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‘Swami Ramdev- Ek Sangharsh’ तड़के वाली दाल है ताकि यादवों के गौरवशाली इतिहास को भुलाया जा सके!

सदियाँ बीत जाती हैं नाम बुलन्द करने के लिए और असंख्य बलिदान होते हैं सिर्फ ‘नाम, नमक, निशान’ के लिए! लेकिन एक सफ़ेद झूठ, मृगतृष्णा और नालायकी ने इन सब पर कालिख पोत दी। सन्यासी का पहला धर्म है कि सत्य की स्थापना करे और असत्य का खण्डन, फिर ये सन्यास-धर्म से कैसे विमुख हो गया ? खुद को एक अवतार घोषित करने के लोभ में रामदेव ने यादव जैसी मर्द कौम की गरिमा को ही दाँव पर लगा दिया है!

हाल ही में रामदेव के जीवन पर एक टीवी सीरियल बना जिसमें वीर भूमि अहीरवाल और शूरवीर अहीरों को नीचा कर के दिखाया गया तथा अहीरवाल के सामाजिक ताने-बाने व भाईचारे में विष-बेल फ़ैलाने की कोशिश की गयी। यदि ये एक आम आदमी का कृत्य होता तो माफ़ी के काबिल हो सकता था लेकिन ये कार्य एक योगगुरु एवं सन्यासी का था।

18 फरवरी 2018 के दिन, इस षडयंत्र की सत्यता प्रमाणित करने के लिए अहीरवाल भाईचारे के हिमायती एवं समाजसेवियों का एक दल बाबा रामदेव की जन्मभूमि व् पैतृक गाँव ‘अली सैदपुर’ गया और वहां के लोगों से मिल कर सच्चाई जानने हेतु तफ्तीश की। इस दल में आर्य समाज के सन्यासी 88 वर्षीय स्वामी हरीश मुनि जी खवासपुर, प्रख्यात समाजसेवी राधेश्याम गोमला जी, फौजी रामफूल राव जी, बास पदम का नौजवान पियूष अहीर जी बुडीन शामिल थे। ये दल गाँव के मौजिज लोगों, सरपंच, उप-सरपंच, भूतपूर्व सरपंचो, फौजी सरदारों, बुजुर्गों, नौजवानों व मातृशक्ति, बाबा रामदेव के अग्रज देवदत्त, चाचा- ताऊ ,कुटुम्ब-कबीले/नाती/गौती आदि से गली-गली, घर-घर जा कर मिला और जो हैरतअंगेज सच्चाई सामने आई वो आप के समक्ष पेश है।

सबसे पहले गाँव का निरिक्षण किया और पाया की गाँव खुशहाल है। हाँ गाँव में खेती-लायक जल की जरुर कमी है। गाँव अहीरवाल क्षेत्र यानी अहीर बाहुल्य क्षेत्र का हिस्सा है।

1. बाबा रामदेव के दादा पूसा जी गाँव में ‘बोहरा जी’ यानी ‘धनाढ्य’ कहलाते थे। उनके बुजुर्ग किसी दौर में गाँव की कुल खेतिहर ज़मीन के करीब चौथाई हिस्से के मालिक थे! यानी बाबा का परिवार पैतृक रूप से बड़े बिस्वेदार(जमींदार) थे! इनके परिवार का बहुत सम्मान था।

2. गाँव में बाबा रामदेव के परिवार के ही बुजुर्ग जगदीश आर्य जी ने अपने पिता राव उमराव सिंह जी की याद में एक बहुत ही शानदार धर्मशाला सन 1972 में बनवाई थी जिससे इस परिवार की खुशहाली का पता चलता है।

3. एक ग्रामीण के मुताबिक किसी दौर में इनका कुटुम्ब इतना बड़ा था कि परिवार में घर के बाहर जूतियां ही जूतियां दिखाई देती थी अर्थात इस परिवार के पास बड़ा संख्या बल था और पहले समय में इतने बड़े और धनाढ्य परिवार को गाँव में कोई दबा नहीं सकता था।

