नौटंकी वाली की तरह बकैत पांड़े घड़ी-घड़ी नखरे कर रहा है! कल देश के सामने रोजगार की समस्या थी, आज उसकी जान का डर देश की समस्या बन गयी है!



satire on indian media and journalism. courtesy: Cartoon from net
Sandeep Deo
Sandeep Deo

डूबते न्यूज चैनल और कांग्रेस का बोझा ढो रहे ‘पीडी पत्रकारों’ की नौटंकी आजकल पूरे शबाब पर है! नौटंकी वाली भी जितने नखरे नहीं दिखाती, उससे कहीं अधिक TB की बीमारी से जूझ रहे न्यूज चैनल का बकैत पांड़े दिखा रहा है! रोज एक नई नौटंकी, ताकि जनता में अपनी औकात को बनाए रख सकें! हलांकि औकात उसकी दो कौड़ी की है, लेकिन नौटंकी वाली को भी कभी-कभी गुमान हो जाता है कि वह मुगलों की नाजायज पैदाइश है, फिर यह तो है ही कांग्रेस के नाजायज धंधे की उपज!

अभी पिछले सप्ताह की ही तो बात है! मुझे और हमारे वेब इंडिया स्पीक्स को ‘माइनो मीडिया’ के एक ‘पीडी पत्रकार’ ने 100 करोड़ का नोटिस भेज दिया था ताकि मैं डर जाउं और उसके भ्रष्टाचार की कहानी लोगों को बताना बंद कर दूं! मैं तो नहीं डरा और न ही मैंने शहीद होने के प्रयास में विधवा विलाप किया, जैसा कि बकैत पांड़े अपने प्राइम शो से लेकर सोशल मीडिया तक में कर रहा है। उसके चमचे भी खूब चिल्ला रहे हैं कि हमारे एक मात्र ईमानदार पत्रकार को भगवावादी ‘नौटंकी वाली भौजी’ बनाकर सता रहे हैं!

अरे उसने पूरी ‘नौटंकी’ वाली पत्रकारिता ही तो की है, लोग मौज लेंगे ही! कभी सीरियस पत्रकारिता या वस्तुनिष्ठ पत्रकारिता करता, तब तो लोग इज्जत भी देते? नखरे दिखाते दो कौड़ी के बकैत से ज्यादा तो उस नौटंकी वाली की इज्जत, जो अपने ग्राहकों के साथ दीन-ईमान तो रखती है! इस बकैत ने तो पत्रकारिता का दीन-ईमान बेच कर घाघरा पहन लिया है! आखिर इसके मालिक ने भी तो 2004 से 2014 तक ‘पेटिकोट’ पहना हुआ था!

मुझे 100 करोड़ की मानहानि का नोटिस थमाने वाले ‘पीडी’ के चमचों ने न जाने मुझे कितनी सारी धमकी दी? चमचे खुलेआम लिख रहे थे कि ‘तू जिंदा क्यों है?’ ‘तुझे उठा लेंगे?’ फलां-ढिंकना! मैंने तो ऐसों को सीरियस लेने की जगह उनसे और मौज ले लिया, क्योंकि उठाईगिर से क्या डरना? और जो ज्यादा बत्तमीजी कर रहे थे, उन्हें ब्लॉक कर दिया। खेल खत्म! सोशल मीडिया पर मौजूद मेरे किसी मित्र को इसका पता भी नहीं चला!

लेकिन कहते हैं न कि जिसका करेक्टर ढीला होता है, वह बार-बार अपने करेक्टर की दुहाई देते हुए शोर मचाता है, तो लूज करेक्टर बकैत उसी तरह बोकार कर रहा है! बोकार तो तू समझ रहा है न बकैत? उल्टी, जो तू रोज रात को अपने टीवी स्क्रीन पर करता और खुद उसे अपने चेहरे पर मल लेता है! बकैत पांड़े की एक बहनिया भ्रष्टाचार में घिरी है और भाई बलात्कार में! अब सोचिए, यह यदि अपना पेटिकोट उठा-उठा कर नाच रहा है तो क्या गलत कर रहा है? आखिर खानदानी भांड है, चिल्लाकर और घाघरा उठा-उठा कर मांगने की आदत जो पड़ी है!

