टाचार का आरोप लगा था।

भाजपा अध्यक्ष बंगारू लक्ष्मण और रक्षामंत्री जार्ज फर्नांडीज समेत कई लोगों का नाम आया था। उन पर आरोप रक्षा सौदे में गड़बड़ी करने का लगा। कई लोगों को टेप में रिश्वत लेते दिखाया गया। इससे देश में सनसनी फैल गई। सरकार के हाथ-पांव फूल गए। जो लोग जार्ज को जानते-समझते हैं, सकते में आ गए। कोई यह मानने के लिए तैयार नहीं था कि जार्ज साहब रिश्वत ले सकते हैं। उसी दौर में रक्षा से जुड़े 15 सौदे हुए थे। संदेह की सुई उन्हीं सौदों पर थी। चूंकि जार्ज फर्नांडीज रक्षामंत्री थे, इसलिए वह सवालों के झंझावात में फंस गए थे। सरकार ने इस मसले की जांच कराने का निर्णय लिया। पूर्व न्यायमूर्ति के.वेंकटस्वामी के नेतृत्व में जांच आयोग का गठन हुआ। उसे भ्रष्टाचार के आरोप की जांच करनी थी। साथ ही टेप की सत्यता का भी पता लगाना था।

जया जेटली लिखती हैं कि टेप सही नहीं था। उसके साथ छेड़छाड़ हुई थी। इसे सिद्ध करना जरूरी था। तभी किसी की बेगुनाही साबित हो सकती थी। लिहाजा उन्होंने लंदन के फारेंसिक विशेषज्ञ क्रिस मिल से संपर्क किया। खुद टेप लेकर वहां गईं। क्रिस मिल ने टेप देखकर कहा कि इसमें बहुत गड़बड़ी है। यह टेप दूसरे टेप से कॉपी किया गया है। इसलिए तहलका से कहिए कि वह टेप की मूल कॉपी मुहैया कराए। तभी जाकर सही जांच हो सकती है। यह बहुत अहम जानकारी थी। लिहाजा क्रिस मिल को जांच आयोग के सामने लाने का निर्णय हुआ ताकि वह आयोग को टेप की सच्चाई बता सकें। वे लंदन से भारत आए। आयोग के समक्ष पेश हुए। पर क्रिस मिल को वहां बोलने नहीं दिया गया। गोपाल सुब्रमण्यम ने आयोग से कहा कि यहां उन्हीं को बोलने की अनुमति दी जाए, जो इस केस से जुड़े हैं। जया लिखती हैं कि उस दिन तो सच को दबा दिया गया, पर वह बाहर आया। कैसे? जेहन में सबसे पहला सवाल आता है। जया ने अपनी किताब में इसका जवाब दिया है। वे लिखती हैं कि

अंतत: तहलका टीम ने आयोग के सामने अपने झूठ और फरेब को खुद मान लिया। उन लोगों ने आयोग से कहा कि हम लोगों ने टेप के साथ छेड़छाड़ की है। तथ्यों को तोड़ -मरोड़ कर पेश किया है। उसमें कुछ बातों को हटाया गया है और कुछ जोड़ा गया है। स्टिंग से जुड़े जो बिल पेश किये गये हैं, वह सब झूठे हैं। उनमें कोई सच्चाई नहीं है। वे लोग आगे कहते हैं कि चेन्नई के हवाला करोबारी समसुद्दीन ने छह करोड़ रुपये शंकर शर्मा की कंपनी फर्स्ट ग्लोबल को दिया था। वह पैसा हवाला के जरिए फस्ट ग्लोबल कंपनी के मॉरिशस खाते में भेजा गया था। वहां से कंपनी के भारत के खाते में आया। उसी पैसे से ‘ऑपरेशन वेस्ट इंड’ को अंजाम दिया गया था।

वे लिखती हैं कि इसके बाद आयोग टेपों की फारेंसिक जांच और तहलका के वित्तीय मामलों की छानबीन के लिए तैयार हो गया। आयोग ने तहलका के वित्तीय लेनदेन की जांच करने का आदेश दे दिया। यह आदेश आते ही कपिल सिब्बल सक्रिय हो गए। उनका इस आदेश से क्या संबंध था? सबकी समझ से बाहर था। आयोग ने तो तहलका के वित्तीय मामलों की छानबीन करने को कहा था, कपिल सिब्बल का नहीं। फिर भी सिब्बल ने सक्रियता दिखाई। वे आयोग के अध्यक्ष न्यायमूर्ति के. वेंकटस्वामी पर ही सवाल उठाने लगे। उन पर आरोप लगाने लगे। चंदनधारी, मृदु भाषी और ईश्वर से डरने वाले के. वेंकटस्वामी इन आरोपों को सहन नहीं कर पाए। उन्होंने आयोग के अध्यक्ष पद से इस्तीफा दे दिया। इससे आयोग बिना अध्यक्ष का हो गया। उसके लिए नए अध्यक्ष की खोज होने लगी।

