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Tagged: indian society

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व्यभिचार कानून- मी लार्ड! ये तो कम्प्लीट दिवालियापन है!

अभिरंजन कुमार। धारा-497 के मौजूदा स्वरूप का मैं भी समर्थन नहीं करता, लेकिन अदालत ने इसे तर्कसंगत बनाने के बजाय इसे ख़त्म करके सही नहीं किया है। मेरी राय में अदालत का यह फैसला...

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समलैंगिकता के बाद अब समाज में व्यभिचार बढाएंगे मी-लॉर्ड!

वाह मीलॉड! पहले समलैंगिकता अपराध नहीं और अब इतनी आजादी कि जानवर की प्रत्येक नागरिक किसी से भी यौन संबंध बना सकते हैं! न पति की पत्नी के प्रति कोई जिम्मेदारी न पत्नी की...

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भारत की सुगठित सामजिक संरचना को तोड़ने का काम कर रहा है ‘बिग बॉस’!

परिवार के साथ बिग बॉस देखने के लिए बहुत हिम्मत चाहिए! बिग बॉस क्यों देखा जाता है? ये प्रश्न मुझे बड़ा उद्धेलित करता है। एपिसोड ख़त्म होने के बाद दर्शक की मनोदशा क्या होती...

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कुंडली मिलान का पारंपरिक तरीका कितना सफल और कितना तार्किक?

कब प्रारम्भ हुआ कुंडली मिलान :- प्राचीन या वैदिक काल में हिन्दू लोग ज्योतिष और एस्ट्रोनॉमी से पूरी तरह परिचित होने के बावजूद विवाह में किसी भी प्रकार के ज्योतिष, गुण मिलान आदि का...

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अच्छे दिन, कभी तो आएंगे!

असीमित जनसँख्या वृद्धि, हर तरफ दम घोटू हवा और हम सरकार की तरफ मुंह ताक कर खड़े है कि अच्छे दिन क्यों नहीं आ रहे हैं। ये माना साफ़ हवा,पानी उपलब्ध कराना सरकारों की...

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पति और पिता मात्रा का हेर फेर!

विदाई का करुणा छण- मेरा घर आँगन छूट रहा था। छूट रही थी सखियाँ, सखियों के साथ बचपन की यादें। सभी परिजन दुखी थे, माँ सबसे ज्यादा दुखी थी! वह आंखों की अश्रुधारा को...

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एक राजा जो अपनी न्यायप्रियता के कारण बन गया न्याय का देवता ग्वैल उर्फ गोलूदेव!

भारत परंपराओं और आस्था का देश है। यदि मानवता के लिए किसी ने कभी कुछ किया है तो जन सामान्य उसे सम्मान देने से नहीं चूकता। नैनीताल में एक जगह है, घोड़ाखाल। यहां ग्वैल...

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आप मर कर भी जिन्दा रह सकते हैं बस जज्बा पैदा कीजिये!

“जिंदगी जिंदादिली का नाम है, मुर्दा दिल क्या खाक जिया करते हैं?” … यह पंक्तियाँ सार्थक होती हैं पिथौरागढ़ (बड़ाबे) निवासी गीता देवी पर जिन्होंने मरने के बाद अपने शरीर को दूसरों की जिंदगी...

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यह किस मानसिकता के लोग हैं, जो हमारे बीच रह रहे हैं?

प्रसिद्द अभिनेता प्राण फिल्मों में खलनायक की भूमिका को इस विश्वसनीयता के साथ अदा करते थे कि सिनेमा हॉल में बैठे दर्शकों में सिहरन पैदा हो जाती थी। परदे पर उनके द्वारा निभाई गई...

यही मेरा और उसका प्रायश्चित था !

श्रीमती मंजू मिश्रा । ओह! आज सुबह कब आ गया ? रविवार की सुबह दरवाजे की लगातार बहती घंटी ने आखिर मजबूर कर दिया की मैं उठूँ और देखूं की कौन आया है ?...

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