बकैत पांड़े के चैनल के कुछ पत्रकार मेरे भी मित्र हैं। चैनल डूब रहा है। उस चैनल का मालिक कालेधन को गोरा करने में उस्ताद रहा है। उसने तो पिछली कांग्रेस सरकार के एक मंत्री का ही 5000 करोड़ का काला धन गोरा कर दिया, अपनी बीबी के साथ मिलकर।

और हां, उस चैनल में अपनी बीबीयों का उपयोग करने की एक लंबी फेरहिस्त है। एक शर्माजी हैं, अपनी बीबी की सरकारी नौकरी के बल पर एंकरिंग का जॉब पाया और फिर दोबारा बीबी की सरकारी नौकरी को बेच कर विदेश का टूर स्पॉंसर कराया। उस चैनल में एक और बीबी है! वह एक कांग्रेसी की बीबी है। जबरदस्त की एंकर है। मंत्री रहते हुए जितना बड़ा पति बकैती करता था, वह उससे भी 10 कदम आगे है। हर दम हिंदू गुंडा-हिंदू गुंडा कहती रहती है, जैसे किसी हिंदू गुंडे में उसे सांड दिख गया हो! उसी चैनल से निकली एक और बीबी अभी एक कांग्रेसी अखबार की संपादक है। पति उसका सरकारी विभाग से चैनल के मालिक को ठेका दिलाता था तो मालिक ने उसकी बीबी को एंकर बना रखा था। एक तो ऐसी बीबी इस चैनल से निकली कि बुड्ढे कांग्रेसी नेता को ही फंसा कर महारानी बन बैठी! यानी पूरा चैनल कोठा खोलकर बैठा है! ‘आओ, बीबी लाओ-माल बनाओ’, यही नारा वहां चलता है।

हां तो बकैत पांड़े के मित्रों ने बताया कि चैनल के कुछ पत्रकार उसके पास गये और कहा, पांड़ेजी सुना है अगले लोकसभा-2019 में कांग्रेस आपको, आपके भाई और आपकी बहन, तीनों को टिकट देने जा रही है? बकैत ने कहा, पगलाए हो क्या? एक परिवार से एक टिकट दे दे यही बहुत है! उसके साथी हंस पड़े! यानी तुक्का मारा था, तीर सही निशाने पर लगा कि बकैत का परिवार कांग्रेस से टिकट जुगाड़ में लगा है, इसलिए बकैत घाघरा उठा-उठा कर कांग्रेस के पक्ष में सरारा गा रहा है!

तो बकैत ने दुखड़ा रोया! ‘भाईयों और भौजाइयों!’

‘अबे! भौजाई तो तू है, हमारा मनारंजन तो तू करता है!’

‘आं..हां..हां!’ बकैत को अपनी भूमिका याद आयी!

भूमिका याद आते ही बकैत चिल्लाया, ‘भाईयों मुझे जान से मारने की धमकी दी जा रही है? सफेद और काली दाढ़ी के हिंदूवादी गुंडे देश के लोकतंत्र का अपहरण कर रहे हैं? संविधान खतरे में है?’

संविधान की आवाज आई..! ‘अबे! 2004 से 2014 तक मैं खतरे में थी, तब तो तू और तेरा चैनल खूब मलाई चाटने में लगे थे?प्रधानमंत्री रोबोट था और सरकार ‘पेटिकोट तंत्र’ चला रहा था! तब तो तू बड़े मजे कर रहा था! तू भी तो ‘पेटिकोट पत्रकार’ बना गली-खडंजे में अपनी नाम घुसेड़ कर गरीब के पक्ष में होने का नाटक कर 2जी से लेकर कोलगेट तक को दबाए हुए था! आज जब पहली बार लग रहा है कि कोई सरकार सचमुच मुझे सम्मान देते हुए मेरे अनुरूप ही चल रही है तो तू सरारा.. गा रहा है?’

