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रोहित सरदाना ने दिखाया राहुल की चमचागीरी कर रहे आशुतोष को आईना !

जब कोई पत्रकार राजनीति की राह पकड़ता है तो वह पत्रकारिता की ओर मुड़ता नहीं, लेकिन आशुतोष अपनी नई मंशा के साथ पत्रकारिता की ओर रुख क्या किया है अपनी नई राजनीतिक मंजिल की तलाश में जुट गए हैं। तभी तो आते ही राहुल गांधी की डुगडुगी बजानी शुरू कर दी है। उन्होंने हाल ही में शुरू की अपनी वेबसाइट ‘सत्य हिंदी’ में ‘क्या झुकने के लिये कहा गया तो रेंगने लगा है मीडिया?’ शीर्षक से जो आलेख लिखा है उससे तो साफ है कि वे राहुल गांधी की ओर से बैटिंग करने में जुट गए हैं। नहीं तो जिस एडिटर्स गिल्ड की आलोचना इसलिए की जाती है कि उसने एएनआई की मुख्य संपादक स्मिता प्रकाश के खिलाफ राहुल गांधी की अमर्यादित टिप्पणी पर कोई प्रतिक्रिया दी ही नहीं, उसने तो इसके बहाने राहुल की आलोचना करने वालों को आईना दिखाया है और राहुल गांधी को बचाया है। लेकिन आशुतोष हैं कि इस बहाने पूरे मीडिया को ही कठघरे में खड़ा कर दिया है। लेकिन रोहित सरदाना ने उन्हे आईना दिखा दिया है।

आम आदमी पार्टी से निकले आशुतोष के इस आलेख पर रोहित सरदाना ने उन्हें मीडिया की हकीकत बयां किया है। उन्होंने आशुतोष के नाम से ट्वीट करते हुए उन्हें बताया है कि मीडिया रेंगने नहीं लगा है बल्कि मीडिया में आई नई पीढ़ी पूरानी मठाधिशी को धत्ता बताना शुरू कर दिया है। एकतरफा नैरेटिव सेट करने वाले ‘घाघों’ को चुनौती देने के लिए नई पीढ़ी नए विचारों के साथ खड़ी हो गई है। इसलिए आशुतोष जैसों को बुरा लगने लगा है।

रोहित सरदाना ही क्यों सुधीर चौधरी ने भी आशुतोष को एक बड़े पत्रकार की प्रश्नावली याद दिलाते हुए आईना दिखाया है। जिस वरिष्ठ पत्रकार स्मिता प्रकाश के खिलाफ टिप्पणी करने वाले राहुल गांधी के बचाव में आशुतोष उतरे हैं, सुधीर चौधरी ने उसी राहुल गांधी की मां से पूछे गए सवालों के बारे में बताया है। आशुतोष को बताना चाहिए कि क्या किसी बड़े पत्रकार ‘गांधी फैमिली की रानी’ से इसी प्रकार के प्रश्न पूछने चाहिए? ऐसे में क्या राहुल गांधी स्मिता प्रकाश पर सवाल खड़े करने के योग्य भी हैं?

सरदाना ने आशुतोष के नैरेटिव स्थापित करने के मामले का जवाब देते हुए लिखा है कि जहां तक नैरेटिव स्थापित करने की बात है तो यह मामला बहुत पुराना है जो सालों से स्थापित रहा है। अभी तो स्थापित नैरेटिव को नए नैरेटिव से चुनौती मिली है। कई लोगों का तो मानना है कि अब तो इसमें संतुलन आया है। हां यह बात दिगर है कि संतुलन बैठाने की स्थिति में कइयों की दुकानदारी बंद हो गई है।
आशुतोष ने अपने आलेख में जो एक बात लिखी है वह यह कि राहुल गांधी जितना मीडिया ट्रायल किसी और का नहीं हो रहा है। मीडिया एक प्रकार से राहुल गांधी पर ज्यादती कर रहा है। लग रहा है कि आप में इतने दिनों तक रहने के बाद आशुतोष को भी झूठ बोलने तथा अपना ही पक्ष देखने की आदत हो गई है। तभी तो उन्हें देश में मोदी और शाह का मीडिया ट्रायल दिखा ही नहीं। असल में वे उसे देखना नहीं चाहते थे।

तभी तो सरदाना ने अपने ट्वीट के माध्यम से आशुतोष को चुनौती देते हुए कहा है कि अगर देश में मोदी और शाह से ज्यादा ट्रायल राहुल गांधी का हुआ हो तो बताइये। सरदाना ने आशुतोष को पत्रकारिता की एक विधा साक्षात्कार के बारे में बताने की चेष्टा की है। क्या आशुतोष यह नहीं चानते कि आप अपने मेहमानों से सवाल पूछने के हकदार हैं, उनसे आप अपनी मर्जी के मुताबिक जवाब बुलवा नहीं सकते हैं। जहां तक स्मिता प्रकाश के मोदी के साथ लिए गए साक्षात्कार की बात है तो उन्होंने मोदी से अपनी मर्यादा में रहते हुए वे सारे सवाल किए जो किए जाने चाहिए थे। उनके प्रश्नों का जवाब देने की जवाबदेही मोदी की थी। मोदी के जवाब के लिए स्मिता कैसे जिम्मेदार मानी जा सकती है।

URL : Rohit Sardana showed the miror to Ashutosh on narrative of media!

Keyword : narrative of media, Editors Guild, Rohit Sardana, Ashutosh, सत्य हिंदी, राहुल गांधी

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