एनडीटीवी ने अवैध तरीके से ली थी विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड से मंजूरी? फिर क्यों नहीं हो रही है एनडीटीवी पर कार्रवाई?

जब से एयरएशिया के खिलाफ कार्रवाई हुई है और यह सामने आया है कि जिस प्रकार एयरएशिया ने अवैध तरीके से विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) से मंजूरी हांसिल की थी उसी अवैध तरीके से एनडीटीवी पर भी एफआईपीबी की मंजूरी हांसिल करने का आरोप है। यहां तक कि एनडीटीवी के कार्यकारी निदेशक ने तो खुद स्वीकार किया है कि इस मामले में कंपनी से चूक हुई है। ऐसे में यह सवाल उठना लाजिम है कि आखिर एनडीटीवी पर कार्रवाई क्यों नहीं की जा रही है? और दूसरा सवाल यह कि आईबी और वित्त मंत्रालय के साथ प्रवर्तन निदेशालय और सीबीआई क्यों नहीं कार्रवाई कर रहे हैं?

मुख्य बिंदु

* अपनी फर्जी कंपनी के लिए फंड जुटाने के दौरान एनडीटीवी ने अवैध तरीके से हांसिल की थी एफआईपीबी मंजूरी
* सूचना प्रसारण मंत्रालय, वित्त मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय तथा सीबीआई एनडीटीव के खिलाफ क्यों नहीं कर रही कार्रवाई?


एनडीटीवी ने अपनी भारतीय फर्जी कंपनी में निवेश करने के लिए एक विदेशी फर्जी कंपनी के नाम पर एफआईपीबी मंजूरी ली थी?

एयरएशिया के मामले में सीबीआई द्वारा दर्ज एफआईआर से यह खुलासा हुआ है कि उसने अवैध तरीके से एफआईपीबी से मंजूरी हासिल की थी। इसके बाद से ही यह भी सामने आया है कि एनडीटीवी ने भी अपनी फर्जी कंपनियों के माध्यम से एफआईपीबी मंजूरी हासिल की थी। एफआईपीबी मंजूरी हासिल करने का तरीका दोनों का एक ही जैसा था।

एनडीटीवी ने अपनी सहायक कंपनियों में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश लाने के लिए 5 मार्च 2007 को विदेशी निवेश संवर्धन बोर्ड (एफआईपीबी) की मंजूरी हासिल की थी। NDTV अपनी जिन सहायक कंपनियों में विदेशी निवेश के लिए प्रयासरत थी उसमें एनडीटीवी इमेजिन, एनडीटीवी कनवर्जेंस, एनडीटीवी लैब्स तथा एनडीटीवी लाइफस्टाइल शामिल थी। ये सारे चैनल गैर-न्यूज वाले थे। इनमें से कोई भी कंपनी प्रत्यक्ष पूंजी निवेश के लिए अधिनियमित नहीं थी। एनडीटीवी को एफआईपीबी की जो मंजूरी मिली थी वह एनडीटीवी नेटवर्क पीएलसी, लंदन को मिली थी, जो एनडीटीवी की एक ‘खोखा’ फर्जी कंपनी थी। कितनी आश्यर्य की बात है कि एनडीटीवी ने अपनी भारतीय फर्जी कंपनी में निवेश करने के लिए एक विदेशी फर्जी कंपनी के नाम पर एफआईपीबी मंजूरी ली थी?

एनडीटीवी ने कभी भी कानूनों की परवाह नहीं की?

आरोप है कि एनडीटीवी ने एफआईपीबी मंजूरी के लिए जिन नियमों का पालन किया जाना चाहिए उसका उल्लंघन किया है। एफआईपीबी मंजूरी के लिए निर्धारित नियम के मुताबिक एनडीटीवी नेटवर्क्स पीएलसी लंदन को आईपीओ (इनिसियल पब्लिक ऑफरिंग) के अलावा प्रत्यक्ष विदेशी निवेश का मूल्य और शेयर जारी करने की जरूरत थी। लेकिन एनडीटीवी ने कभी भी इन प्रावधानों की परवाह नहीं की, बल्किन उसका उल्लंघन करते हुए एफआपीबी की मंजूरी हांसिल कर ली।

आरोप है कि एनडीटीवी और उनके प्रमोटर ने अवैध तरीके से न्यूज बिजनेस के लिए धन हासिल किया, लेकिन उन्होंने टैक्स के रूप में सरकार को कभी एक ढेला तक नहीं चुकाया। इस मामले में सबसे अधिक फंसाने वाली बात यह है कि एनडीटीवी के कार्यकारी निदेशक ने अपनी गलती स्वीकार कर ली है। वैसे भी यह जगजाहिर है कि 2018 के मई महीने में आयकर विभाग ने इस मामले में एनडीटीवी के खिलाफ आपराधिक मुकदम दर्ज कर लिया है।

क्यों नहीं कर रही सरकार और सरकारी एजेंसियां कार्रवाई?

सबसे आश्यर्च की बात है कि सारे मामले आइने की तरह साफ होने के बावजूद इस मामले में न तो कोई संबंधित विभाग, न ही संबंधित जांच एजेंसियां और न ही केंद्र सरकार ही कोई पहल करने को तैयार है। यहीं सवाल उठता है कि अगर सब कुछ साफ है तो फिर वह चाहे सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय हो या वित्त मंत्रालय, प्रवर्तन निदेशालय हो या सीबीआई, आखिर एनडीटीवी के खिलाफ उचित कानूनी कार्रवाई क्यों नहीं कर पा रही है? जबकि यह स्पष्ट हो चुका है कि एनडीटीवी ने अवैध तरीके से एफआईपीबी की मंजूरी हासिल की थी, जिस कारण सरकार को आर्थिक नुकसान हुआ!

URL: Should CBI not investigate the question arising on FIPB scandal in NDTV?
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