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पुलिसिया सख्ती से रिया उगल सकती है कई राज़

सुशांत सिंह राजपूत के पिता ने सुशांत की प्रेमिका रिया चक्रवर्ती पर गंभीर आरोप लगाए हैं, इसके तुरंत बाद रिया और उसके परिजन वकीलों की सलाह मांगने लगे। आधी रात को एक महिला वकील रिया के घर पहुँचती है और दोनों गिरफ्तारी की सूरत में अग्रिम जमानत लेने पर चर्चा करती हैं। पटना पुलिस की टीम के मुंबई पहुँचने पर रिया ने सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका दाखिल कर गुहार लगाई है कि उसका केस पटना से मुंबई ट्रांसफर किया जाए। एक अट्ठाइस साल की अभिनेत्री अभिनय के अलावा कितना कुछ जानती हैं। वह पटना पुलिस टीम के पहुँचने के बाद तुरंत अपनी जमानत के रास्ते खोजने लग जाती है। क्या ऐसा नहीं लगता कि रिया के पीछे एक अदृश्य टीम काम कर रही है, जो उसे सलाह दे रही है कि कब, कहाँ, क्या करना है।

प्राचीन काल में भारत में विष कन्याओं का चलन था। शत्रु को मारने के लिए सुंदर कन्याओं को बाल्यकाल से विष की थोड़ी-थोड़ी मात्रा दी जाती थी, ताकि युवा होने पर वह संसर्ग के दौरान शत्रु की हत्या शरीर में बसे विष से कर सके। आधुनिक काल में भी विष कन्याएं विद्यमान हैं, बस अंतर इतना है कि अब उन्हें विष नहीं दिया जाता, बल्कि उनको कूटनीति सिखाई जाती है। उन्हें सिखाया जाता है शत्रु को प्रेमी बनाकर उसे अपने वश में कैसे करना है और कब उचित समय आने पर उसे इस संसार से विदा कर देना है।

सुशांत के पिता ने जिस तरह के गंभीर आरोप एफआईआर में लगाए हैं, उसे देखते हुए अब मुंबई पुलिस को दोबारा महेश भट्ट को बुलाकर पूछताछ करनी चाहिए। इससे मुंबई पुलिस की जाँच पर भी सवाल खड़े हो गए हैं। यदि सुशांत के पिता के आरोपों में सच्चाई है तो इसका मतलब ये समझा जाना चाहिए कि मुंबई पुलिस ने ‘किसी’ के दबाव में जाँच को भटका कर रिया को इस मामले से निकालने की कोशिश की है।

क्या रिया सोची समझी साजिश के तहत सुशांत के जीवन में लाई गई थी। सुशांत के पिता ने अपने आरोप में कहा है कि रिया ने सोची समझी साजिश के तहत सुशांत से जान पहचान बढ़ाई। ये बात तो छुपी ही रह जाती यदि सुशांत के पिता ग़म खाकर चुप बैठ जाते। 

महेश भट्ट का नाम इस प्रकरण में उछल रहा है तो वह संयोग नहीं है। कंगना रनौत ने पहले ही इस बारे में आरोप लगाए हैं कि इस मामले में महेश भट्ट का बड़ा रोल हो सकता है। आखिर मुंबई पुलिस ने इतना महत्वपूर्ण तथ्य कैसे नज़रअंदाज़ कर दिया कि भट्ट परिवार में से किसी ने रिया को सुशांत की मौत से पहले कॉल करके उनके घर से निकल जाने की सलाह दी थी।

मुंबई पुलिस के आचरण से लग रहा है कि वह इस केस की जाँच को भटकाना चाहती है। बहुत से तथ्य पुलिस ने छोड़ दिए हैं। जैसे सुशांत के घर की डुप्लीकेट चाबी अब तक बरामद नहीं हुई। जब तक ये चाबी नहीं मिल जाती, कैसे माना जा सकता है कि दरवाज़ा अंदर से लॉक किया गया था।

रिया ने जितनी फुर्ती से सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दाखिल की है, उससे ये लगता है कि कोई उनको लगातार ‘निर्देशित’ कर रहा है। निर्देशित करने वाला जानता है कि यदि केस महाराष्ट्र से बाहर जाता है और रिया को गिरफ्तार कर पूछताछ की जाती है तो कई राज खुल सकते हैं। निर्देशित करने वाला ये भी जानता है कि पुलिस ने सख्ती दिखाई तो रिया टूट जाएगी क्योंकि वह सख्तजान नहीं है।

ये भी तय है कि इस केस में महाराष्ट्र सरकार के ही कुछ लोग जाँच की दिशा पलट रहे हैं। उन लोगों की भी पूरी कोशिश होगी कि एक तो रिया को अग्रिम जमानत मिल जाए और दूसरा ये केस ट्रांसफर न होने पाए। इस बात की गहन आशंका है कि इस केस में डी-कंपनी की इन्वॉल्वमेंट है और केस दूसरे राज्य में जाने पर कोई दबी जानकारी बाहर आ सकती है।

बिहार सरकार ने इस प्रकरण में जैसी फुर्ती दिखाई है, उससे प्रतीत हो रहा है कि वह इस केस को बिहार ले जाने के लिए तत्पर है। ये आगे जाकर दो राज्यों की लड़ाई का मामला बन सकता है। रिया चक्रवर्ती और उसके परिवार की गर्दन इस केस में फंस चुकी है।

पटना पुलिस की टीम मुंबई में तथ्य तलाश रही है और इस बात की पूरी संभावना बन रही है कि अगले कुछ दिनों में ‘विषकन्या’ पुलिस की गिरफ्त में आ जाएगी। ऐसे में ये उम्मीद बनती है कि पुलिसिया टॉर्चर के बाद रिया ये उगल दे कि उसे विष कन्या बनाकर सुशांत के पास किसने भेजा था और महेश भट्ट का इस केस में क्या किरदार है।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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2 Comments

  1. Avatar Anju says:

    Worst things, kisi ki laash par aap apni Khushnuma zindagi ki neev nhi rakh sakte . Daulat shauhrat aur kaamyabi pahle apni se door karti hai phir khud se, yahan ruk kar aatm-manthan ki zaroorat hai yeh sab kiske liye chahiye…..apne liye, apno ke liye yah phir andhi daud ka hissa hone ke liye. SSR ke liye nyay toh chahiye par jo sirf chand tukdon ke liye shadyantra rachte hain kya woh manushya hain…..? Kal unka bhi wahi hashra hoga

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