Watch ISD Videos Now Listen to ISD Radio Now

Tagged: movie review

0

‘रसभरी’ उनके फ़िल्मी कॅरियर की आखिरी अश्लील सलामी है

वेब सीरीज़ रिव्यू स्वरा भास्कर को आशा नहीं होगी कि उनकी नई वेब सीरीज़ ‘रसभरी’ को दर्शक उनकी सार्वजानिक छवि से जोड़ लेंगे। एक उन्मुक्त, कामुकता से भरी स्त्री की ये सार्वजनिक छवि उनकी...

0

फिल्म रिव्यू : ‘गुलाबो-सिताबो’ अब्स्ट्रक्ट पेंटिंग है, जो ड्राइंगरूम में ही रखी रह जाएगी

फिल्म बनाना इश्क करने की तरह है। किसी फिल्म निर्देशक का ये इश्क दर्शक को हमेशा समझ में आ जाए, जरुरी नहीं है। कोई पेंटिंग दिल के बेहद करीब होती है लेकिन बाज़ार में...

0

फिल्म रिव्यू : भूत (पार्ट वन) : द हॉन्टेड शिप – विकी के अभिनय के लिए ये हादसा नहीं झेला जा सकता

हॉरर जॉनर में फिल्म बनाना बड़े जोखिम का काम है। ऐसी फिल्मों में नकारात्मकता बहुत होती है और अधिकांश सुखद अंत पर समाप्त नहीं होती। हिन्दी में बनी भूतिया फिल्मों का सफलता प्रतिशत कम...

0

Movie review : Love Aaj Kal 2: कार्तिक का अभिनय ही इस फिल्म का हासिल है!

इम्तियाज़ अली की लव आजकल : 2 पहाड़ियों से गुजरती रेल का सफ़र है। कभी रेल खुशनुमा धूप में वादियों के नज़ारें दिखाती है तो कभी बोगदों में प्रवेश करते ही मनहूस अंधेरा छा...

1

Film review: उथले पानी में तैरता है ‘Shikara’!

विधु विनोद चोपड़ा की फिल्म ‘शिकारा’ में दहशत दिखाई देती है, दहशतगर्द नहीं। गोलियां दिखाई देती हैं, बंदूक नहीं। घर जलते हैं लेकिन जलाने वाले हाथ दिखाए नहीं जाते। मानो ये दहशत बिना सिर-पैर...

0

Movie Review jawani janeman: यदि आप एक सुसंस्कृत भारतीय दर्शक हैं तो इसे देखकर कुछ समय के लिए सिनेमा से आपको अरुचि हो सकती है!

जसविंदर उर्फ़ जैज कॉलेज की परीक्षा में फेल होने का जश्न मनाने लंदन से एमस्टडर्म जाता है। वहां एक लड़की के साथ वन नाइट स्टैंड के बाद लौट आता है। कई साल बाद जैज ...

1

फिल्म समीक्षा: पति, पत्नी और वो – मनोरंजन, हास्य और सामाजिक सन्देश देती है ये फिल्म

अब फिल्म उद्योग और नियमित फ़िल्में देखने वाले दर्शक जानते हैं कि इन दिनों ‘बी टाउन’ फिल्मों का ट्रेंड चल रहा है और बड़े प्रोडक्शन हाउस अपनी बड़ी फिल्मों की लागत न निकाल पाने...

0

फिल्म समीक्षा: आशुतोष गोवारिकर के फिल्मी करियर का सबसे भद्दा अध्याय है पानीपत

जब इस फिल्म की कॉस्ट सामने आई थी, तभी अहसास हो चला था कि निर्देशक आशुतोष गोवारिकर ने अपने फिल्म करियर का सबसे भद्दा अध्याय शुरू किया है। ‘पानीपत’ को फिल्म के विद्यार्थियों के...

0

‘होटल मुंबई’ हमारे जख्मी सीनों का ऐतिहासिक दस्तावेज है

रामगोपाल वर्मा की फिल्म ‘अटैक्स ऑफ़ 26/11‘ उस आतंकी हमले पर उथले पानी में तैरती सी फिल्म थी। स्टेशन पर भारी रक्तपात और ताज होटल के प्रसंग उसमे दिखाए गए थे। लेकिन उस फिल्म...

0

फिल्म रिव्यू: फार्मूला वाली अलमारी खाली हो चुकी है – पागलपंती

सन 1998 में निर्देशक अनीस बज़्मी ने ‘प्यार तो होना ही था’ बनाकर न केवल बॉक्स ऑफिस पर बादशाहत जमाई थी, बल्कि चार फिल्म फेयर अवार्ड जीतकर अपनी श्रेष्ठता सिद्ध की थी। आज वही...