4. बाबा रामदेव ने आठवीं कक्षा तक पढाई यहीं रह कर प्राप्त की। इनके ताऊ जगदीश जी आर्य ने इनका दाखिला गुरुकुल खानपुर(अहीरवाल) में करवा दिया जहाँ इनके गुरु थे आचार्य प्रद्युम्न (जखराना वाले) जो भारत में संस्कृत व्याकरण के सबसे बड़े विद्वान् थे और जाति से राव साहब यानि यादव थे। आचार्य जी आज भी पतंजलि योगपीठ हरिद्वार में ही रहते हैं। इसका मतलब गुरुकुल में भी बाबा रामदेव के साथ कभी कोई भेदभाव नहीं हुआ था।

5. खानपुर गुरुकुल के बाद बाबा रामदेव की शिक्षा कालवा गुरुकुल में हुई जहाँ शिक्षक आचार्य बलदेवजी थे जो स्वयं पिछड़े कृषक समुदाय से आते थे। इसलिए कालवा गुरुकुल में भी रामदेव जी पर किसी भी प्रकार के भेदभाव की कोई गुंजाइश नहीं थी।

6. शिक्षा के बाद इन के मुख्य रूप से दो साथी थे। आचार्य बालकृष्ण जो जाती से ब्राह्मण है तथा आज भी इनके साथ हैं। इनके दूसरे साथी हैं आचार्य कर्मवीर।

7. गाँव में ही इनके अग्रज देवदत्त जी से मुलाकात हुई जो कि ‘CRPF’ से रिटायर्ड हैं और गाँव के धनाढ्य परिवारों मे गिने जाते हैं। खेती करने के लिए इनके पास एक ट्यूबवेल भी है। यानि हर तरह से सम्पन्न। जब उनसे चर्चा हुई तो वे बोले कि ‘सीरियल में काफी बातें सत्य से परे हैं’।

8. गाँव में कभी एक मंगतू ब्राह्मण का परिवार था। जिसकों यहाँ यादवों ने करीब 30 बीघा ज़मीन दान दे कर बसाया था। जिसके एक पुत्र हुआ मांगू ब्राह्मण! जिसके सिर्फ एक पुत्री थी जिसके पति निरंजनलाल को यहाँ बसाया गया, जिसकी संतानें आज भी गाँव में हैं। बड़े सरल स्वभाव का परिवार है। ब्राह्मणों में कभी भी ‘गोरधन महाराज’ नाम का व्यक्ति पैदा ही नहीं हुआ जैसा कि बाबा रामदेव के सीरियल में दिखाया गया है अर्थात डिस्कवरी जीत का पूरा टीवी सीरियल सिर्फ एक कपोल-गाथा है।

9. गाँव के 80-90 वर्ष की आयु वाले बुजुर्गों से भी बात की। उन्होंने बताया कि “उनके जीवन-काल में कभी भी गाँव में कृष्ण-लीला, रामलीला आदि का मंचन नहीं हुआ था” बाबा रामदेव का जन्म तो 1965 में हुआ ,फिर टीवी सीरियल में कृष्ण-लीला का मंचन एक कोरा झूठ साबित होती है।

10. गाँव के बुजुर्गों और रामदेव के भाई ने बताया कि रामदेव का परिवार इतना सबल था कि कोई उनको गाँव से बाहर निकालने की हिम्मत नहीं कर सकता था! बाबा को गाँव से बाहर निकाले जाने वाली घटना के सीरियल के इस दावे को भी उपरोक्त कथन झूठा साबित करता है।

11. बाबा के बड़े भाई देवदत्त ने स्वयं बताया कि “उनको और उनके माता पिता को कभी भी पंचायत के सामने बाँध कर किसी तरह की सामाजिक सज़ा नहीं दी गयी थी। साथ ही साथ जब हमने रामदेव के बड़े भाई से पूछा कि बाबा रामदेव की जीवनी पर बने टीवी सीरियल में झूठ क्यों दर्शाया गया है? उन्होंने कहा कि “बिना तडके वाली दाल कौन खायेगा? यदि इसमें ‘तड़का’ नहीं होता तो फिर कौन देखता?”

सिर्फ टीवी सीरियल की पब्लिसिटी के लिए झूठ का सहारा लिया गया और यादवों के स्वाभिमान के साथ खिलवाड़ किया गया। गाँव के कुछ लोगों ने कहा कि” इस सीरियल से गाँव और समाज की बदनामी हुई है और अब कौन यादव हमारे गाँव में अपने बच्चों का रिश्ता करेगा?”

