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Tagged: movie review

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पारिवारिक मनोविज्ञान को दर्शाती ‘मासूम’!

Hotstar पर एक वेब सिरीज आई है, मासूम। इस सिरीज का मैसेज बहुत पावरफुल है। एक समाजशास्त्र के विद्यार्थी के नाते मैं जो हमेशा पारिवारिक रिश्तों और समाजीकरण की बात करता हूं, यह वेब...

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आंकड़ों और दावों के तिलिस्म में ‘ब्रह्मास्त्र’

अनंत विजय ।  पिछले पखवाड़े एक फिल्म आई जिसका नाम है ब्रह्मास्त्र पार्ट वन शिवा। फिल्म त्रयी की ये पहली फिल्म है। इसके निर्माता करण जौहर और अन्य हैं। इसका निर्देशन अयान मुखर्जी ने...

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कश्मीर फ़ाइल्स में नरसंहार देखने के बाद नींद उड़ गई है मेरी

दयानंद पांडेय । आज और कल दो रात ठीक से सो नहीं सका। दिन में सोने की कोशिश की। फिर नहीं सो सका। कश्मीरों पंडितों का नरसंहार सोने नहीं देता। कुछ और सोचने नहीं...

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मूवी रिव्यू: टेनेट देखकर लगा ‘चावल खाते-खाते कोई कंकड़ दांत में आकर फंस गया हो।’

निर्देशक के लिए आवश्यक था कि वह इस जटिलता को आसान कर दर्शकों को समझाता। आखिर हर दर्शक तो भौतिक विज्ञानी नहीं होता।

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movie review : संत आसाराम पर ऊँगली उठाती एक नाकाम फिल्म है आश्रम

आश्रम का पहला सीजन देखने के बाद ये कहना होगा कि प्रकाश झा ने भी वही काम किया, जो शाहरुख़ खान क्लास ऑफ़ 83 बनाकर कर गए हैं। वास्तविक घटनाओं पर लिखी कहानी में काल्पनिक चरित्र डालकर परदे पर पेश करना अब एक निकृष्ट परंपरा बनती जा रही है।

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मूवी रिव्यू: रक्तरंजित कथा के ठूंठ पर प्रेम तितली आ बैठती है

पैंसठ साल का रघुवेन्द्र सिंह ने अपनी दूसरी शादी एक जवान लड़की से रचाई है, जो उससे आधी उम्र की है। ठाकुर ने इस लड़की को ख़रीदा था। शादी की रात ही रघुवेंद्र सिंह...

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टाइटल में भगवान का नाम जोड़ दो, फिर मीडिया मुफ्त में फिल्म का प्रचार करेगा

फिल्म रिव्यू कृष्णा एंड हिज लीला इस फिल्म के साथ कृष्ण का नाम न जुड़ा होता तो ये औसत से भी कम प्रदर्शन करती। निर्देशक रविकांथ पेरेपु की फिल्म ‘कृष्णा एंड हिज लीला’ एक...

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‘रसभरी’ उनके फ़िल्मी कॅरियर की आखिरी अश्लील सलामी है

वेब सीरीज़ रिव्यू स्वरा भास्कर को आशा नहीं होगी कि उनकी नई वेब सीरीज़ ‘रसभरी’ को दर्शक उनकी सार्वजानिक छवि से जोड़ लेंगे। एक उन्मुक्त, कामुकता से भरी स्त्री की ये सार्वजनिक छवि उनकी...

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फिल्म रिव्यू : ‘गुलाबो-सिताबो’ अब्स्ट्रक्ट पेंटिंग है, जो ड्राइंगरूम में ही रखी रह जाएगी

फिल्म बनाना इश्क करने की तरह है। किसी फिल्म निर्देशक का ये इश्क दर्शक को हमेशा समझ में आ जाए, जरुरी नहीं है। कोई पेंटिंग दिल के बेहद करीब होती है लेकिन बाज़ार में...

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