0

इन एंजल्स में वो बात नहीं – चार्लीज एंजल्स फिल्म रिव्यू

कभी न नज़र आने वाले चार्ली की तीन हसीनाओं की याद अब तक दर्शकों के जेहन से मिटी नहीं है। सन 2000 में प्रदर्शित हुई ‘चार्लीज़ एंजल्स‘ को युवा दर्शकों के लिए रिबूट किया...

0

फिल्म समीक्षा – रेव-9 से केवल बचकर भागा जा सकता है – टर्मिनेटर – डार्क फेट

पृथ्वी के भविष्य से दो प्रकार के मशीनी मानव वर्तमान में भेजे जाते हैं। भविष्य में मानवता को बचाने वाला नायक अभी नन्हा बच्चा है और उसे पहले ही मार दिया जाना है ताकि...

0

एक टाइमपास फिल्म, जो अच्छा सन्देश देती है फिल्म रिव्यू: उजड़ा चमन

गंजापन और मोटापा ऐसी बीमारियां हैं, जो जवानी में हो जाए तो बड़ी परेशानियां खड़ी हो जाती हैं। इनको फिल्म का विषय बनाना निश्चय ही साहसिक काम है। बॉक्स ऑफिस हर सप्ताह निर्ममता से...

1

फिल्म उद्योग की दीपावली बंदूक की नाल से छूटी – फिल्म रिव्यू – सांड की आंख

चंदो तोमर और प्रकाशी तोमर की निशानेबाज़ी से प्रभावित होकर अलवर की महारानी ने उनको अपने पैलेस पर एक दावत में बुलाया है। दोनों देहाती महिलाओं को ‘गेस्ट ऑफ़ ऑनर दिया जा रहा है,...

0

शोर करने वाला पटाखा है ‘हॉउसफुल : 4, ये रंग नहीं बिखेरती

बेशक फ़िल्में मनोरंजन के लिए बनाई जाती है। ये बात ‘हॉउसफुल: 4 जैसी फ़िल्में साबित करती आई हैं। एक होता है सोद्देश्य मनोरंजन और एक निरर्थक। हंसकर भूल जाने जैसा या पान खाकर थूक...

0

हर आदमी के भीतर एक ‘जोकर’ छुपा है

काल्पनिक शहर ‘गॉथम सिटी’ डीसी कॉमिक्स के पन्नों से लेकर बैटमैन की  फिल्मों में दिखाया जाता रहा है। गॉथम का समाज सुसभ्य होते हुए भी भीतरी  बीमारियों से जूझ रहा है। वह अपने अदृश्य...

0

ऋत्विक का स्टारडम ही ‘वॉर’ की यूएसपी है

मेजर कबीर लूथरा आर्मी से गद्दारी कर फरार हो गया है। कबीर को खोजने के लिए खालिद खान को जिम्मेदारी दी जाती है। स्पेशल एजेंट खालिद और कबीर के बीच एक चूहा-बिल्ली का खेल...

1

‘प्रतिशोधी रिव्यू’ के कारण आप कहीं एक नेक फिल्म देखने से वंचित न रह जाए

सत्तावन के स्वाधीनता संग्राम की भीषण आग सुलगने से ग्यारह साल पहले ब्रिटिश राज को एक छोटी सी चिंगारी ने भयभीत कर दिया था। वह चिंगारी न भड़कती तो 1857 में मंगल पाण्डे की...

0

पल पल दिल के पास रिव्यू – आंगन में लगा फल ‘अधकच्चा’ ही तोड़ लिया

धर्मेंद्र के दोनों बेटों सनी और बॉबी का बॉलीवुड पदार्पण बहुत शानदार अंदाज़ में हुआ था। सनी देओल को राहुल रवैल और बॉबी को राजकुमार संतोषी जैसे मंझे हुए निर्देशकों ने लॉन्च किया था।...

1

सेक्शन 375 मर्ज़ी या ज़बरदस्ती

सबके अपने ‘सत्य’हैं, सबके अपने ‘दृश्य’ ख्यात फिल्म निर्देशक अपनी जूनियर को घर पर शूट के लिए डिजाइन किये कपडे देखने के लिए बुलाता है। खूबसूरत मादक जूनियर को देखकर उसका मन डोल जाता...

ताजा खबर
The Latest