12. गाँव में आज करीब 300 घरों की बस्ती है! 40 साल पहले शायद इससे भी कम घर होंगे। बुजुर्गों ने बताया कि उनके जीवन-काल में कभी भी गाँव में कोई हाट-बाज़ार नहीं लगा। आज भी बस एक-आध ही दुकान हैं। टीवी सीरियल में ये दिखाया गया कि रामदेव और उनकी माता को दुकानदारों ने सामान देने से इंकार कर दिया जिससे बाबा भगवन कृष्ण का मुकुट नहीं खरीद पाए। सीरियल में दिखाई घटना किस युग में हुई? सीरियल के एक और कोरे झूठ का पर्दाफाश हुआ!

13. आज गाँव में गिनती के ट्यूबवेल हैं और एक रामदेव के बड़े भाई के पास है! अखबार में छपी ये खबर गलत साबित हुई कि यदि उनके मटके से पानी ज़मीन पर भी छलक जाता था तो पहले उस रास्ते को धोया जाता था। उनके भाई और परिवार ने इस झूठ का खंडन किया है! जिस गाँव में 80-90 प्रतिशत यादव परिवार हों तथा खेडा भी यादवों का ही बसाया गया हो उसी गांव में एक यादव परिवार के प्रताड़ित होने की घटना दिखाने जाने के बाद सीरियल की विश्वसनीयता और नियत दोनों पर प्रश्नचिह्न खड़े करता है।

गाँव में ग्रामीणों और इनके कुटम्ब के लोगों से मिलने पर ये सच्चाई ज्ञात हुई!

* गाँव में कोई कृष्ण-मूर्ति या मंदिर नहीं है अपितु एक ठाकुरद्वारा हैं जहाँ गाँव की समस्त जातियाँ बड़े प्रेम से पूजा-अर्चना करती हैं।

* गाँव में किसी भी तरह का जातिगत दुर्भावना नहीं है बल्कि सब जातियां बड़ी समरसता से रहती हैं।

* गाँव बिछवालिया गोत्र के राव साहबों का ठिकाना है यहाँ के ब्राह्मण, कुम्हारों, स्वामी आदि जातियों में बहुत भाईचारा है। शादी आदि पर्वों को सब आपस में एक दुसरे के साथ मनाते हैं। यहाँ के यादव सरदार इतने दानवीर हैं कि अभी हाल ही में एक गरीब कुम्हार की बेटी की शादी में समस्त ग्रामीणों ने खूब दान दिया और गाँव की बेटी को बड़े प्रेम और ठाट-बाट से विदा किया। गाँव खुशहाल है और भाईचारे की मिशाल है! ये ही हाल आस-पास के यादवों के गांवों का है क्योंकि ये अहीरवाल यानी अहीर बाहुल्य क्षेत्र का ही हिस्सा है।

अहीरवाल के समस्त समाज और खास कर राष्ट्र-भक्त, जंगी कौम यदुवंश के वीर राव साहबों को डिस्कवरी जीत द्वारा फैलाये जा रहे झूठ का विरोध करना चाहिए! इस “तडके वाली दाल” का विरोध करना चाहिए क्योंकि आज तो सीरियल और बाबा रामदेव के सफ़ेद झूठ को पकड लिया गया है। आज उनके भाई तथा कुटुम्ब मौजूद है लेकिन आज से 40-50 साल बाद तो लोगों को ये ही लगेगा कि हो सकता हो कि रामदेव के साथ ऐसा ही हुआ हो क्योंकि टीवी सीरियल सदा मौजूद रहेगा लेकिन मौजूदा गवाह आज नहीं तो कल काल के गाल में समा ही जायेंगे!

आज बाबा रामदेव के पास इज्ज़त, पैसा,नाम, सम्मान सब कुछ है, फिर कैसे वे झूठ के भागीदार हो गए ?

साभार: वाया Sunil Singh Yadav के फेसबुक वाल से|

नोट: यह लेखक के निजी विचार हैं। IndiaSpeaksDaily इस आलेख में दी गई किसी भी सूचना की सटीकता, संपूर्णता, व्यावहारिकता अथवा सच्चाई के प्रति उत्तरदायी नहीं है।

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