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जब महाराष्ट्र की शिंदे सरकार ने शिवाजी पर लिखी किताब को बैन कर अभिव्यक्ति का गला घोंट दिया था।

मोदी सरकार पर अभिव्यक्ति की आजादी खत्म करने और असहिष्णुता को बढ़ावा देने जैसे आरोप लगाने वाले सेक्युलर बुद्धिजीवियों और पत्रकारों को शर्म तक नहीं आती। शर्म आएगी कैसे, क्योंकि वास्तविक इतिहास से उनका कोई वास्ता होता नहीं। उन्हें यह भी याद नहीं होगा कि किस प्रकार तत्कालीन मुख्यमंत्री सुशील कुमार शिंदे के नेतृत्व वाली महाराष्ट्र सरकार ने जनवरी 2004 में वीर शिवाजी पर लिखी किताब “हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया” को प्रतिबंधित कर दिया था।

इतना ही नहीं किताब प्रकाशित करने वाले प्रकाशक और लेखक के खिलाफ भारतीय दंड संहिता के तहत आपराधिक मुकदमा दर्ज कराया था। गौर हो यह किताब किसी हिंदू ने नहीं बल्कि एक अंग्रेज लेखक जेम्स डब्ल्यू लेनी ने लिखी थी। क्या उस समय अभिव्यक्ति का गला नहीं घोंटा गया था? क्या मोदी सरकार या किसी भाजपा प्रशासित राज्यों में ऐसा उदाहरण मिलेगा? क्या तब किसी लेखक, पत्रकार या बुद्धिजीवी ने लेनी के पक्ष में आवाज उठाई थी?

उस समय किसी ने जेम्स लेनी के पक्ष में किसी ने आवाज नहीं उठाई थी। यह दर्द सोमवार को खुद जेम्स लेनी ने बयान किया है। उनकी 114 पृष्ठों वाली इस किताब की एक प्रति लॉस एजेंल्स टाइम्स के पास है। उन्होंने कहा कि चूंकि प्रकाशक ने जून 2003 में ही किताब के डिस्ट्रिब्यूशन का काम बंद कर दिया था। फिर भी किताब के पक्ष में कोई आगे नहीं आया। न ही किसी और ने दोबारा इस किताब की डिस्ट्रिब्यूशन शुरू कराने की मांग की।

किताब के लेखक जेम्स लिन का कहना है कि ठीक से डिस्ट्रिब्यूशन नहीं हो पाने के कारण किताब पाठकों तक पहुंची ही नहीं, किसी को पता नहीं कि किताब में क्या आपत्तिजनक बात लिखी गई है? सिर्फ अनुमान और अफवाह के आधार पर एक वर्ग को तुष्ट करने के लिए सरकार ने प्रतिबंध लगा दिया। जेम्स का कहना है कि कुछ लोग खुद के लिए पढ़ते हैं, भारत में अधिकांश लोग इस सोच के हैं कि अधिकांश विचार अविचारणीय होते हैं और फिर आप सोचते हैं तो अच्छा होगा कि आप उस पर चुप ही रहें। लेनी ने कहा कि किताब के अंतिम अंध्याय में “अनथिंकेबल थॉट” (अविचारणीय विचार) के जिक्र पर यह फसाद किया गया है। हमारी इस बात को लोगों ने शिवाजी के विमर्श बताकर इस प्रकार का बवंडर खड़ा कर दिया।

“हिंदू किंग इन इस्लामिक इंडिया” किताब के प्रकाशक ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी प्रेस ने शिंदे सरकार के दबाव में पहले ही उस किताब को वापस ले लिया था। इसके बावजदू मुसलमानों और तथाकथित सेक्युलरों को तुष्ट करने के लिए शिंदे सरकार ने किताब पर प्रतिबंध लगाने की घोषणा की। कांग्रेस की सहयोगी पार्टी एनसीपी के नेता तथा सरकार में गृह मंत्रालय संभाल रहे आर-आर पाटिल ने भी इस किताब के खिलाफ आग उगली थी।

सरकार ने किताब पर बैन लगाने के साथ ही उसके लेखक और प्रकाशक के खिलाफ आपराधिक केस दर्ज कराया। धर्मनिरपेक्षता के नाम पर एक संगठन के कुछ उन्मादी लोगों ने पुणे स्थित मधुर भंडारकर के संस्थान भंडारकर ओरिएंडल रिसर्च इंस्टीट्यूट में तोड़फोड़ की। उन्हें संदेह था कि जेम्स लेनी की लिखी किताब का पूरा स्टॉक यही जमा है। खास बात है कि सरकार ने इन उन्मादियों के खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की।

आज तथाकथित पत्रकार यह कहते नहीं थकते कि वे डर के साये में जी रहे हैं, वे भर दिन मोदी को गाली देने में गुजारते हैं, लेकिन कहते हैं कि वे डर में हैं। दरअसल वे खुद न डरे हैं न ही डरेंगे वे अपने इस झूठ से देश के लोगों को डरा रहे हैं ताकि अगले चुनाव में लोगों को मोदी के खिलाफ किया जा सके।

URL: Sushil Kumar Shinde’s Maharashtra government banned ‘Hindu King in Islamic India’ book on shivaji

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