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तसलीमा नसरीन ने हिंदू देवी देवताओं पर झूठ का झुनझुना क्या पकड़ाया शेखर गुप्ता के प्रिंट ने उसे बजाना शुरू कर दिया!

‘Gods are male, they hate women: Why fighting for entry to temples is futile’ शीर्षक नाम से द प्रिंट में तसलीमा नसरीन का एक आलेख प्रकाशित किया गया है। अंग्रेजी में लिखे इस शीर्षक का मतलब है “हिंदुओं के सारे भगवान पुरुष हैं और वे महिलाओं से घृणा करते हैं ऐसे में मंदिर में प्रवेश को लेकर झगड़ना निरर्थक है”। शीर्षक से ही स्पष्ट है कि उनके इस आलेख का मकसद हिंदूओं के देवी देवताओं का अपमान करना है। तसलीमा ने अपने आलेख में जो दृष्टांत दिया है उससे साफ है कि उन्हें हमारे हिंदू देवी देवताओं के बारे में थोड़ी भी जानकारी नहीं है। उन्होंने अपने आलेख में उन मंदिरों के बारे में झूठ फैलाया जहां महिलाओं का जाना मना है। जिसे शखर गुप्ता के द प्रिंट ने फैलाने मैं मदद की!

शेखर गुप्ता के हाल के दिनों की पत्रकारिता ने उनके बिगत की पत्रकारिता पर सवालिया निशान लगा दिया है। क्योंकि वे अपनी वेबसाइट प्रिंट में जिस प्रकार एक खास मंशा के तहत बगैर कोई तथ्य के अनाप शनाप लेख प्रकाशित कर रहे हैं उससे संदेह पैदा होता है कि उन्होंने बिगत में कैसी पत्रकारिता की होगी? 28 अक्टूबर को उन्होंने अपनी वेबसाइट द प्रिंट में तसलीमा नसरीन का एक आलेख प्रकाशित किया है। वही तसलीमा नसरीन जो बांग्लादेश से भागकर भारत में निर्वासित जिंदगी बसर कर रही है। उन्होंने सबरीमाला प्रकराण पर लिखे अपने आलेख में हिंदू देवी देवताओं को निशाना बनाया। लेकिन सबसे खास बात है कि उसका यह आलेख झूठ का पुलिंदा भर है। ताज्जुब उसके लिखने से नहीं है बल्कि ताज्जुब तो शेखर गुप्ता द्वारा उसे प्रकाशित करने से है।

मुख्य बिंदु

* बगैर कोई जानकारी के भारत में निर्वासित जिंदगी बसर कर रही तसलीमा नसरीन ने लिखा झूठ का पुलिंदा

* एक साजिश के तहत द प्रिंट के संपादक शेखर गुप्ता हिंदू देवी- देवताओं को अपमानित करने का चला रखा है अभियान

इस प्रकार के लेख ने यह तो साबित कर ही दिया है कि इस आलेख की लेखिका से लेकर उसे प्रकाशित करने वाले संपादक को न तो भारतीय संस्कृति और न ही सनातन धर्म का अ.ब.स पता है। लेकिन इतना भर समझ लेने से काम नहीं चलेगा। क्योंकि इसके पीछे इस प्रकार की वेबसाइट चलाने वालों की मंशा और उद्देश्य के बारे में समझना होगा। शेखर गुप्ता जैसे बड़े पत्रकार झूठ प्रचारित कर न सिर्फ पत्रकारिता की गरिमा गिराई है बल्कि देश को बदनाम करते रहे हैं।

एक संपादक के नाते उन्हें तसलीमा नसरीन द्वारा लिखे आलेख में दिए तथ्यों को जांच लेना चाहिए था। इतने बड़े पत्रकारों के बारे में ऐसा कहना अनुचित होगा कि उन्हें इसकी जानकारी नहीं होगी। तब सवाल उठता है कि तसलीमा नसरीन के इतने बड़े झूठ को जाने क्यों दिया गया? इसे हिंदू देवी-देवताओं को अपमान करने की सोची समझी साजिश नहीं कहेंगे तो और क्या कहेंगे? क्या शेखर गुप्ता नहीं जानते कि दुर्गा को आदि शक्ति, सीता को जगत जननी, काली को शत्रु संघारिणी, लक्ष्मी को धनदात्री, सरस्वती को विद्यादायिनी आदि आदि संज्ञा दी गई है। तो फिर उन्होंने तसलीमा नसरीन का वह आलेख कैसे प्रकाशित कर दिया जिसका शीर्षक ही विवादास्पद हो?

उन्होंने अपने आलेख में कहा है कि भारत में सबरीमाला ही एक ऐसा मंदिर नहीं है जहां महिलाओं का जाना मना है, ऐसे कई मंदिर हैं जहां महिलाओं का प्रवेश वर्जित है। इसके तहत उन्होंने जिन मंदिरों का नाम लिया है उसमें छत्तीसगढ़ का मवाली माता मंदिर, हरियाणा का कार्तिकेय मंदिर, असम का कामाख्या मंदिर, झारखंड का मंगल चांदी मंदिर, राजस्थान का रानकपुर जैन मंदिर तथा केरल का पद्मनावस्वामी तथा श्रीकृष्ण मंदिर शामिल है। जिन मंदिरों का नाम लिया है इससे साफ है कि उन्हें न तो उन मंदिरों का इतिहास पता है न ही माहात्म्य।

तसलीमा नसरीन ने जिस कामाख्या मंदिर का नाम लिया है वह सरासर गलत है। उन्हें पता होना चाहिए कि वह मंदिर देश के सात शक्तिपीठों में से एक है और उस मंदिर में किसी के प्रवेश पर रोक नहीं है। इस मंदिर का महात्म्य यह है कि इस मंदिर में विराजमान देवी साल में एक रजस्वला से गुजरती हैं। इस दौरान मंदिर को ही बंद कर दिया जाता है, किसी के प्रवेश पर पाबंदी नहीं होती। इसी अवसर पर साल में एक बार यहां अंबूवाची मेला लगता है जहां देश भर से लोग आते हैं।

शेखर गुप्ता जैसों पर सोची समझी रणनीति के तहत देश के हिंदू देवी-देवताओं पर आघात करने की साजिश रचने का आरोप लगते रहे हैं। वह चाहे कठुआ रेप कांड हो या सबरीमाला मंदिर प्रकरण। ये हमेशा ही हिंदू और उनके देवी-देवताओं को नीचा दिखाने का ही प्रयास किया है। तभी तो कहा है कि किसी ने झूठ का झुनझुना पकड़ाया नहीं कि शेखर गुप्ता उसे बजाना शुरू कर देते हैं।

URL: Shekhar Gupta’s The Print Spreading Taslima’s Lies on Hindu god Goddess

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