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Tagged: indian history

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इंग्लैंड में पहला स्कूल 1811 में खुला उस समय भारत में 732000 गुरुकुल थे । खोजिए हमारे गुरुकुल कैसे बन्द हुए?

गुरुकुल कैसे खत्म हो गये? आपको पहले ये बता दे कि हमारे सनातन संस्कृति परम्परा के गुरुकुल मे क्या क्या पढाई होती थी ! आर्यावर्त के गुरुकुल के बाद ऋषिकुल में क्या पढ़ाई होती...

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प्राचीन भारतीय शिक्षा-दर्शन!

कमलेश कमल। हिंदू धर्म सत्य और ऋत का सहज-शाश्वत और सुमिलित गठबंधन है, जो स्वभाव से ही वर्तमानजीवी और कल्याणधर्मी है। ऋत और सत्य का यह गठबंधन दर्शन की रज्जू से होता है, जिसका...

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भारतीय साधु की ऐतिहासिक तस्वीर को लेकर alt news के संस्थापक ने झूठ फैलाया

वामपंथी वेबपोर्टल alt news के संस्थापक प्रतीक सिन्हा एक बार फिर झूठ बोलते पकड़े गए हैं। 23 नवंबर को प्रतीक सिन्हा ने एक ट्वीट किया।

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राखीगढ़ी की खुदाई में मिले उत्खनन सामग्री ने एक बार फिर आर्यों को विदेशी बताने वालों को किया बेनकाब

[ हृदयनारायण दीक्षित ]: झूठ का अस्तित्व नहीं होता। स्वार्थी तत्व अपने हित साधन में झूठ का प्रचार करते हैं, लेकिन सत्य बार-बार अपना अस्तित्व प्रकट करता है। ऐसा ही एक झूठ ब्रिटिश सत्ता के समर्थक...

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आई पी एस आंफिसर ने अपने ट्वीट के द्वारा बताया कैसे वामपंथियों ने हिंदू धर्म की गलत छवि प्रस्तुत की, द वायर के सिद्धार्थ वरदराजन उतरे वामपंथियों के बचाव के लिये!

द वायर मीडिया के संस्थापक संपादक सिद्धार्थ वरदराजन ने आई पी एस अधिकारी एम नागेश्वर राव के उस ट्वीट पर निशाना साधा है जिसमे उन्होने भारतीय सभ्यता और संस्कृति को वामपंथी इतिहासकारों द्वारा मिटाये...

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राम मंदिर की नींव में गाड़ा जाएगा जानकारियों से भरा ‘टाइम कैप्सूल’

‘टाइम कैप्सूल’ एक बॉक्स होता है, जिसमे वर्तमान समय की जानकारियां भरी होती हैं। देश का नाम, जनसँख्या, धर्म, परंपराएं, वैज्ञानिक अविष्कार की जानकारी इस बॉक्स में डाल दी जाती है। कैप्सूल में कई...

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केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर: खजाने वाले बी चैंबर पर मंत्रयुक्त ताला सदियों पूर्व लगा दिया गया!

केरल का पद्मनाभस्वामी मंदिर विश्वभर में इसके लिए विख्यात है कि यहाँ की अकूत धन-संपत्ति को एक ऐसे रहस्यमयी कक्ष में बंद किया गया है, जिसकी रक्षा नागराज करते हैं। इस गुप्त ख़ज़ाने की...

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अतीत के वातायन

विश्व के हर कोने में जब भी धरती खोदी जाएगी, नीचे से शिवाले ही प्राप्त होंगे।  इस शिवलिंग की अनुमानित निर्माण तिथि आज से लगभग ढाई हज़ार वर्ष पूर्व की बताई जाती है। ये...

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