गो-हत्या का विरोध करने वाले दो साधुओं का गला काटा गया, लेकिन राजदीप, रवीश, बरखा, शेखर गुप्ता, वरदराजन जैसों के मुंह पर जड़ा है सेक्यूलर ताला!

गायों को बचाने के लिए एक मंदिर परिसर में घुसकर दो साधुओं की गला काटकर हत्या कर दी जाती है लेकिन इस मामले में राजदीप, रवीश, बरखा, शेखर गुप्ता, वरदराजन जैसे कथित लिबरल के मुंह पर ताला जड़ा है! चूंकि साधुओं का गला रेतने वाले मुसलिम सुमदाय से है, इसलिए यह कथित सेक्युलर गैंग उन्हें मौन रहकर सपोर्ट कर रहा है! वहीं अगर किसी मीट माफिया और गाय की तस्करी करने वालों की हत्या हो जाती है तो ये लोग पूरे हिंदू समुदाय पर ‘लिंचिंग लिंचिंग’ कह कर हमला कर देते हैं!

मालूम हो कि उत्तर देश के औरैया जिले के कुदरकोट गांव स्थित मंदिर परिसर में घुसकर गोकशी के विरोध करने वाले दो साधुओं की हत्या कर दी गई थी तथा तीसरे साधु को पीटकर अधमरा कर दिया गया था। इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों ने खुद स्वीकार किया है कि साधुओं द्वारा गोकशी के विरोध के कारण ही दोनों साधुओं की हत्या कर दी गई थी।

मालूम हो कि 14-15 अगस्त की रात एक ही समुदाय के करीब 17-18 कट्टरपंथियों ने कुदरकोट स्थित मंदिर में घुसकर वहां के तीन पुजारियों पर धारदार हथियारों से हमला कर दिया था। मुसलिम समुदाय से आने वाले कट्टरपंथियों ने जहां दो साधुओं की हत्या कर दी वहीं मुख्य पुजारी को अधमरा कर छोड़ दिया। इस मामले में पुलिस ने जिन 14 बदमाशों की पहचान की है उसमें से 11 कट्टरपंथी घटनास्थल पर मौजूद थे।

पुलिस ने उन्हीं में से पांच लोगों को गिरफ्तार किया है। जिन कट्टरपंथियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया है उनमें सलमान, नदीम, शहबाज, मजनू उर्फ नाजिम और गब्बर शामिल है। पांचों कट्टरपंथियों की पहचान गांव कुदरकोट निवासी के रूप में हुई है। इन्होंने स्वीकार किया है कि गोकशी के विरोध करने के कारण उनलोगों ने दोनों साधुओं की हत्या की थी। इस मामले में पुलिस को कई और आरोपियों की तलाश है।

मुख्य बिंदु

*इस मामले में गिरफ्तार पांच आरोपियों ने स्वीकारा है कि गायों को बचाने के कारण ही दोनों साधुओं की हत्या की थी

*साधु की हत्या मामले में पुलिस को अभी कई और आरोपियों की है तलाश

इस मामले के प्रकाश में आते ही प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने 48 घंटे के अंदर इस घटना की जांच के आदेश दिए। इस मामले में कानपुर पुलिस के महानिदेशक ने पांच पुलिस टीम गठित करने का निर्देश दिया था। पुलिस की सभी पांचों टीम इस मामले की जांच करने में जुटी है। पुलिस टीम ने इस मामले में सलमान, नदीम, शहबाज, मजनू उर्फ नाजिम और गब्बर को गिरफ्तार कर उससे छह धारदार हथियार भी बरामद कर लिए हैं जिससे साधुओं की हत्या को अंजाम दिया गया था।

इतना ही नहीं गिरफ्तार आरोपियों ने पूछताछ के दौरान अपने उन साथियों का भी नाम बताया है जो इस घटना को अंजाम देने में शामिल था। उन्होंने बताया है कि इस घृणित अपराध में उनके साथ शहबाज, चुन्नू उर्फ साहिब आलम, छोटे, भोले, दानिश, राजा, चांद और जब्बर शामिल था। पुलिस इस सभी आरोपियों को जल्द से जल्द गिरफ्तार करने के प्रयास में जुटी है।

गौरतलब है कि मारे गए दोनों साधुओं की लाश बीते बुधवार की सुबह उस समय श्रद्धालुओं को मिली जब वे लोग भयानक नाथ महादेव मंदिर में पूजा करने जा रहे थे। दोनों साधुओं में एक की पहचान लज्जा राम यादव और दूसरे की हरभजन के रूप में हुई। बदमाशों ने दोनों साधुओं के हाथ पीछे कर कपड़ा से बांधकर उनकी गला रेत कर हत्या कर दी थी। मंदिर के मुख्य पुजारी के रूप में पहचान हुई तीसरे साधु राम शरण को गंभीर हालत में इटावा स्थित सेफई अस्पताल में इलाज के लिए रेफर किया गया है। इस घटना के बाद प्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने मृतक साधुओं के परिजनों को 5-5 लाख रुपये तथा घायल साधु को एक लाख रुपये राहत राशि देने की घोषणा की है।

दैनिक जागरण अखबार में प्रकाशित खबरों के मुताबिक प्रदेश में इस प्रकार की यह पहली घटना नहीं है। कहा गया है कि प्रदेश में इस प्रकार की कई घटनाएं सामने आई है। कुछ दिन पहले ही इसी प्रकार अलीगढ़ जिले में एक मंदिर के मुख्य पुजारी कालीदास तथा अन्य पुजारियों की पीट-पीट कर हत्या कर दी गई थी। इसके विरोध में स्थानीय लोगों ने प्रदर्शन किया था। उन्नाव के एक मंदिर में भी कट्टरपंथियों ने कोहराम मचाया था।

कट्टरपंथियों ने मंदिर में रखी मूर्तियां तोड़ दी थी। लेकिन राष्ट्रीय मीडिया ने इस प्रकार की खबरों को जगह देना उचित नहीं समझा। क्योंकि इन घटनाओं में मुसलिमों ने हिंदू पुजारियों को पीटा था या उनकी हत्या कर दी थी। लेकिन यही काम किसी हिंदू बहुल इलाके में हुआ होता तो हर मीडिया के लिए सुर्खियां बन गई होती। राजदीप, रवीश, बरखा, शेखर गुप्ता, सागरिका, राणा अयूब, वरदराजनों तुम लोग अपनी एक तरफा रिपोर्ट से देश को को हिंदू-मुसलमान के तनाव में झोंक रहे हो!

URL: Sadhus were killed in Auraiya Because of opposition cow slaughtering

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