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हिंदुओं के लिए अपनी मानसिक विकृतियों को दूर करने का सही समय; अन्यथा, संग्रहालय भी उपलब्ध नहीं होंगे।

क्या यह दिलचस्प नहीं है कि भारत में हर दिन हिंदुओं को मारने के लिए मुसलमानों को गिरफ्तार किया जा रहा है, लेकिन कोई आक्रोश नहीं होता है, जबकि मुस्लिम हिजाब और बुर्का वैश्विक स्तर पर ट्रेंड कर रहा है? उडुपी जिले के पीयू गवर्नमेंट गर्ल्स पीयू कॉलेज में 4 फरवरी को शुरू हुआ हिजाब विरोध, जब कुछ मुस्लिम छात्राओं ने आरोप लगाया कि उन्हें कक्षाओं में भाग लेने से मना किया गया है, अब अंतरराष्ट्रीय सुर्खियों में है।
यह मूर्खता है या साजिश जिसके अंतर्गत कांग्रेस नेता प्रियंका वाड्रा ट्वीट करती हैं?
“Whether it is a bikini, a ghoonghat, a pair of jeans or a hijab it is a woman’s right to decide what she wants to wear. This right is GUARANTEED by the Indian constitution. Stop harassing women.”

क्या ऐसा हो सकता है कि प्रियंका वाड्रा स्कूल के ड्रेस कोड से अनजान हों? क्या खुद प्रियंका कभी बिकिनी पहनकर स्कूल गई थीं? जो ऐसा ट्ववीट कर रहीं है। प्रियंका वाड्रा के ट्वीट को मूर्खता तो कदापि नहीं माना जा सकता है, लेकिन यह एक साजिश प्रतीत होती है। क्या प्रियंका वाड्रा इस तरह के ट्वीट के जरिए हिंदुओं को बदनाम करने की टूलकिट का हिस्सा हैं? हिंदू छात्रों के सामने, हमने एक मुस्लिम लड़की का अल्लाह हू अकबर का नारा लगाते हुए एक वीडियो देखा। पूरा मुस्लिम-वामपंथी गैंग अब बुर्का गर्ल को इंटरनेशनल सेलेब्रिटी बनाने की कोशिश कर रहा है। हालाँकि, मुझे अभी तक प्रियंका वाड्रा, तथाकथित नारीवादियों, या गंगा जमुनी तहजीब के तथाकथित प्रहरियों का एक भी ट्वीट उस हिंदू लड़की के समर्थन में नहीं मिला है, जो हिजाब विवाद के कारण मुसलमानों द्वारा पथराव में घायल हो गई है। इसे आप षडयंत्र या पाखंड नहीं कहेंगे तो क्या कहेंगे?

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इस देश के हिंदू कदाचित भूल गए हैं कि लावण्या नाम की एक हिंदू लड़की को कुछ दिन पहले ही धर्मांतरण के राक्षसों द्वारा आत्महत्या करने के लिए मजबूर किया गया था। भारत में इस जघन्य अपराध के खिलाफ विरोध प्रदर्शन शुरू ही हुए थे कि यह बुर्का एपिसोड प्रकट हो गया। कहीं ये पूरा हिजाब या बुर्का कांड लावण्या के प्रकरण को दबाने का कुत्सित षड्यंत्र तो नहीं है? मेरा मानना ​​है कि हिजाब की यह झूठी घटना ताड़का द्वारा पूतना को बचाने का एक सुनियोजित प्रयास है। इस इस्लामिक-ईसाईत गठजोड़ का अब पर्दाफाश हो गया है। ये दोनों मत दुनिया भर में आपस में युद्धरत हो सकते हैं, लेकिन यह कहना अतिश्योक्ति नहीं होगी कि ये दोनों भारत में हिंदुओं और हिंदुत्व को मिटाने के लिए सहक्रियात्मक रूप से काम कर रहे हैं। आखिर हिंदुत्व की राह में बाधा का क्या कारण था? यह एक दृढ़ धारणा है कि हिंदुत्व या प्राचीन भारतीय संस्कृति में स्वाभाविक एवं नैसर्गिक रूप से कोई दोष नहीं है। जब हम हिंदुत्व विरोधी कारकों को देखते हैं, तो पता चलता हैं कि हिंदू समाज में अंधविश्वास और अंग्रेजी आधारित शिक्षा दो प्रमुख कारण हैं। इन दोनो कारकों के कारण होने वाले विनाश को दर्शाने के लिए निम्नलिखित बिंदुओं का उपयोग किया जा सकता है:

