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सुप्रीम कोर्ट का आदेश! बलात्कार मामले में TRP के चक्कर में हिंदु मुस्लिम खेल मेनस्ट्रीम मीडिया को अब भारी पर सकता है!

  पत्रकारिता का मूलभूत सिद्धांत है, संवेदनशील मामले में  पीड़ित और पीड़िता की पहचान छिपाना। पहचान के मायने उसके नाम, जाति,मजहब और स्थान से है। हाल तक प्रिंट और टीवी मीडिया पत्रकारिता के इस...

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सड़क छाप बिल्डर पत्रकारिता के शिखर पुरुष बन जाते हैं ! क्या वे प्रणय राय जैसे संपादकों से प्रेरित होते हैं जो अपराध के बाद चौथे स्तंभ का कवच ओढ़ लेते हैं!

डेढ़ साल पहले एक पत्रकार मित्र के साथ एक रिजनल चैनल के मालिक संग मुलाकात के बाद ज्यों ही मैं दफ्तर से बाहर निकला अपने पत्रकार मित्र से कहा जल्द ही ये संपादक जेल...

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पहले मीडिया को घर में बैठाया और अब उससे ही परहेज है सैफ अली खान को!

पेपराज्जी का मतलब होता है ख्यातनाम लोगों की निजी ज़िंदगी में घुसपैठ कर उनके फोटो लेना। उन पलों को कैमरे में कैद करना पत्रकारिता की भाषा में ‘पेपराज्जी’ माना जाता है। ताज़ा खबर ये...

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यूपीए सरकार के दौरान एनडीटीवी को पीएमओ से मिलता था संपादकीय आदेश!

एनडीटीवी न्यू चैनल अगर देश का विवादास्पद चैनल के नाम से कुख्यात है तो इसके लिए आज नहीं बल्कि उसका विगत भी दोषी है। देश के प्रधानमंत्री कार्यालय से जब किसी चैनल को संपादकीय...

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निजी क्षेत्र में आरक्षण के नाम पर इंडियन एक्सप्रेस और टाइम्स नाउ ने फैलाया ‘फेक न्यूज’!

निजी क्षेत्र में आरक्षण के नाम पर इंडियन एक्सप्रेस तथा टाइम्स नाउ जैसे बड़े मीडिया हाउस फेक न्यूज प्रचारित करने में जुट गए हैं। इंडियन एक्सप्रेस ने निजी कंपनियों में आरक्षण को लेकर पीएमओं...

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सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई पर भी फेक न्यूज परोस रहा जनसत्ता और एनडीटीवी!

कुछ मीडिया घरानों में मोदी सरकार के प्रति इतना बैर भाव भरा है कि उनके नेताओं की याचिकाओं पर सुप्रीम कोर्ट की सुनवाई के संदर्भ में भी फेक न्यूज परोस देते हैं। जनसत्ता तथा...

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‘एलिट पत्रकारिता’ के नशे में ‘उल्टी’ कर अपने ही मुंह पर मलते NDTV के पत्रकार!

आजकल एनडीटीवी के कई पत्रकार और उनके समर्थक कुंठा में जी रहे हैं। ‘एलिट पत्रकारिता’ की आड़ में एनडीटवी के अंदर चल रहे काले साम्राज्य की परत-दर-परत उघड़ चुकी है। ‘नग्नता-बोध’ से ग्रस्त एनडीटीवी...

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कहां गए अवार्ड वापसी वाले भाड़े के Urban Naxals!

बंगाल में जिस प्रकार भाजपा की एक महिला नेता को सरेआम टीएमसी के नेताओं ने पीटा और अपमानित किया है उसे देखने के बाद वामियों और कांगियों को सांप सूंघ गया है। पीडी पत्रकारों...

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सुप्रीम अदालत के फैसले को दरकिनार कर एनडीटीवी ने क्या अपने एजेंडा पत्रकार रविश कुमार को देश में दंगा कराने का ठेका दिया है

* धर्म को परिभाषित करते हुए अदालत अपनी काल्पनिक चेतना को लागू नहीं कर सकती- जस्टिस इंदु मल्होत्रा * पांचो आरोपियों की गिरफ्तारी दुर्भाग्यपूर्ण है। महाराष्ट्र पुलिस ने प्रेस कांफ्रेस कर मीडिया ट्रायल किया...

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क्रांतिकारी पत्रकार पुण्य प्रसून वाजपेयी, आप या तो तब झूठ बोल रहे थे या अब? अपने गिरने की हद भी तय कर ही लो!

पत्रकारिता को धंधा बनाने वाले पूण्य प्रसून बाजपेयी और उन जैसे धंधेबाजों को क्रांतिकारी साबित करते हुए, सत्ता के खिलाफ बुलंद आवाज बनाने का जतन करने वालों को अब उनसे पूछना चाहिए कि तुमने...

