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Tagged: Movie Review by Vipul Rege

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Movie review :लंदन कॉन्फिडेंशल पूरी तरह से मौनी राय की फिल्म है

लंदन कॉन्फिडेंशल एक ऐसी पहली फिल्म है जो कोरोना काल में शूट की गई है। लंदन की पृष्ठभूमि पर बनाई गई इस फिल्म का विषय भी कोरोना के इर्द-गिर्द ही घूमता है। कहानी कुछ इस तरह है कि जब संसार कोरोना से उबरने का प्रयास कर रहा है, उस समय इससे भी खतरनाक एक वायरस भारत-चीन सीमा पर फैलना शुरू हो चुका है।

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Movie Review :भारतीय निर्देशक साइंस कथाओं से खेलना सीख रहे हैं

1984 में रहस्यमयी ढंग से लापता हुआ एक विमान 2019 में वापस आकर क्रेश हो जाता है। बहुत से यात्री मारे जाते हैं। एक प्रोफेसर और एक एयर होस्टेस इस दुर्घटना में जीवित बचे हैं। एक सीबीआई अधिकारी शांतनु को इस केस पर लाया गया है।

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movie review : संत आसाराम पर ऊँगली उठाती एक नाकाम फिल्म है आश्रम

आश्रम का पहला सीजन देखने के बाद ये कहना होगा कि प्रकाश झा ने भी वही काम किया, जो शाहरुख़ खान क्लास ऑफ़ 83 बनाकर कर गए हैं। वास्तविक घटनाओं पर लिखी कहानी में काल्पनिक चरित्र डालकर परदे पर पेश करना अब एक निकृष्ट परंपरा बनती जा रही है।

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movie review: सड़क-2 महेश भट्ट के कॅरियर की सबसे अवसादग्रस्त फिल्म है

महेश भट्ट निर्देशित सड़क-2 रिलीज के पहले दिन ही बह गई। मैं ये कतई नहीं कहूंगा कि सुशांत सिंह राजपूत प्रकरण की काली छाया के कारण फिल्म का ये हाल हुआ। मैं ये कहूंगा कि ये औसत से भी गई-गुज़री फिल्म है, सुशांत की काली छाया इस पर ना पड़ती, फिर भी इसका हश्र बॉक्स ऑफिस पर बुरा ही होता।

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Film review: शाहरुख़ की फिल्म में दाऊद इब्राहिम का नाम ही बदल दिया गया

हुसैन ज़ैदी एक ख्यात पत्रकार और लेखक हैं। उनकी किताब ब्लैक फ्राइडे पर बनी फिल्म अनुराग कश्यप ने निर्देशित की थी। उन्ही हुसैन ज़ैदी की एक किताब ‘क्लास ऑफ़ 83 : द पनिशर्स ऑफ़...

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Movie Review : बंगाली सिनेमा का काला जादू सम्मोहित करता है!

आप में से कितने दर्शक पाउली दाम को जानते होंगे। कितने हिन्दी दर्शकों ने पाउली की फ़िल्में देखी होंगी। बंगाली सिनेमा के इस काले जादू का सम्मोहन कितनों को छूकर निकल गया होगा। बंगाली...

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Movie Review : करण जौहर ने वायुसेना और गुंजन सक्सेना के साथ किया छल!

वास्तविक कथाओं पर फ़िल्में बनाना बॉलीवुड का पुराना चलन है। सम-सामयिक घटनाओं या राष्ट्रीय नायकों की आकर्षक जीवनियों को कैश करना अब एक विकृति का रूप ले चुका है। करण जौहर की नई फिल्म...

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Movie Review : ये युद्ध फिल्म देखते-देखते आप अपनी पलकों को नम पाएंगे

अवरोध : The siege within यदि ‘उरी- द सर्जिकल स्ट्राइक’ उरी आतंकी हमले से लेकर एलओसी पर की गई सर्जिकल स्ट्राइक पर एक ‘सर्चलाइट’ डालती है तो ‘अवरोध-The siege within’  भारतीय सेना के पराक्रम...

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मूवी रिव्यू: रक्तरंजित कथा के ठूंठ पर प्रेम तितली आ बैठती है

पैंसठ साल का रघुवेन्द्र सिंह ने अपनी दूसरी शादी एक जवान लड़की से रचाई है, जो उससे आधी उम्र की है। ठाकुर ने इस लड़की को ख़रीदा था। शादी की रात ही रघुवेंद्र सिंह...

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मूवी रिव्यू : ख्यातनाम हस्ती का बॉयोपिक बनाना बड़ा उत्तरदायित्व है

किसी ख्यातनाम हस्ती का बॉयोपिक बनाना बड़ा उत्तरदायित्व है, यदि आपको फिल्मों की प्रभावित करने की क्षमता पर विश्वास है तो आप इस उत्तरदायित्व को निश्चित ही समझेंगे। बॉयोपिक बनाने का सबसे बड़ा उद्देश्य...

