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अनुसूचित जाति आयोग ने केंद्र से पूछा अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी का फंड आखिर क्यों नहीं हो रहा बंद?

अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में आरक्षण को लेकर एक बार फिर विवाद गरमाने वाला है। क्योंकि राष्ट्रीय अनुसूचित आयोग ने केद्रीय मानव संसाधन मंत्रालय को पत्र लिखकर पूछा है कि आखिर अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी को दिया जा रहा फंड क्यों नहीं रोका जा रहा है? आयोग का कहना है जब देश के अन्य केंद्रीय विश्वविद्यालय की तरह फंड लेने के बावजूद अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एससी और एसटी वर्ग के छात्र को दाखिले में आरक्षण नहीं दे रही है। तो फिर उसे फंड किस बात का जारी किया जा रहा है? वैसे भी अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी के अल्फसंख्यक के दर्जे का मामला कोर्ट में लंबित है।

मुख्य बिंदु

* अनुसूचित जाति पैनल ने कहा कि अलीगढ़ मुस्लिम यूनिवर्सिटी एससी/एसटी को क्यों नहीं दे रहा आरक्षण

* मोदी सरकार सुप्रीम कोर्ट में हफफनामा देकर यूनिवर्सिटी का अल्पसंख्यक दर्जा का वापस ले चुकी है

अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी में अनुसूचित जाति और जनजातियों के छात्रों को दाखिला नहीं देने का मामला एक बार फिर गरमाने जा रहा है। पहले यह मामला तब गरमाया था जब उत्तर प्रदेश अनुसूचित जाति और जनजाति के पैनल ने अलीगढ़ मुसलिम यूनिवर्सिटी को नोटिस जारी किया था। नोटिस में पूछा था कि केंद्र सरकार से केंद्रीय विश्वविद्यालय के रूप में फंड लेने के बाद भी आरक्षण का कोटा क्यों नहीं लागू किया जा रहा है? यूपी अनुसूचीत जाति पैनल के नोटिस के बाद केंद्र सरकार ने 30 जून 2016 को सुप्रीम कोर्ट में नया हलफनामा दायर कर एएमयू को अल्पसंख्यक दर्जा देने के समर्थन करने से अपना हाथ खींच लिया था।

अब जब राष्ट्रीय अनुसूचित जाति और जनजाति आयोग ने पत्र लिखकर मानव संसाधन मंत्रालय से पूछा है कि जब एएमयू देश के अन्य केंद्रीय यूनिवर्सिटी की तरह आरक्षण नीति को लागू नही कर रही तो फिर उसे क्यों फंड जारी करना चाहिए? एससीएसटी आयोग के अध्यक्ष रामशंकर कठेरिया ने इस मामले में दो जुलाई को विश्वविद्यालय अनुदान आयोग तथा मानव संसाधन मंत्रालय के अधिकारियों से बैठक कर मंत्रालय को चिट्ठी लिखी थी।

कथेरिया के साथ हुई बैठक में सरकार के प्रतिनिधि ने एएमयू के अल्पसंख्य दर्जे को लेकर मंत्रालय के मंतव्य से अवगत करा दिया था। मालूम हो कि केंद्र सरकार ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट में हलफनामा दायर कर अपना पक्ष रख चुकी है कि एएमयू कभी अल्पसंख्यक संस्था रही ही नहीं क्योंकि वह संसद एक्ट के तहत स्थापित हुई थी जिसका फंड केंद्र सरकार को देना था।

आगरा के भाजपा सांसद रामशंकर कठेरिया ने अपने एक साक्षात्कार में स्पष्ट कहा है कि राष्ट्रीय अनुसूचित जाति/ जनजाति आयोग एएमयू को आरक्षण नीति लागू करने का आदेश देगा यदि वह अगस्त तक अल्पसंख्यक दर्जा सबंधी अपने दस्तावेज नहीं जमा कर देता। उन्होंने कहा कि यह कोई पाकिस्तान नहीं है, एएमयू को भी नियम के अनुरूप चलना होगा।

URL: sc st commission asked to modi govt why central funds were being granted to amu

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