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Tagged: Education

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उच्च शैक्षणिक संस्थाओं में कांग्रेस – वामपंथियों की कार्यपद्धति (सरकार तुम्हारी, सिस्टम हमारा) भाग – 2

पहले भाग में आपने देखा कि देशबन्धु कालेज के इतिहास विभाग से संबंधित अक्षित बारू जैसे विद्यार्थी जो कांग्रेस – वामपंथी विचारधारा से नही जुडे थे, उनके साथ कांग्रेस – वामपंथी विचारधारा से जुडे...

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कोरोनकाल में शिक्षा का अलख जगा रहे शशि प्रकाश सिंह

कोरोनाकाल में सभी छात्र-छात्राओं की पढ़ाई बाधित हो रही है। ऐसे छात्रों को कोटा में रहने वाले शिक्षाविद् शशि प्रकाश सिंह (एसपीएस सर) सहायता प्रदान करेंगे। उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ निवासी शिक्षक शशि...

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शिक्षा नीति 2020 ने आज़ादी के बाद से चली आ रही घिसी पिटी शिक्षा प्रणाली को किया ध्वस्त, शिक्षा में फूंके नवीन प्राण

भारत की नई शिक्षा नीति को कैबिनेट द्वारा स्वीकृति मिल चुकी है. शिक्षा नीती 2020 भारतीय शिक्षा के इतिहास में निश्चित तौर पर ही एक मील का पत्थर साबित होगी. इसकी सबसे प्रमुख दो...

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भारतीय शिक्षा प्रणाली- पाठ्यपुस्तक लिखने वालों को काटे हुए है एक विचारधारा का कीड़ा!

सूर्य सिद्धांत स्पष्ट करता है कि – “सर्वत्रैय महीगोले स्वस्थामुपरिस्थितम्। मन्यन्ते खेयतो गोलस्तस्यक्कोर्ध्वक्कवोप्यध:” अर्थात यह पृथ्वी गोल है इसलिये हम सभी अपने अपने स्थान को उपर ही समझते हैं। यह पृथ्वी वृहद शून्य के...

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वामपंथी और तथाकथित बुद्धिजीवियों ने प्राचीन भारतीय विमान प्रौद्योगिकी पर तथ्यहीन शोध पत्र के झूठ को फैलाया!

मेरे आलेख “वैमानिक शास्त्र – कल्पना और विचारधारा” से असहमत मित्र ने एक शोधपत्र भेजा – “अ क्रिटिकल स्टडी ऑफ द वर्क – वैमानिक शास्त्र (साईंटिफिक ओपीनियन, 1974, पृ 5-12)” तथा इसे इंडियन इंस्टीट्यूट...

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वैदिक विमान- जब दुनिया ठीक से नेकर सिलना नहीं जानती थी, भारतीय ग्रंथों में सैंकडो बार वायु-मार्ग और विमान शब्द का हुआ था प्रयोग!

वैमानिक शास्त्र में मेरी जिज्ञासा थी। इसका कारण पुष्पक विमान नहीं बल्कि वामपंथी खेमे के पत्र-पत्रिकाओं व वेबसाईट पर प्रकाशित वे आलेख थे जिनमें से कुछ के शीर्षक हैं “चालीस साल पहले ही खुल...

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मैक्समूलर का वेदों को दुष्प्रचारित करने का षड्यंत्र, चिट्ठियों ने खोला राज!

राजीव रंजन प्रसाद। कुछ उद्धरण प्राप्त हुए कि मैक्समूलर और मैकाले के बीच कई दौर की वार्ता हुई, कतिपय इतनी तीखी कि उसमें मैकाले ही बोलते रहे। इस विवरण को आगे बढाने से पूर्व...

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साम्राज्यवादी ब्रिटेन की नकल करती हमारी अध्ययन परिपाटी में मौलिकता कम है और शोर अधिक!

राजीव रंजन प्रसाद। जिस डाली पर बैठा उसी को काटने वाला व्यक्ति क्या कभी कालिदास बन सकता था, यदि उसके जीवन में विद्योत्तमा न होतीं? राजा शारदानंद की विदुषी और शास्त्रज्ञ कन्या विद्योत्तमा का...

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महर्षि अगत्स्य का विद्युत शास्त्र!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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शिक्षा में हुई चूक का परिणाम है जो शल्यचिकित्सा के जनक को पश्चिम का मुंह ताकना पड़ रहा है?

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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राजा और रंक के भेद को मिटा कर ही भारतीय शिक्षा प्रणाली हो सकती है दुरुस्त!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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वर्तमान शिक्षा प्रणाली ऐसी पौध तैयार कर रही है जिसमें न कल्पनाएं हैं न नैसर्गिक प्रतिभा!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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समान शिक्षा की अवधारणा ही देश में समान सोच का बीजारोपण कर सकती है।

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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भारत की शिक्षा व्यवस्था और मैकाले का भूत!

भारत की शिक्षा व्यवस्था गुरुकुल परम्पराओं से निकल कर वातानकूल कक्षाओं तक पहुँच गयी है। शिक्षा ग्रहण कर प्रसारित करने की बजाय केवल जीविकोपार्जन के लिए जीवन के शुरुवाती 20-25 साल खपाने की व्यवस्था...

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मनीष सिसोदिया के हॉवर्ड यूनिवर्सिटी में किये दावे की खुली पोल! दिल्ली में आम आदमी पार्टी की शिक्षा क्रांति फेल!

“दूर देश से बोलने पर आवाज दूर तलक जाती है। मोदी जब विदेश के मंच से अपनों के बीच बोलते हैं तो दिल्ली में ज्यादा ताली बजती है।” वामपंथी पत्रकार, रवीश कुमार की आवाज...

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इसीलिए यह दुनिया बच्चों के लिए असुरक्षित होती जा रही है!

याद रखिए बच्चे अपने घरों में सुरक्षित रहते हैं, लेकिन आज के मां-बाप ने उनसे यह अधिकार भी छीन लिया है! पति-पत्नी कार के फ्रंट सीट पर बैठे होते हैं और बेचारा छोटा बच्चा...

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समान शिक्षा नीति लागू किए बिना, भारतीय संविधान का कोई मतलब नहीं!

क्या वर्तमान शिक्षा व्यवस्था सबको समान अवसर उपलब्ध कराती है? क्या आप भी सहमत हैं कि बाबा साहब अंबेडकर और दीनदयाल उपाध्याय जी की इच्छानुसार देश में समान शिक्षा (यूनिफार्म एजुकेशन) लागू होना चाहिए?...

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