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Tagged: गीता सार

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जो स्वयंभूत नहीं, उसे नष्ट होना ही है! फिर नश्वर के लिए क्यों मातम मनाते हो?

मरना तो एकदिन सबको है। मां के गर्भ में जिस दिन जिंदगी की यात्रा शुरू होती है, उसी दिन से उसकी आखिरी मंजिल भी सुनिश्चित हो जाती है, और वह मंजिल है मृत्यु! मुझे...

गीता में भगवान कृष्‍ण ने अर्जुन से कहा, हे अर्जुन वृक्षों में मैं पीपल हूं! आखिर उन्होंने स्वयं को पीपल ही क्यों कहा, कोई दूसरा वृक्ष क्यों नहीं ?

गीता और उपनिषदों को पढने के दौरान मन को असीम शांति का अनुभव होता है! वर्तमान में जब मैं अपनी ‘भारतीय वामपंथ का काला इतिहास’ पुस्तक लेखन के दौरान थक जाता हूं तो गीता...

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