Tagged: हिंदी कविता

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हिंदी कविता- इस पथ पर कौन मिलेगा?

इस पथ पर कौन मिलेगा? साथी यह तय कौन करेगा? आज मिला जो वह मेरा है, कल आशाओं का फेरा है! जीवन यह बहता दरिया है, जो साथ बहेगा याद रहेगा! इस पथ पर...

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कविता- तय कर लो, जाना किधर है…

तय कर लो! जाना किधर है एक तरफ काँटों का रास्ता पर तरफ दूसरी उजाले की चमक है सोच लो चलना किधर है एक तरफ नरम घास सा रास्ता तरफ दूसरी अँधेरे का असर...

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हिंदी कविता- ‘बुर्जुआ’

लाखों बार कुर्बान ऐसे ‘बुर्जुआ’ पर…. बाजार से गुजर रहा था, तुम आगे थी, और मैं पीछे। देखा, एक गुलाब वाला बुजुर्ग गुमशुम-सा बैठा था, उसका बेटा गुलाब समेटने की तैयारी में था, सोचा...

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कविता-आज जाने का है क्षोभ बड़ा, कल आने का है विश्वास ‘अटल’ !

बिरले ही होते हैं जिनके लिए शब्द स्वत फूटते हैं, आज मन उद्वेलित है ‘अटल’ जी को मेरी तरफ से अनंत ज्योति में विलीन होने पर अश्रुपूर्ण श्रद्धांजलि… मृत्यु मौन किन्तु ‘अटल’ है, आती...

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कविता- दुःख नहीं स्वीकार करो, मृत्यु से भी प्यार करो!

दुःख नहीं, स्वीकार करो, मृत्यु से भी प्यार करो! एक छोर पर जीवन है, दूसरी छोर पर मौत खड़ी! जीवन जब जी भर कर जिया, मृत्यु को भी भरपूर जियो! मृत्यु एक अटल सत्य...

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हिंदी कविता : चिदाकाश!

हम चारों तरफ आकाश से घिरे हैं, जो है और जो नहीं है! है उसके लिए जो जानता है, नहीं है उसके लिए जो तर्क करता है! आकाश यानी शून्य! जीवन की गति ही...

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हिंदी कविता : विकास के पथ पर हूँ, कैसे कह दूँ?

दिल्ली जैसे महानगरों में इस तरह के दृश्य आपको कहीं न मिल जायेंगे, फुटपाथ, पार्क आदि! लेकिन दिल्ली की लाइफ लाइन बन चुकी मेट्रो की सीढ़ियों में इस बालक को देखा तो मन के...

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गौरैया फिर आना मेरे अंगना।

आज विश्व गौरैया दिवस है याद है न कि भूल गए। याद इसलिए लिखा क्योंकि अब मात्र यादों में ही शेष है प्रकृति की वह अमूल्य धरोहर जो सहज एक छलांग में एक घर...

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हिंदी कविता ‘जीवन मरण के मध्य’!

मैंने बिखेरी हैं, सांसें हवाओं में थोड़ी-थोड़ी! एक उम्मीद के साथ, कि कोई तो बटोर लेगा! अंजुरी भर फिर बिखेर देगा अपने बाद फिजाओं में! ताकि जीवन चलता रहे, इस लेन-देन के मध्य आखिर!...

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न वहां मेरा घर है, न वहां मेरा गांव है।

नीले आसमान के नीचे, सुनसान छत पर, भरी दोपहरी में, एकदम से अकेला, हवा की सांय-सांय जब कानों से टकराती है, तो एहसास होता है, यह गांव है, कोलाहल से दूर, यहां सुकून की...

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सुनो कुछ तो कहता है गोधरा?

27 फ़रवरी 2002 को गुजरात के गोधरा में मानवता शर्मशार हुई, जब एक संप्रदाय विशेष ने गोधरा स्टेशन पर साबरमती एक्सप्रेस में 59 रामभक्तों को जिंदा फूंक दिया गया था, जिसमें 25 महिलाएं, 19...

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नाम तुम्हारे गीत लिखूँगा, तुम को मन का मीत लिखूँगा!

जन मानस में नरेंद्र मोदी की लोकप्रियता का अंदाजा सिर्फ इस बात से किया जा सकता है कि उन पर कविताओं का एक दौर सा चल पड़ा है, नोट बंदी जैसे साहसिक फैसले के...

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