सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता पर सरकारों को दिखाया आईना

नई दिल्ली। सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को कहा है कि देश में समान नागरिक संहिता लागू करने केलिए अब तक कोई प्रयास नहीं किया गया। यह तब है जबकि शीर्ष अदालत ने ही दो मामलों में साफ तौर पर इसकी हिमायत की थी।


न्यायमूर्ति दीपक गुप्ता और न्यायमूर्ति अनिरूद्ध बोस ने एक मामले में फैसले में ये टिप्पणी की है कि भारतीय राज्यों में एकमात्र गोवा ही ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक संहिता सभी नागरिकों लागू होता है, कुछ सीमित अधिकारों को संरक्षण को छोड़कर।


पीठ ने कहा है कि संविधान के निर्माताओं ने राज्य के नीति निर्देशक तत्वों पर विचार करते हुए अनुच्छेद-४४ के जरिए यह आशा और उम्मीद जताई थी कि राज्य, सभी नागरिकों के लिए पूरे भारत वर्ष में समान नागरिक संहिता सुनिश्चित करें। लेकिन अब तक इस बारे में कोई कदम नहीं उठाया गया। हिन्दू कानून को तो वर्ष १९५६ में वजूद में लाया गया लेकिन देश के सभी नागरिकों पर समान नागरिक संहिता लागू करने के लिए कोई प्रयास नहीं किया गया।


पीठ ने यह भी कहा कि वर्ष १९८५ में मोहम्मद अहमद खान बनाम शाह बानो और वर्ष १९९५ में सरला मुदगल व अन्य बनाम भारत सरकार के मामले में सुप्रीम कोर्ट ने समान नागरिक संहिता की हिमायत की थी लेकिन जब अब तक इसे लेकर कोई प्रयास नहीं किया गया।


पीठ ने कहा कि गोवा ही एकमात्र ऐसा राज्य है जहां समान नागरिक संहिता सभी लोगों के लिए लागू है, चाहे वे किसी भी धर्म केहो, कुछ सीमित अधिकारों को संरक्षण को छोड़कर।


सुप्रीम कोर्ट ने अपने आदेश में इस बात का भी जिक्र किया है कि गोवा में शादी का पंजीकरण करने वाले मुस्लिम व्यक्ति बहुविवाह नहीं कर सकता। यहां तक कि इस्लाम के मानने वालों के लिए वहां पर ‘मौखिक तलाक’ का प्रावधान नहीं है।


शीर्ष अदालत ने ये टिप्पणी गोवा से बाहर रहने वाले गोवानिवासियों की संपत्तियों के उत्तराधिकार विवाद केएक मामले का निपटारा करते हुए की है।


सनद रहे कि समान नागरिक संहिता का मसला भाजपा के एजेंडे में है। एनडीए की सरकार ने इसके लिए प्रयास भी किया था। कानून मंत्रालय ने वर्ष २०१६ में इस बारे में विधि आयोग से राय भी मांगी थी। लेकिन एक सितंबर, २०१८ को विधि आयोग ने अपनी रिपोर्ट में कहा था कि अभी इसके लिए समय नहीं आया है। विधि आयोग ने कहा था कि फिलहाल इसकी जरूरत नहीं है। आयोग ने तो हिन्दू, मुस्लिम व ईसाई पर्सनल लॉ में संशोधन कर महिलाओं के साथ भेदभाव मिटाने की बात कही थी।

साभार: अमर उजाला ब्यूरो, राजीव सिन्हा

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