‘चुप रहो!’ बकैत ने शहिदाना अंदाज में न्यूज पढ़ते हुए मन ही मन संविधान से कहा! ‘मैं तय करुंगा कि तुम खतरे में हो कि नहीं?’

‘अच्छा, जैसे तेरा मालिक और मेरे मालिक की झमझम, पहले तय करती थी कि प्रधानमंत्री से पहले मंत्री कौन बनेगा? ऐसे ही तय करेगा न?’

संविधान के इतना कहते ही, बकैत ने कान से ईयर फोन निकाल दिया और बड़बड़ाया, ‘भला अभिव्यक्ति के नाम पर हमें घाघरा उठाकर नाचने भी नहीं देता यह संविधान! अब आईना दिखाने वालों को ‘गोदी’ कह गरिया देता हूं, लेकिन यदि इस संविधान को गरियाया तो लोग इसे बाबा साहब के अपमान से जोड़ देंगे! फिर बिहार में 2019 के लिए मेरे या मेरे परिवार की मेरी रही-सही उम्मीद भी दम तोड़ देगी!’

बकैत ने संविधान को हाथ जोड़ा और चुप रहने का इशारा करते हुए कहा, ‘देखिए न! हाई-वे भले ही बन रहा हो, बिजली भले ही मिलने लगी हो, इससे क्या होता है अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता तो खतरे में है ही न?’

इतने में उसका प्रोड्यूसर हाथ में फोन लिए भागा-भागा आया, चैनल ने कमर्शियल दिखाया!

फोन के दूसरी ओर पप्पू का पीए था! पीए ने कहा, ‘पीडी’ यह क्या बकवास लगा रखी है?’

‘जी सर, बकवास?’

‘हां, यह अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता का नाटक जेएनयू तक ठीक था! अभी सारे विश्विद्यालय को हमने शांत रखा है! चुनाव से पूर्व वहां आग लगाएंगे! फिलहाल अपना ध्यान रोजगार, बैंक फ्रॉड और रेल पर लगाओ! रेल में चाय बेचने वाले उस ‘नीच आदमी’ पर हमला तेज करो!’

‘पप्पूजी बहुत खुश हैं! कह रहे हैं कि बकैत को किसी दिन बुलाओ, अपना प्यारा ‘पीडी’ है! गोदी में बैठाएंगे और अपने घर वाले ‘पीडी’ के साथ बैठाकर उस ‘पीडी’ को बिस्कुट खिलाएंगे! दो भाई एक ही प्लेट में खा कर कितने खुश होंगे, है न?’ पप्पू के पीए ने कहा।

‘जी, सर!’ बकैत दो ईंच का मुंह करके दांत निपोरा और फोन रख दिया!

बकैत फिर से प्राइम टाइम में प्रकट हुआ।

‘दोस्तों! रोजगार, बैंक फ्रॉड और रेल की समस्या बड़ी है, कल से उस पर सीरीज देखिए!’

लोगों ने देखा, अब लगातार बैंक फ्रॉड, रोजगार और रेल पर उस टीवी के प्राइम टाइम पर उल्टी करने का सिलसिला शुरू हो चुका है!

पप्पू खुश है कि उसका ‘पीडी’ अपना काम करने लगा है! अपने भाई पीडी के साथ मिलकर बिस्कुट खाने और उसकी गोदी में बैठने का असर बकैत पांड़े पर नशे की तरह हावी हो चला है!