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NDTV, प्रणय राय और रवीश कुमार की पोल उनके ही एक पूर्व साथी ने खोल कर इन लोमड़ियों के मुख से नकाब नोंच लिया!

समरेंद्र सिंह। इन दिनों टीवी के दो बड़े पत्रकार पुण्य प्रसून बाजपेयी और रवीश कुमार अक्सर ये कहते हैं कि प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) की तरफ से चैनल के मालिकों और संपादकों के पास फोन...

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विक्रम सूद की किताब ‘द अनइंडिंग गेम’ ने बिकाऊ मीडिया की खोली पोल!

विक्रम सूद की लिखी यह किताब न तो ज्ञापन मात्र है न तो किसी खुफिया संगठनों की अंदरुनी दस्तावेज है। लेकिन हां यह किताब जासूसों के बीच एक बुद्धिजीवी द्वारा लिखी ऐसी किताब है...

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भारतीय मीडिया विषम है! पक्षपात पूर्ण है! जो देश की पीड़ा ही न समझे, वह हमारा मीडिया नहीं हो सकता!

अंग्रेज़ी में ‘न्यूज़’ का अनुवाद क्रमशः नार्थ, ईस्ट, साउथ और वेस्ट का मेल दिखाता है। न्यूज़ जिसमे चारों दिशाओं की खबर मिलती है। ये सपाट सा अर्थ है। जब यही न्यूज़ हिन्दी में ‘समाचार’...

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एनडीटीवी की केरल बाढ़ पर चुनिंदा फोटो छापना सीपीआई(एम) की चाकरी नहीं तो और क्या है?

भारतीय मीडिया में खुद को ईमानदारी में राज हरिश्चंद्र बताने वाले एनडीटीवी का केरल बाढ़ पर चुनिंदा फोटो छापकर झूठी खबर फैलाने को क्या सीपीआई(एम) की चाकरी नहीं कहा जाएगा? आज सोशल मीडिया का...

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मीडिया मॉनिटरिंग के बारे में झूठ क्यों बोल रहे पुण्य प्रसून वाजपेयी?

फेक न्यूज के नाम पर एबीपी न्यूज चैनल से इस्तीफा देकर निकले या निकाले गए पुण्य प्रसून वाजपेयी की ‘झूठ की खेती’ अभी भी खत्म नहीं हुई है। इस बार उसने मोदी सरकार की...

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युवा वकील विक्रम सिंह के करियर को टाइम्सनाउ और अर्णव गोस्वामी ने किया चौपट! अदालत ने जारी किया अर्णव और टाइम्स ग्रुप के खिलाफ समन!

पटियाला हाउस कोर्ट ने दो साल पहले दायर एक याचिका पर सुनवाई करते हुए वरिष्ठ पत्रकार अर्णब गोस्वामी, टाइम्स नाउ समूह तथा अन्य कई के खिलाफ आपराधिक मानहानि के मामले में समन जारी कर...

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पत्रकार और पत्रकारिता, क्या कल था और क्या आज है?

इंडियन एक्सप्रेस के रामनाथ गोयनका जब प्रभाष जोशी को संपादक बनाने के लिए दिल्ली के गांधी शांति प्रतिष्ठान में उन से मिलने के लिए अचानक पहुंचे तो प्रभाष जी के पास गोयनका जी को...

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कश्मीर में बैठे पाकिस्तानी समर्थक इमरान खान के बहाने भारत पर बरसे!

कश्मीरी अलगाववादी समूह पाकिस्तान प्रेम से ग्रसित हैं। इन समूहों से हमदर्दी रखने वालों में नेता ही नहीं बल्कि शाह फैजल जैसे कुछ आईएएस अधिकारी भी शामिल हैं, तभी तो उनका पाकिस्तान प्रेम गाहे-बगाहे...

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जिस दिन अलवर में मॉब लिंचिंग के नाम पर हिंद़ुओं को बदनाम किया, उसी दिन बाड़मेर में एक दलित को मुसलमानों ने लिंचिंग कर मार डाला! खबर सुनी क्या?

इस देश में मीडिया पर हावी पत्रकारों के एक खास तबके ने हिंदुओं को बदनाम करने का ठेका ले रखा है। मुसलमानों को पीड़ित और हिंदुओं को हत्यारा साबित करने में कोई कोर कसर...

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मॉब लिंचिंग पर टीवी-अख़बार के दबदबे के कारण हिन्दू फंसा है गनभेदी चुप्पी के मकड़जाल में!

चन्द्रकान्त प्रसाद सिंह। मॉब लिंचिंग की जड़ें ईसाइयत, इस्लाम और कम्युनिज़्म में हैं, हिन्दू तो बस ‘मियाँ की जूती मियाँ के सर’ मार रहे हैं! कम्युनिज़्म और इस्लाम के प्रसार का आधार ही मॉब...

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