एक ऐसा कुत्ता जिसे अपनी मालकिन से पहले पता चल गया कि उन्हें ब्रेस्ट कैंसर होने वाला है! कैसे?

2008 में यू.के. में रहने वाली मौरीन जो 50 साल की हैं। जिन्होंने मैक्स नाम का एक कुत्ता पाला जो बहुत ही खुशमिज़ाज़ था। धीरे-धीरे वह कुछ उदास रहने लगा। जब भी मौरीन उसे गोद में लेती वो कुछ उदास हो जाता ऐसा वो हमेशा करता जिसका मौरीन को कोई कारण समझ नहीं आ रहा था। कुछ वक़्त बाद जब मौरीन अपने रूटीन चेकअप के लिए हॉस्पिटल गयी तो उन्हें ब्रेस्ट कैंसर का पता चला! जो काफी छोटे स्तर पर था और उन्होंने इलाज कराना शरू कर दिया। जल्द ही वो ठीक होने लगी। इस पूरे प्रकरण में उनका 9 महीने का कुत्ता मैक्स अब वापस से अपनी मालकिन के लिए पहले की तरह खुश रहने लगा। रिसर्च से पता चला कि मैक्स का बदला व्यवहार मोरिन के कैंसर कि वजह से ही था। उसने अपने तीव्र घ्राण शक्ति से पहले ही पता लगा लिया था कि मौरीन को कैंसर हैं।

पालतू कुत्ता डिप्रेशन दूर करने में दवाईयों से ज़्यादा मददगार

पालतू कुत्तों का बात-बात पर खुश होना भले ही कुछ लोगो को चापलूसी लगे मगर सच तो ये है इसका दिल इंसानी दिल से ज़्यादा साफ़ और वफादार होता है और इनके पास अपने मालिक के लिए प्यार बे-शुमार होता है। रिसर्च से ये बात भी सामने आयी है कि मानव शरीर की भांति कुत्तों में भी अपने मालिक या अपने घर के इंसानो को देख कर हार्मोन स्रावित होता है, जिससे वो इंसानो को देख कर बहुत ख़ुशी का अनुभव करते हैं और वो हर बात मानते हैं जो हमें अच्छी लगती हैं! साइंस की रिसर्च के अनुसार यदि आप घर पर कुत्ता पालते हैं तो डिप्रेशन दूर करने में दवाईयों से ज़्यादा मददगार होता है।

बिना शर्त प्रेम और उनकी छठी इन्द्रिय की उपयोगिता

क्या आप जानते हैं कि कुत्तों से हमारा जीवन सदियों से दोस्ती के बंधन से जुड़ा है। मूल रूप से भेड़िये की प्रजाति से विकसित कुत्ते हमेशा से हर भौगोलिक परिस्थिति में हमारे साथ रहे हैं। कभी वो हमारे लिए शिकारी का काम करते हैं तो कभी हमारा सहयोगी बन सेना में खोज का, खेलों में मनोरंजन का और चिकित्सा में थेरपी डॉग्स का काम करते हैं। सेना में भर्ती कुत्ते बकायदा ट्रेनिंग सेशन से गुज़रते हैं और कठिन से कठिन संकरे रास्तों में बम ढूंढ़ने जैसे जटिल कार्य को अंजाम देते हैं और कई बार इसमें घायल भी हो जाते है! फिर भी वफादारी नहीं छोड़ते। कुत्ते हम इंसानो से निस्वार्थ भाव से इतना प्रेम क्यों करते हैं? बहुत से लोग ये कहते हैं कि उनको हम इंसानो से खाना मिलता है, मगर ये बात पूरी तरह सही नहीं है। कुत्तों के स्वामिभक्त होने का मात्र क्या यह कारण है, नहीं बिना शर्त प्रेम और उनकी छठी इन्द्रिय की उपयोगिता के पीछे कुछ और भी कारण हैं।

उनकी और हमारी शारीरिक संरचना में एक चीज समान होती है वो है ऑक्सीटोसिन का स्राव। ऑक्सीटोसिन एक हार्मोन हैं जिसे स्राव से हम ख़ुशी का अनुभव करते हैं। जब हम किसी अपने प्रिय, विशेष रूप से छोटे बच्चे को देखते हैं, उसे छूते हैं या प्यार से खेलते हैं तो हमारे शरीर में ऑक्सीटोसिन की मात्रा बढ़ जाती है जो हमें ख़ुशी का अनुभव कराती है! ऐसा ही हमारे साथ तब भी होता है जब हम अपने पालतू डॉग को दुलार करते हैं। आम तौर पर एक पालतू कुत्ते का दिमाग एक 4-5 साल के बच्चे के बराबर ही रहता है इसलिए हम उसे भी एक बच्चे के रूप में महसूस करते हैं।

आपके स्पर्श और वाणी का उतार-चढ़ाव और आपका डॉगी

एक पालतू कुत्ते की औसत आयु लगभग 8 से 10 वर्ष होती है। ये आयु कुछ ज़्यादा या कम होना उनकी प्रजाति पर भी निर्भर करता है। जब हम कोई भी डॉग पालने के लिए अपने घर पर लाते हैं तो उसका व्यवहार बिल्कुल एक छोटे बच्चे जैसा ही होता! जैसे एक छोटा बच्चा आपकी बात को बिना समझे भी अपनी आखों की पुतलियों को बड़ा कर आश्चर्य व्यक्त करता हैं, वैसे ही आपका पालतू पप्पी भी! ऐसा इसलिए कि वो आपके स्पर्श और वाणी के उतार-चढ़ाव से आपके प्यार और गुस्से को महसूस करता है और उस पर अपनी प्रतिक्रिया देता है।

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