कांग्रेस ने जिन लखवाड़ परियोजना को 42 सालों तक लटकाए रखा उसे मोदी सरकार ने पूरा करने का उठाया बीड़ा!

उत्तराखंड में यमुना पर लखवाड़ परियोजना बनाने की स्वीकृति 1976 में मिली थी। 42 साल गुजर जाने के बाद भी बेसिक कार्य के अलावा उस प्रोजेक्ट का कोई काम आगे नहीं बढ़ पाया। कहा गया है कि फंड के अभाव में यह परियोजना 42 सालों से लटकी हुई है। अब मोदी सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने का बीड़ा उठाया है। बताया गया है कि अगर यह परियोजना तैयार हो जाती है तो दिल्ली को करीब 25 सालों तक पानी की किल्लत से निजात मिल जाएगी। इसी संदर्भ में केंद्रीय जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी समेत छह राज्यों के मुख्यमंत्रियों ने लखवाड़ परियोजना को नई दिल्ली में हरी झंडी दे दी। चार हजार करोड़ रुपये की लागत से बनने वाली इस परियोजना से बिजली उत्पादन और जल संग्रहण होगा। इससे परियोजना के पूरा होते ही छह राज्यों में जलापूर्ति समेत पानी की किल्लत दूर हो जाएगी।

मुख्य बिंदु

* 1976 में स्वीकृत लखवाड़ परियोजना के लिए केंद्र और 6 राज्यों के बीच हुआ समझौता

* यमुना पर बनने वाले इस प्रोजेक्ट पर 4,000 करोड़ रुपये लागत आएगी, 90 प्रतिशत केंद्र करेगा खर्च

* इस परियोजना के पूरा होते ही दिल्ली समेत छह राज्यों में पानी की किल्लत दूर हो जाएगी

गौरतलब है कि योजना आयोग ने 1976 में ही इस परियोजना को मंजूरी दी थी। लेकिन करीब 42 सालों से यह योजना लंबित थी। बेसिक कार्य के अलावा कभी इसपर कोई काम आगे बढ़ा ही नहीं। अंत में मोदी सरकार ने इस परियोजना को पूरा करने की जिम्मेदारी उठाई है। ऐसी यह पहली योजना नहीं है जो सालों से लंबित है। कांग्रेस की आदत रही है योजनओं को शुरू करने की। कांग्रेस योजना शुरू कर के ही तो चुनाव जीतती आई है। कांग्रेस ने कभी शुरू की गई योजनाओं को पूरा करने पर ध्यान ही नहीं दिया। जबकि मोदी सरकार ने न केवल नई योजना शुरू कर उसे पूरा किया है बल्कि कांग्रेस द्वारा शुरू की गई योजनाओं को भी पूरा किया है। मोदी सरकार अभी तक लंबित योजनाओं को ही तो पूरा कर रही है।

जल संसाधन मंत्री नितिन गडकरी ने लखवाड़ परियोजना को हरी झंडी दिखाई। इस प्रोजेक्ट को पूरा करने के लिए छह राज्यों के मुख्यमंत्री ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए। बिजली, जलापूर्ति समेत जल संकट की चुनौती को ये परियोजना दूर करेगी। लखवाड़ जल विद्युत परियोजना पर लगभग 4,000 करोड़ रुपये खर्च का अनुमान है। इसका 90 प्रतिशत खर्च जहां केंद्र सरकार वहन करेगी वहीं शेष खर्च बाकी राज्य सरकारें वहन करेंगी। इस प्रोजेक्ट के पूरा होने के बाद जहां 300 मेगावाट बिजली का उत्पादन होगा वहीं 33,780 हेक्टेयर जमीन की सिंचाई भी संभव हो पाएगी।

इस परियोजना से 330 मिलियन क्यूबिक लीटर जल का संग्रहण हो पाएगा। इसमें 78 मिलियन क्यूबिक लीटर पानी पीने और घरेलू कार्यों में खर्च होगा। यहां से छोड़े जाने वाले पानी का छह राज्यों में बंटवारा होगा। इससे इन छह राज्यों में पानी की किल्लत दूर होगी। इस परियोजना से जहां उत्तराखंड को 300 मेगावाट बिजली का लाभ उत्तराखंड को मिलेगा वहीं दिल्ली को सीधा लाभ पानी का होगा। दिल्ली को पानी की किल्लत से निजात मिल जाएगी। मालूम हो कि अभी यमुना पर कुल 34 परियोजनाएं तैयार की जा रही हैं। इनमें से अकेले दिल्ली के लिए 12 परियोजनाएं चल रही हैं। अगर ये सारी परियोजनाएं पूरी हो जाएंगी तो यमुना में जहां पानी का विस्तार होगा वहीं यमुना साफ भी हो जाएगी।

URL: Six States sign MoU for Lakhwar dam in Uttarakhand

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