आखिरकार असम मानवाधिकार आयोग के मुखिया न्यायमूर्ति एसएन.फुकन तैयार हुए। वह बहुत सख्त थे। देरी उनको पसंद नहीं थी। वह तहलका प्रकरण को जल्द से खत्म करना चाहते थे। उन्होंने पदभार संभालते ही तहलका टेप की जांच करवाने की प्रक्रिया शुरू कर दी। उन्होंने जांच आयोग की पहली रिपोर्ट तैयार की और उसे 4 फरवरी 2004 को प्रधानमंत्री के हवाले कर दिया। वह रिपोर्ट सार्वजनिक होती, उससे पहले चुनाव की घोषणा हो गई। मई में कांग्रेस के नेतृत्व वाली संप्रग सरकार बन गई। तब तक फुकन आयोग ने तहलका टेप को फारेंसिक जांच के लिए भेज दिया था। उसकी जांच हो चुकी थी। मैथ्यू जे कॉस को अपनी रिपोर्ट आयोग को देनी थी। पर इसी बीच उन पर संप्रग सरकार दबाव डालने लगी। इसका जिक्र उन्होंने आयोग के समक्ष किया। मैथ्यू जे कॉस ने बताया कि संप्रग सरकार के मंत्री नहीं चाहते थे कि तहलका टेप की फारेंसिक रिपोर्ट आयोग के सामने पेश की जाए। लेकिन मैथ्यू दबाव में नहीं आए। वे आयोग के सामने पेश हुए। उन्होंने तहलका टेप के बारे में बताया कि टेप में जो बातचीत दिखाई गई है, उसके साथ छेड़छाड़ हुई हैं।

यह सब चल रहा था कि 1 अक्टूबर 2004 को वित्त मंत्रालय का आदेश आता है। उसमें कहा जाता है कि तहलका के वित्तीय मामलों की जांच आयोग नहीं करेगा। यह आदेश सोनिया गांधी के पत्र मिलने के तुरंत बाद जारी हुआ। इस आदेश के महीने भर बाद यानि नवबंर में फुकन आयोग को ही खत्म कर दिया गया। इस तरह तहलका टेप का सच हमेशा के लिए दफन हो गया। इसे जमींदोज करने में कांग्रेस दस जनपथ की भूमिका रही। वह चाहती नहीं थी कि तहलका टेप का सच सामने आए। यही वजह थी कि फुकन आयोग की रिपोर्ट को सार्वजनिक नहीं किया गया। जया जेटली की मानंे तो आयोग ने माना था कि रक्षा सौदे में कोई भ्रष्टाचार नहीं हुआ था। अगर यह सही है तो तहलका टेप तत्कालीन एनडीए सरकार को अस्थिर करने की राजनीतिक साजिश थी।

साभार: यथावत

नोट: मूल खबर पढने के लिए क्लिक करें

URL: Revealing: Sonia Gandhi stopped investigation of Tehelka tapes

Keywords: Tehalka, Tehalaka Tape, Sonia Gandhi, Sonia Gandhi Exposed, jaya jaitley, p chidambaram, तहलका टेप, सोनिया गांधी, सोनिया गांधी का खुलासा, जया जेटली, पी चिदंबरम

आदरणीय पाठकगण,

News Subscription मॉडल के तहत नीचे दिए खाते में हर महीने (स्वतः याद रखते हुए) नियमित रूप से 100 Rs डाल कर India Speaks Daily के साहसिक, सत्य और राष्ट्र हितैषी पत्रकारिता अभियान का हिस्सा बनें। धन्यवाद!  



Bank Details:
KAPOT MEDIA NETWORK LLP
HDFC Current A/C- 07082000002469 & IFSC: HDFC0000708  
Paytm/UPI/ WhatsApp के लिए मोबाइल नं- 9312665127

ISD Bureau

ISD is a premier News portal with a difference.

You may also like...

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *

समाचार