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शोमैन की कुर्सी खाली पड़ी है, सुपर स्टार का सिंहासन भी खाली

विपुल रेगे। पुष्पा, द कश्मीर फाइल्स और आर आर आर की प्रचंड सफलता ने बॉलीवुड को भयभीत कर दिया है। बॉलीवुड का ये भय अब सतह पर दिखाई देने लगा है। बीते तीन वर्ष हिन्दी फिल्म उद्योग के लिए प्रलयंकारी सिद्ध हुए हैं। हर वर्ष बॉलीवुड की कमाई का आंकड़ा घटता जा रहा है। हिन्दी पट्टी में दक्षिण भारतीय फिल्मों के कलेक्शन बढ़ना और बॉलीवुड के कलेक्शन घटना संकेत दे रहा है कि अब बॉलीवुड को अपने भीतर बड़ा परिवर्तन करना होगा।

सन 2019 में हिन्दी फिल्म उद्योग विश्वभर में सात हज़ार करोड़ से अधिक कलेक्शन किया था। सन 2020 में कोरोना की चपेट में आने के बाद कलेक्शन बुरी तरह प्रभावित हुआ। इस वर्ष बॉलीवुड मात्र 1338 करोड़ का कलेक्शन ही कर सका था। सन 2021 में थियेटर पूरी तरह खुलने के बाद उम्मीद जागी थी कि बॉलीवुड अब बेहतर प्रदर्शन करेगा, किन्तु ऐसा नहीं हुआ।

2021 के वर्ष में बॉलीवुड मात्र 1501 करोड़ का ही कलेक्शन कर सका। नए साल के तीन माह बीत चुके हैं और बॉलीवुड एक सफल फिल्म के लिए तरस गया है। जनवरी से लेकर अब तक लगभग बारह फ़िल्में प्रदर्शित हो चुकी है लेकिन एक ने भी हिट का मुंह नहीं देखा। लूप-लपेटा, गहराइयाँ, बधाई दो, ए थर्सडे, गंगूबाई काठियावाड़ी, झुण्ड बुरी तरह फ्लॉप रही है।

2022 के पहले तीन माह बॉलीवुड की झोली खाली रही है। यदि द कश्मीर फाइल्स और आर आर आर (हिन्दी संस्करण) के कलेक्शन को निकाल दिया जाए तो बॉलीवुड को अपनी कमाई बताने में भी शर्म महसूस होगी। 2021 में तेलुगु फिल्म उद्योग ने 2308 करोड़ का कलेक्शन किया। वहीं तमिल फिल्म उद्योग का कलेक्शन इस वर्ष में 1621 करोड़ रहा।

स्पष्ट है कि ये दोनों फिल्म उद्योग लगातार हिन्दी फिल्म उद्योग से अच्छा व्यापार कर रहे हैं। हाल ही में सलमान खान ने कश्मीर फाइल्स देखी और अनुपम खेर को उत्तम अभिनय के लिए बधाई भी दी। ये इस बात का संकेत है कि बॉलीवुड अपनी चिर-परिचित अकड़ छोड़ रहा है। अपितु अब भी बॉलीवुड मानने को तैयार नहीं दिखता कि उसका ऐसा हाल दर्शकों द्वारा बहिष्कार के कारण हुआ है।

बॉलीवुड अब भी अपने स्टार सिस्टम की सफलता को लेकर आश्वस्त है। यशराज फिल्म्स की आगामी फिल्म पठान का धुंआधार प्रमोशन देखकर तो ऐसा ही लगता है। फिल्म को शाहरुख़ के स्टार स्टेटस से बेचने का प्रयास किया जा रहा है। अब तो बॉलीवुड को समझ आ जाना चाहिए कि दर्शक कंटेंट देखना चाहता है, स्टार नहीं। राजामौली की आर आर आर के कलेक्शन 600 करोड़ के पार जा चुके हैं।

द कश्मीर फाइल्स के कलेक्शन 295 करोड़ को छू चुके हैं। उसके मुकाबले बॉलीवुड के महान निर्देशक संजय लीला भंसाली की ‘गंगूबाई काठियावाड़ी’ अब जाकर अपनी लागत वसूल कर सकी है। हवा विपरीत दिशा में चलने लगी है लेकिन बॉलीवुड को अब भी इस बात का अहसास नहीं है। खान तिकड़ी को नकार दिया गया है। ऋत्विक और आयुष्यमान खुराना के पास अच्छे निर्देशक नहीं है।

बॉलीवुड के शोमैन की कुर्सी खाली पड़ी है। बॉलीवुड के सुपर स्टार का सिंहासन भी खाली पड़ा है। हिन्दी फिल्म उद्योग के ये कैसे दिन आए हैं। जितनी छोड़ दिया करते थे मयखाने में, उतनी अब पैमाने में भी मय्यसर नहीं है।

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Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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