(1) हिंदू विरोधी तत्वों को सक्रिय और मजबूत किया।
(2) हिंदुओं की मान्यताओं को कमजोर किया ।
(3) भारत का गौरवशाली इतिहास मिथक या मिथोलॉजी बन गया।
(4) हिंदू अपनी प्राचीन श्रेष्ठता को भूलकर विनाशक अब्राह्मिक पंथों के अनुयायियों द्वारा गढ़े गए झूठे कथानकों के बंदी बन गए।
(5) हिंदुओं को उनके धार्मिक ग्रंथों, गुरुओं, ऐतिहासिक व्यक्तित्वों और शिक्षाओं पर संदेह करने के लिए प्रेरित किया।

मैकाले के समय में खुलेआम शुरू हुआ हिंदुत्व विनाश का खेल आज भी जारी है। और हिंदू अपनी शाश्वत नींद में सो रहा है। अब यह इतनी बुरी स्थिति हो गयी है कि अति वामपंथी सागरिका घोष ने “इंटरनेट हिंदू” नामक शब्द तक गढ़ दिया। उसने ऐसा इसलिए किया क्योंकि वह जानती है कि हिंदू सिर्फ इंटरनेट पर ही शोर मचाएंगे। हिंदू मंदिरों की वर्तमान स्थिति क्या है? इस गड़बड़ी के लिए कौन दोषी है? आजकल जब हिंदू मंदिरों को अपवित्र किया जाता है या अन्य मंदिर विरोधी घटनाएं होती हैं, तो सोशल मीडिया पर लोग हल्ला तो खूब मचाते हैं, लेकिन जमीन पर निवारण की दिशा में काम करने वालों की संख्या बहुत कम होती है। उस दिशा में काम करने वाले व्यक्तियों की संख्या बढ़ाने की जिम्मेदारी किसकी है? वामपंथियों की या मंदिर विध्वंशकों की?

हिंदू विरोधी धर्म (इस्लाम और ईसाई धर्म) आज सड़कों पर आ गए हैं, और पूरे देश में हिंदू घरों में तोड़-फोड़ और नमाज अदा करने जैसी घटनाएं होने लगी हैं; लेकिन इसके विपरीत, पूजा या संध्या आरती के समय हिन्दुओं के मंदिरों में घंटी और ढोलक बजाने के लिए इलेक्ट्रिक मोटर का उपयोग किया जाता है। इसे अब हिंदू विकृति नहीं कहें तो फिर क्या कहें? यह विकृति आज की सत्ता के भूखे राजनीतिक दलों को लाभ पहुँचाती है, जिसके परिणामस्वरूप मुल्ला मौलबीयों को भारी मानदेय मिलता है जबकि हिंदू मंदिर के पुजारियों को प्रताड़ित किया जाता है और संतों की हत्या की जाती है। भारत जैसे हिंदू-बहुल देश में वामपंथी लेखकों की किताबें हॉटकेक की तरह बिकती हैं और उनका लेखन रातों-रात वायरल हो जाता है। दूसरी ओर, सनातन हिंदू धर्म और राष्ट्र के बारे में लिखी गयी पुस्तकें पाठकों की राह देखती रहती हैं। यहां तक ​​कि सबसे शक्तिशाली हिंदू संगठन भी अपने हिंदू विद्वानों का समर्थन और प्रोत्साहन करने पर विचार तक नहीं करते हैं। क्या यह विचार कि ” काम चल रहा है” हिंदू विकृति नहीं है तो और क्या है? क्या सनातन धर्म पर हिंदू विचारकों की पुस्तकें या लेख गैर-हिंदू पढ़ेंगे? क्या वे उन पुस्तकों को हर हिंदू को उपलब्ध कराएंगे? क्या गैर-हिंदू हिंदू जागरण को बढ़ावा देने वाली फिल्में या वीडियो देखेंगे? ऐसी कई समस्याएँ हैं जिनका उत्तर केवल हिन्दू ही इस दिशा में काम करके दे सकते हैं; और अगर ऐसा नहीं होता है, तो सच्चाई यह है कि इस्लाम और ईसाईत ने कई सभ्यताओं को दुनिया भर के संग्रहालयों तक सीमित कर दिया है।

यदि हिंदू ऐसा मानते हैं कि उनके साथ ऐसा कभी नहीं होगा तो उसे मूर्खता ही कहा जाएगा। पाकिस्तान पहले हिंदू भारत का हिस्सा था, ठीक वैसे ही बांग्लादेश भी हिंदू भारत का हिस्सा था, लेकिन इन दोनों देशों की वर्तमान पहचान क्या है? क्या हिन्दू यह नहीं जानते? यह निर्विवाद सत्य है, और हर कोई जानता है कि आज नहीं तो कल, जो राम, कृष्ण, शिव, शक्ति और अन्य देवताओं को नहीं मानते, वे निस्संदेह हिंदुओं से लड़ेंगे। यह एक कड़वी सच्चाई है, और जितनी जल्दी हिंदू इसे स्वीकार कर ले और इसके लिए तैयार हो जाए, उतना ही अच्छा है। आज बड़ी संख्या में जिम ट्रेनर कौन हैं क्या हिन्दू नहीं जानते? क्या यह सच नहीं है कि जिम में वही गैर-हिंदू ट्रेनर हिंदू लड़कियों और महिलाओं को ट्रेनिंग देते हैं? क्या हिंदू इस बात से असहमत हो सकते हैं कि इन जिमों का इस्तेमाल लव जिहाद के लिए किया जा रहा है?

