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कोरोना काल में सात्विक भोजन सबसे उत्तम स्वास्थ्य के लिये बेहद ज़रूरी, कहा स्वास्थ्य मंत्री डां हर्षवर्धन ने

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कोरोना काल में विश्व बहुत सी ऐसी पद्धतियों और परंपराओं की ओर रूख कर रहा है जो कि सदियों से कितने ही भारतीयों की जीवन शैली का हिस्सा रही हैं लेकिन कृत्रिम और बनावटी चीज़ों के पीछे भागने वाली इस फैशपरस्त दुनिया में उन्हे अभी तक उस प्रकार की मान्यता नहीं मिली जो कि मिलनी चाहिये थी.

भारत में अभिवादन के परंपरागत तरीके नमस्ते को अपनाने से लेकर रोग प्रतिरोधक क्षमता बढाने में योग का जो महत्व है, पूरा विश्व कोरोना काल में ये चीज़ें समझ रहा है और इन्हे अपना रहा है. और अब भारत के पारंपरिक सात्विक भोजन का महत्व भी लोगों की समझ में आने लगा है. और तो और, भारत सरकार भी इस के मह्त्व को रेखांकित कर रही है.

हाल ही में स्वास्थ्य मंत्री डां हर्षवर्धन ने कहा कि नियमित व्यायाम और सात्विक भोजन का सेवन, ये दोनों चीज़े ही अच्छे स्वास्थ्य के लिये बेहद ज़रूरी हैं. कोरोना के समय में लोग अपने खान पान का वैसे भी विशेष ध्यान रख रहे हैं. मांस मछली का अत्यधिक सेवन करने वाले लोग भी शाकाहारी भोजन की तरफ रूख कर रहे हैं. ऐसे में सात्विक भोजन की लोकप्रियता भी बहुत अधिक बढी है.

सात्विक भोजन यानि घर पर न के बराबर मिर्च मसाले से बना, बिना प्याज़ और लहसन के बना शुद्ध शाकाहारी भोजन, ऐसा भोजन जो पौष्टिक होने के साथ साथ पचाने में हल्का भी हो. मौसम अनुकूल फल, सब्ज़ियां, मेवे, देसी घी, दूध, दही, गुड़, शहद, घर पर बनी मिठाइयां, ये सभी चीज़ें सात्विक भोजन के अंतर्गत आती हैं. सात्विक भोजन में आयुर्वेद्क औषधियों का भी इस प्रकार से प्रयोग होता है कि भोजन का स्वाद और उसकी सेहत की दृष्टि से गुणवत्ता दोनों बनी रहें.

सात्विक भोजन कितने ही भारतीय परिवारों की जीवन शैली का हिस्सा रहा है, आज भी बहुत से परिवारों में सी प्रकार का कम मिर्च मसाले का, बिना प्याज़ लहसन का भोजन पकाया जाता है. हिंदू तीज त्योहारों के अवसर पर मालपुये, घेवर, हलवा-पूड़ी, गुड़ और तिल से बनी पारंपरिक मिठाइयां, चोये की खीर आदि पकवान बनाये जाते हैं, वे सब भी सात्विक आहार के अंतर्गत आते हैं.

तो घर के खाने में तो सात्विक आहार का चलन पहले से ही रहा है. लेकिन नई बात यह है कि पिछले कुछ वर्षों में बड़े बड़े होटल, रेस्तरां और कैफे भी अपने मेन्यू में सात्विक भोजन को प्रमोट करने लगे हैं. भारत के महानगरों में कितने ही आर्गेनिक कैफे खुल गये हैं जिनमे परंपरागत सात्विक भोजन को एकदम नये तरीके से बनाया और प्रस्तुत किया जाता है, इसे लेकर फ्यूज़न डिशेज़ बनाई जाती हैं.

भारत के बड़े बड़े पंच सितारा होटलों में तो नवरात्रि आदि के अवसर पर सात्विक फूड फेस्टिवल्स भी होते हैं. और अब कोरोना काल में तो जो भी रेस्तरां और कैफे दोबारा खुल रहे हैं, वे लोगों को अपनी तरफ आकर्षित करने के लिये सात्विक मेन्यू का सहारा ले रहे हैं.

वैसे भी लोग इस समय इतने डरे हुए हैं कि प्रथम तो वे भोजन के लिये बाहर ही नहीं जाना चाह्ते और यदि जाते भी हैं तो ऐसा खाना तो बिल्कुल नहीं खाना चाहते जिसका उनके स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर पड़े. इसीलिये चिकन टिक्का, बटर चिकेन सर्व करने वाले रेस्तरां भी अब अपने खाने के मेन्यू में शुद्ध शाकाहारी भोजन ज़रूर जोड़्ने लग गये हैं.

दराअसल कोरोना वायरस ने हेल्थ और वेलनेस को लोगों की जीवन रेखा के साथ अभिन्न रूप से जोड दिया है. इससे पहले इम्यूनिटी या रोग प्रतिरोधन क्षमता भला किस चिड़िया का नाम है, अधिकतर लोगों ने कभी सोचा ही नहीं होगा. लेकिन अब तो सारा बाज़ार ही इम्यूनिटी के ईर्द गिर्द  घूम रहा है. तो ऐसे में लाज़िमी ही है कि हल्के, पौष्टिक और स्वादिष्ट सात्विक भोजन की तरफ हांस्प्टैल्टी इंडस्ट्री के लोगों का भी ध्यान जा रहा है.

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Rati Agnihotri

रति अंग्रेज़ी और हिंदी दोनों में कवितायें लिखती हैं. इनका अंग्रेज़ी का पहला कविता संग्रह ‘ द सनसेट सोनाटा’साहित्य अकादमी से प्रकाशित हुआ है. रति की हिंदी कवितायें पाखी, संवदिया, परिकथा, रेतपथ, युद्धरत आम आदमी, हमारा भारत आदि साहित्यिक पत्रिकाओं में प्रकाशित हो चुकी हैं. रति दिल्ली में ‘ मूनवीवर्स – चांद के जुलाहे’ के नाम से एक पोएट्री ग्रुप चलाती हैं जहां कविता को संगीत, चित्रकला आदि विभिन्न विधाओं से जोड़ा जाता है और कविता से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर विचार भी होता है. रति चीन के शिनुआ न्यूज़ एजेंसी के नई दिल्ली ब्यूरो में बतौर टी वी न्यूज़ रिपोर्टर कार्य कर चुकी हैं. रति आजकल स्वतंत्र पत्रकार के रूप में कार्यरत हैं. रति ने दिल्ली विश्वविद्यालय के मिरांडा हाउस कांलेज से अंग्रेज़ी विशेष में बी ए आनर्स किया है और इंग्लैंड के लीड्स विश्वविद्यालय से अंतराष्ट्रीय पत्रकारिता में एम ए किया है.

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