ऐसा देश मिटेगा निश्चित
कोई भी शासन – पद्धति हो , बिना धर्म के सब बेकार ;
कोई काम ठीक न होगा , इस कदर बढ़ेगा भ्रष्टाचार ।
चौकीदार सब चोर बनेंगे , राजा होगा पूरा डाकू ;
लफ्फाजी व जुमलेबाजी , नेता होगा पूरा फेंकू ।
धर्म – विरोधी रचेगा साजिश , सारे – मंदिर तुड़वायेगा ;
म्लेच्छों से डी एन ए मिलता , गजवायेहिंद करायेगा ।
भ्रष्टाचार का घुन ही ऐसा , सब-कुछ चट कर जाता है ;
हर-संस्थान की नींव खोखली , सुप्रीम-कोर्ट डर जाता है ।
न्यायालय में न्याय न होता , पीड़ित करता आत्महत्या ;
अतुल-सुभाष का प्रकरण ताजा , जोकि है न्यायिक-हत्या ।
ऐसी घटनायें रोज हो रहीं , पर बिका हुआ है प्रेस-मीडिया ;
अरबों-खरबों का विज्ञापन , सच्चाई की मिट चुकी है दुनिया ।
राज्य के तीनों-अंग गल रहे , भ्रष्टाचार का कोढ़ भयानक ;
सेना पूरी तरह है दुर्बल , अग्निवीर चल रहा है नाटक ।
जब राजा हो देश का दुश्मन , महाशत्रु हो धर्म का ;
ऐसा देश मिटेगा निश्चित , जहाॅं हो राज अधर्म का ।
महा – अधर्मी पूरा – शासन , परम – अधर्मी राजा है ;
अब तक कैसे बचा है भारत ? कृपासिंधु “राम-राजा” हैं ।
अब तक “राम” ने देश बचाया , जिनका मंदिर भ्रष्ट कर दिया ;
शास्त्र विरुद्ध की प्राण प्रतिष्ठा,अब्बासी-हिंदू ने भ्रष्ट कर दिया।
“राम” ही हैं हम सबके स्वामी,अब्बासी-हिंदू कितना बौना है ?
अब तक हिंदू ! इसे न समझा, बस इसी बात का रोना है ।
जागो हिंदू ! अब तो जागो , धर्म-सनातन में आ जाओ ;
धर्म बचेगा – देश बचेगा , बस अच्छी-सरकार बनाओ ।
हालांकि अब बहुत है दुष्कर , कोई चुनाव निष्पक्ष नहीं है ;
बेईमान है पूर्ण-रूप से , चुनाव-आयोग निष्पक्ष नहीं है ।
सरकारी कठपुतली है ये , उसकी धुन पर नाच रहा है ;
ईवीएम में हेरा-फेरी कर , सरकारों को जिता रहा है ।
अब तो “राम” बचायें भारत , प्रकट करें जनता में जनार्दन ;
और दूसरा-मार्ग नहीं है , हो अब्बासी-हिंदू नेता का मर्दन ।
पूरी तरह मान-मर्दन हो , पूरी-पोल खोल के रख दो ;
जिसको हृदय-सम्राट बनाया , पूरी तरह पद दलित कर दो ।
“राम-कृपा” से ऐसा होगा , हिंदू ! आओ “राम-शरण” में ;
“राम” का द्रोही अब नहीं बचेगा , सिद्धांत यही है कारण में ।
सिद्धांत कर्म का सदा अटल है , एक साथ दंडित करता है ;
जब पूरा घड़ा पाप का भरता, तब ही उसको फोड़ा करता है ।
