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Tagged: osho book

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निश्चिन्त होना हो तो अपना सर्वस्व परमात्मा को सौंप दो!

अगर तुम निश्चिंत होना चाहो,तो छोटा-सा काम है बस; जरा-सी तरकीब है;जरा-सी कला है–और कला यह है:अपने को हटा लो और परमात्मा को करने दे जो कराए।कराए तो ठीक, न कराए तो ठीक।पहुंचाए कहीं...

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‘जहां कहीं भी तुम्हारा अवधान उतरे, उसी बिंदु पर, अनुभव।’

झेन संत बोकोजू ने कहा है, मैं यही एक ध्यान जानता हूं। जब मैं भोजन करता हूं तो भोजन करता हूं। जब मैं चलता हूं तो चलता हूं। और जब मुझे नींद आती है...

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जीवन का सत्य अज्ञात है, उसे शब्दों और शास्त्रों को पढ़ कर जाना नहीं जा सकता – OSHO

मैंने सुना है, एक संध्या एक व्यक्ति, एक अजनबी गांव में एक रास्ते पर से एक मकान के सामने से गुजरता था। उस मकान का मालिक अपने घोड़े को मकान के भीतर ले जाने...

भारत एक सनातन यात्रा है, एक अमृत पथ है, जो अनंत से अनंत तक फैला हुआ है। इसलिए हमने कभी भारत का इतिहास नहीं लिखा: ओशो

Osho. पृथ्वी के इस भूभाग में मनुष्य की चेतना की पहली किरण के साथ उस सपने को देखना शुरू किया था।उस सपने की माला में कितने फूल पिरोये हैं–कितने गौतम बुद्ध,कितने महावीर,कितने कबीर,कितने नानक...

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