Tagged: Bloomsbury India

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क्या साबित करते हैं तुर्की में मिले साढ़े 11 हजार साल पुराने मंदिर के अवशेष…

सभ्यता के इतिहास में सबसे पहले मंदिर बना, फिर मानव बस्तियां बसी। 1960 में तुर्की में हुई खुदाई में करीब 11,500 साल पुराने मंदिर के अवशेष ने साबित कर दिया कि समाज से पहले...

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योगी की जीवनी को मिला संतों का आशीर्वाद!

बुढ़वा मंगल के दिन चित्रकूट में दो हजार से अधिक संत इकट्ठे हुए। संतों ने हिंदी व अंग्रेजी में प्रकाशित उप्र के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की जीवनी का लोकार्पण किया और इसे अपना आशीर्वाद...

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भारत में आयातित वामपंथ के काले इतिहास पर से पर्दा उठाती किताब का नाम है ‘कहानी कम्युनिस्टों की’

आनंद कुमार। दुनिया के जघन्यतम अपराध क्रांतियों की आड़ लेकर हुए हैं। विश्व युद्धों की जड़ में कहीं ना कहीं क्रांति की आड़ में छुपे बैठे ऐसे ही भेड़िये थे जिन्होंने भेड़ की खाल...

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विचारधारा से कम्युनिस्ट पंडित नेहरू ने स्टालिन को खुश करने के लिए अमेरिका द्वारा भारत को परमाणु बम दिए जाने का किया था विरोध!

शैलेश भारद्वाज। किताब के शीर्षक से ही आप समझ गए होंगे की इसमें कम्युनिस्टों की कहानी है। ऐसे कम्युनिस्टों की कहानी जिसने प्रत्यक्ष रूप से कम्युनिस्ट पार्टी से जुड़े थे, इससे भी महत्वपूर्ण है,...

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15 वर्षों से परिवारवाद और जातिवाद का शिकार, ‘उत्तर प्रदेश – विकास की प्रतीक्षा में’

दुनिया के बड़े प्रकाशकों में से एक व हैरी पोटर सिरीज के प्रकाशक ब्लूम्सबरी पब्लिकेशन ने शांतनु गुप्ता की की पुस्तक ‘उत्तर प्रदेश – विकास की प्रतीक्षा में’ का प्रकाशन किया है। इस पुस्तक...

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नरेंद्र मोदी को प्रधानमंत्री बनने से रोकने के लिए अरविंद केजरीवाल ने कांग्रेसी जयपाल रेड्डी के साथ मिलकर खेला खेल! पुस्तक में हुआ खुलासा!

पुस्तक The Lobbyists के जरिए यह खुलासा हुआ है कि यूपीए सरकार के पेट्रोलियम मंत्री जयपाल रेड्डी के इशारे पर अरविंद केजरीवाल ने मुकेश अंबानी और नरेंद्र मोदी का नाम लेकर झूठ बोला और...

Bloomsbury India की नयी किताब में फिलॉस्फर नरेंद्र मोदी से आप होंगे रूबरू !

टीवी पत्रकार हरीश चन्द्र बर्णवाल की पांचवीं किताब ‘मोदी सूत्र’ दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित और हैरी पॉटर सीरीज छापने वाले प्रकाशक ‘ब्लूम्सबरी’ से शीघ्र प्रकाशित होने वाली है। इससे पहले हरीश की नरेंद्र मोदी...

भारत के काले पत्रकार और उनका काला इतिहास!

मैंने पत्रकारिता की गिरती दशा को देखकर 12 साल पुराने अपने पत्रकार करियर को विराम दिया था। 2012 में नौकरी छोड़ी थी। अब तक लिखी अपनी हर किताब में पत्रकारिता के स्याह चेहरों को...

सोनिया-राहुल गांधी के राजतंत्रात्मक व्यवहार को छुपाने के लिए मीडिया ने नरेंद्र मोदी व अमित शाह की कठोर छवि गढ़ी, जबकि वो ऐसे बिल्कुल भी नहीं हैं!

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह की सार्वजनिक छवि अलग है-धीर, गंभीर और तानाशाह जैसा कठोर! मीडिया ने उनकी छवि कुछ इसी प्रकार की बना रखी है! अभी ‘इंडिया टुडे’ ने उन पर कवर स्टोरी छापी...

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