चैनल का मालिक खुश है कि यदि उसका चैनल चाय वाले की सरकार की जांच के कारण बंद भी हो गया तो पप्पू की पार्टी प्रेस की स्वतंत्रता के नाम पर देश भर में आग लगाने में उसे पीछे से सपोर्ट देगी! दूसरा सपोर्ट पाकिस्तान से मिल जाएगा! पाकिस्तान के पे-रोल पर यहां पलने वाले ‘लुटियन श्वान’ भारत में हिटलरशाही की घोषणा कर भौं..भौं से पूरा आसमान सिर पर उठा लेंगे!

बकैत खुश है कि बिहार में उसे, उसके बलात्कारी भाई या भ्रष्टाचारी बहन, किसी को तो वंशवादी पार्टी से 2019 में लोकसभा का टिकट मिल ही जाएगा!

चैनल में खुशी का माहौल है! अचानक से मालिक चिल्लाया!

‘अरे! यदि खुशी जनता को दिख गयी तो फिर हम शहीद नहीं हो पाएंगे!’

‘नहीं, मालिक!’ बकैत ने कहा और तुरंत ही सोशल मीडिया खोलकर लिखने के लिए बैठ गया! आखिर सोशल मीडिया पर उसके हजारों नहीं, लाखों फॉलोअर हैं! ज्यादातर दाढ़ी, क्रॉस और जात वाले फॉलोअर हैं। क्रॉस वाले कन्वर्जन के लिए विदेश से आने वाली फंडिंग बंद होने के कारण दुखी हैं, जात वाले जात के नाम पर चलने वाली गुंडागर्दी और वसूली के बंद होने से परेशान हैं, तो दाढ़ी वाले इस कारण दुखी हैं कि उसने उनके बाबा-चाचा-बाप के हलाला के कारोबार को चाय वाले की सरकार ने बंद करा दिया है!

‘मेरी जान खतरे में है?’ बकैत ने इस पर लंबा पोस्ट लिख मारा!

फिर से दाढ़ी वालों, क्रॉस वालों, जात वाले, चोरों, भ्रष्टाचारियों, कालाबजारियों ने शोर मचाया…‘एक पत्रकार की जान खतरे में है’, ‘पत्रकारिता खतरे में है’, ‘लोकतंत्र खतरे में है’, ‘संविधान खतरे में है’?

शाम को इंडिया इंटरनेशनल में फैब इंडिया का सस्ता दिखने वाला महंगा कुर्ता पहने हाथ में जॉनी वाकर का पैग लिए बकैत बैठा था! हिंदुस्तान के लिए खाने वाला पत्रकार पोर्क का टुकड़ा चबाते हुए बकैत के पास आया, और बोला…

‘यार उस चाय वाले की शक्ल देखते ही चिढ़ होती है! कितना सुहाना समय था, जब मुझे सिर्फ देश के लिए खाना खाने पर पद्श्री मिला था! जिस दिन पद्मश्री मिला, उस शाम मालकिन के घर गये थे, पैर पकड़ कर थैंक्यू कहने! उस रात उनकी बेटी ने अपने हाथ से बीफ सर्व किया था, आहा…! सब मजा इस चाय वाले ने आकर किरकिरा कर दिया! जब तक इसे मिटा नहीं देंगे, दम नहीं लेंगे!’

दोनों ने गिलास से गिलास टकराया और मुस्कुराते हुए कहा, ‘चीयर्स!’

तब तक वहां ‘माइनो मीडिया’ गिरोह के और भी सदस्य जमा हो चुके थे। सब एक साथ बोल पड़े, ‘यार, कहीं दलितों पर अत्याचार और मुसलमानों पर बलात्कार की न्यूज पैदा करो! चाय वाला अपना चार साल मना रहा है, रंग में भंग करते हैं!’


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Sandeep Deo
Sandeep Deo
Journalist with 18 yrs experience | Best selling author | Bloomsbury’s (Publisher of Harry Potter series) first Hindi writer | Written 7 books | Storyteller | Social Media Coach | Spiritual Counselor.