सोहराबुद्दीन का एनकाउंटर फेक नहीं था, आज अदालत में हुआ साबित! अमित शाह को लेकर कांग्रेसी पत्रकार फिर बेचैन!

सोहराबुद्दीन शेख-तुलसीराम प्रजापति मुठभेड़ मामले में 13 साल बाद सीबीआई की स्पेशल अदालत ने अपने फैसले में सभी 22 आरोपियों को बरी कर दिया है। इससे यह साफ हो गया है कि झूठ के पैर नहीं होते और सच को सबूत की जरूरत नहीं होती और अंत में सच की ही जीत होती है। आखिर में इस मामले के तहत भाजपा के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह समेते कई पुलिस अधिकारियों को फंसाने का सोनिया गांधी की मनमोहन सरकार सारा षड्यंत्र धाराशाई हो गया। सीबीआई की विशेष अदालत ने आज अपने फैसले से यह साबित कर दिया है कि सोहराबुद्दीन शेख तथा तुलसीराम प्रजापति को फेक एनकाउंटर में नहीं मारा गया था। यानि एनकाउंटर तो हुआ था लेकिन वह फेक नहीं था। कांग्रेसी पत्रकार (पक्षकार) फिर से फेक नरेशन के जरिए भाजपा अध्यक्ष अमित शाह को घेरने की फिराक में है।

अदालत ने अपने फैसले में बिल्कुल स्पष्ट रूप से कहा है कि इस मामले में जितने भी गवाह या साक्ष्य प्रस्तुत किए गए उनमें से कोई भी यह साबित नहीं कर पाया कि यह एक षड्यंत्र था या फिर हत्या थी। मालूम हो कि इस मामले में जितने लोगों को अभियुक्त बनाया गया था उनमें से अधिकांश राजस्थान और गुजरात के पुलिस अधिकारी थे।

मालूम हो कि साल 2005 के इस मामले में 22 लोग मुकदमे का सामना कर रहे थे, जिनमें ज्यादातर पुलिसकर्मी हैं। वर्ष 2007 में पूर्व डीआईजी बंजारा सहित कई वरिष्ठ पुलिस अधिकारियों को गिरफ्तार किया गया था। इस मामले पर विशेष निगाह रही है क्योंकि भाजपा अध्यक्ष अमित शाह आरोपियों में शामिल थे, हालांकि उन्हें 2014 में आरोप मुक्त कर दिया गया था। अमित शाह इन घटनाओं के वक्त गुजरात के गृह मंत्री थे।

सोहराबुद्दीन शेख के एनकाउंटर मामले में सीबीआई विशेष अदालत के फैसले आते ही कांग्रेस और उसके इकोसिस्टम के पत्रकारों को मिर्ची लग गई है। वह चाहे कांग्रेस हो या फिर उसके इको सिस्टम का हिस्सा रहे पत्रकार राजदीप सरदेसाई हो, आरती टिक्कू सिंह हो, कारवां हो या दवायर का सिद्धार्थ वरदराजन हो या सागरिका घोष, निखिल बागले हो या उमर खालिद, हर्ष मंदर हो या अभिषेक मनु सिंघवी सभी ने एक सुर में सीबीआई विशेष अदालत के फैसले पर सवाल खड़ा करना शुरू कर दिया।

ये सभी लोग एक सुर में एक ही तंज कस रहे हैं कि सोहराबुद्दीन शेख को किसी ने नहीं मारा यानि ‘No one kill sohrabuddin shaikh’। लेकिन इन्हें असल में कहना चाहिए था कि ‘नो वन डू फेक एनकाउंटर टू सोहराबुद्दीन’ यानी किसी ने फेक एनकाउंटर में सोबराबुद्दीन ने नहीं मारा। लेकिन ‘नो वन किल जसिका’ के तर्ज पर ये कांग्रेसी पक्षकार फेक नरेशन को स्थापित करने की कोशिश में जुट चुके हैं।

सीबीआई विशेष अदालत के इतने स्पष्ट आदेश बावजूद कांग्रेस के यूको सिस्टम का हिस्सा रहे पत्रकार और बुद्धिजीवी फेक नरेशन स्थापित करने में जुटे हैं।

प्वाइंट वाइज समझिए

सोहराबुद्दीन मामले में सभी बरी

* सोहराबुद्दीन शेख एनकाउंटर मामले में सीबीआई विशेष कोर्ट ने सुनाया फैसला

* इस मामले में सीबीआई विशेष अदालत ने सभी आरोपियों को किया बरी

* कोई सबूत और गवाह को सीबीआई स्पेशल जज ने संतोषजनक नहीं माना

* कोई सबूत या गवाह यह साबित नहीं कर पाए कि साजिशन हत्या की गई थी

* सीबीआई की विशेष अदालत ने परिस्थितिजन्य साक्ष्य को भी पर्याप्त नहीं माना

* सीबीआई की विशेष अदालत के फैसले पर कांग्रेस ने खड़ा किया सवाल

* कांग्रेस के यूको सिस्टम के हिस्सा बने पत्रकारों ने फेक नरेशन बनाना शुरू किया

URL : Sohrabuddin’s encounter was not fake, proved to be in court today!

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