क्या हिन्दू यह नहीं जानते कि बड़ी संख्या में आज नाई, दर्जी, सब्जी विक्रेता, टैक्सी चालक और पंचर वाले कौन हैं? हिंदू माता-पिता को अपने बच्चों के भविष्य के बारे में चिंतित होने की आवश्यकता है? नशाखोरी से किसका भविष्य खतरे में है? क्या नशा करने वाले जिम जाते हैं? लव जिहाद, लैंड जिहाद और कुकरमुत्ते की तरह उगने वाली मजारों से कौन परेशान है? क्या हिन्दू ऐसा सोचता है कि गिरजाघरों या मस्जिदों में रामायण पाठ या यज्ञ होगा? क्या हिंदू इस बात से अनजान हैं कि सेक्युलरिज्म का इस्तेमाल हिन्दुओं के खिलाफ एक हथियार के रूप में किया जा रहा है? इस वास्तविकता को जल्द से जल्द समझ लेना ही हिंदुओं के हित में है नहीं तो कुछ इलाकों में ‘यह घर बिकाऊ है‘ के बोर्ड दिखने लगे हैं। कॉन्वेंट स्कूल और कॉलेज किसके कारण फल फूल रहे हैं? उत्तर है हिन्दू। दुनिया से मूर्तिपूजक हिंदुओं को मिटाने के लिए कॉन्वेंट स्कूलों की स्थापना की गई थी। यह बात जानते हुए भी आज हिंदू बच्चे इन कॉन्वेंट संस्थानों में पढ़ने के लिए लाखों रुपये देते हैं। मूर्खता की पराकाष्टा तब होती है जब स्वयं को हिंदू नेता कहने वालों के बच्चे या हिंदू जागरण के लिए समर्पित संगठनों के पदाधिकारियों के बच्चे भी इन कॉन्वेंट संस्थानों में में पढ़ने जाते हैं। हिन्दुओं की इस मानसिकता को आप क्या नाम देंगे अगर इसे मूर्खता नहीं कहोगे तो?

हिंदू समाज की मानसिक विकृति के बारे में बहुत कुछ लिखा जा सकता है, लेकिन यह भी सच है कि हिंदुत्व में अभी भी जीवन शक्ति है। हिंदुत्व की जीवन ज्योति तब तक जलती रहेगी जब तक वेद, वाल्मीकि रामायण, महाभारत और उपनिषद जैसे हिंदू ग्रंथ हिन्दुओं के लिए प्रासंगिक ग्रंथ बने रहेंगे। जब तक हिंदू अपनी गुरु परंपरा का पालन करते रहेंगे और जब तक हिंदू समाज सनातन के लिए धर्म के रूप में काम करता रहेगा नाकि रिलिजन। केवल एक ही कर्तव्य है जिसे पूरा करने की आवश्यकता है, और वह कार्य हिंदुओं को ही करना होगा। वह कार्य है अपनी मानसिक विकृति को दूर करें और अपने घरों से हिंदू जागरण और उसकी मजबूती के के लिए कार्य करें। नहीं तो बाकी सभ्यताओं को संग्रहालय नसीब हो गया था हिन्दुओं को यह भी नहीं मिलेगा। इसका ताजा उदाहरण अफगानिस्तान है जहाँ भगवान बुद्ध की गुफाओं में बनी मूर्तियों को तोड़ दिया गया था। निर्णय हिन्दुओं को करना है!

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Dr. Mahender Thakur

The author is a Himachal Based Educator, columnist, and social activist. Twitter @Mahender_Chem Email mahenderchem44@gmail.com

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2 Comments

  1. Anonymous says:

    Perfectly penned down! Hindu jo shuturmurg ki bhaanti ret mein gardan chupa kar satya ko nkaarne ka pryas krre hain unko apni iss avstha se bahar niklna hi hoga. Hindus have become weak and meek and they just don’t wanna step out of their comfort zone. Hindus ki isi kmi ka fyda utha kar politically motivated religions Hindus ka khoon tk peene par utaaru hain. They just need to wake up.

  2. Anonymous says:

    Brilliantly written …kudos to you🙏👍

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