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फिल्म समीक्षा: संजीदा वायलन पर दर्द भरी धुन का ऐहसास कराता Super 30

‘आनंद के शहर की लाइब्रेरी में विदेशी जर्नल्स नहीं आते इसलिए वह दूसरे शहर के कॉलेज की लाइब्रेरी में जाकर जर्नल पढ़ता है। लाइब्रेरियन उसे पकड़ लेता है और धक्के देकर बाहर निकाल देता...

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स्पाइडर का रोमांटिक जाल!

सिनेमा के परदे पर पीटर पारकर और एमजे का टीनएज रोमांस देखते-देखते सत्रह साल का हो चुका है। इन सत्रह सालों में पीटर और उसकी टीम दो बार ‘रिबूट’ हो चुकी है। स्पाइडरमैन की...

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फिल्म समीक्षा : एवेंजर्स एंड गेम-‘एंड गेम’ के लिए ‘रोमांच’ से भी बड़ा शब्द गढ़ना होगा!

मार्वल स्टूडियो की ‘एवेंजर्स – एंड गेम’ देखने का अहसास ऐसा है, मानो सदियों लम्बे सपने से जागना। यकीन मानिये, सन 2008 से चला आ रहा ये खूबसूरत ख़्वाब टूटे, ऐसा दर्शक कभी नहीं...

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जो मरकर भी ज़िंदा है, उस पर आधारित है फिल्म ‘अनवांटेड’!

पूर्वी उत्तरप्रदेश, बिहार और बंगाल में ऐसे लोगों की तादाद लगभग पचास हज़ार हैं जो मरकर भी जीवित हैं। कहने का मतलब इन तीन राज्यों में ऐसे लोग भी रहते हैं जो कागज़ों पर...

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फ़िल्म समीक्षा: कैप्टन मार्वल, आकाशगंगा में विचरती अत्याधुनिक सभ्यताओं के बीच महायुद्ध की गाथा

एवेंजर्स का अपना अलग ही संसार है। आकाशगंगाओं में विचरती अत्याधुनिक सभ्यताओं के बीच महायुद्ध की ये गाथा रोमांचक ढंग से समाप्ति की ओर बढ़ रही है। कैप्टन अमेरिका, आयरन मैन, ब्लैक पैंथर, स्पाइडर...

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फिल्म समीक्षा: गुदगुदाती ‘टोटल धमाल’ पाक में प्रदर्शित नहीं हुई तो प्रो-पाकी उसे फ्लॉप कराने में जुटे!

पैनिक भास्कर समेत कई मीडिया संस्थानों ने ‘टोटल धमाल’ को बेहूदा फ़िल्म बताया है। उसके निम्नलिखित कारण हैं। १: राष्ट्रवादी अजय देवगन इस फ़िल्म के निर्माता हैं। २: माधुरी दीक्षित को भाजपा में लाने...

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फिल्म समीक्षा : ये गली बॉय ‘होपलेस’ है

मुझे हैरानी है कि सेंसर बोर्ड की पैनी निगाहों से ये गाना बचकर कैसे निकल गया। कल प्रदर्शित हुई फिल्म ‘गली बॉय’ का ये गाना आज के हिंदुस्तान का बखान करता है।  गीतकार ने...

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फिल्म समीक्षा: वेलेंटाइन के मौसम में ‘अलिटा’ से प्यार हो सकता है

अलिटा एक साइबोर्ग है। साइबोर्ग यानि आधा मनुष्य और आधा रोबोट। अलिटा को ‘यूगो’ से प्यार है लेकिन यूगो पैसों का लालची है। एक दिन अलिटा ‘डार्क मैटर’ से बना कृत्रिम दिल निकालकर यूगो...

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फिल्म समीक्षा : बॉक्स ऑफिस पर ‘ठाकरे’ की दहाड़ नज़रअंदाज़ नहीं की जा सकती

फ्री प्रेस के कार्टूनिस्ट केशव बाल ठाकरे को उसका संपादक कार्टून की धार कम करने के लिए कहता है। संपादक को लगता है कि केशव के धारदार कार्टून के अख़बार का नुकसान करवा रहे...

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फिल्म समीक्षा: कहने का मन करता है ‘विजयी भव कंगना’

सदाशिव ने षड्यंत्र से गंगाधर राव और मणिकर्णिका के पुत्र दामोदर को ज़हर दे दिया है। दामोदर की मौत के कुछ समय बाद गंगाधर राव की भी मृत्यु हो जाती है। पति के अंतिम...

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