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Tagged: Osho

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ऋषि कहते हैं, मेरी वाणी मेरे मन में ठहर जाए!

जो हम चारों तरफ बोलते रहते हैं, वह धीरे— धीरे हमारा व्यक्तित्व बन जाता है। आपको भी बिना गवाह के पक्का नहीं हो सकता कि आप जो बोल रहे हैं वह सही है या...

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जीवन के क्षुद्रतम तथ्य भी अव्याख्य हैं। जब मैं कहता हूं जीवन अतर्क्य है, तब मैं कह रहा हूं कि जीवन अव्याख्य, इनडिफाइनेबल है।

आप उसकी व्याख्या नहीं कर सकते। जी सकते हैं, कह नहीं सकते, क्या है। और जब भी कहने जाएंगे, तो ऐसी ही गलती हो जाएगी, जैसी इस सूत्र का ऋषि कहकर पड़ गया गलती...

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यह उनका सदा का रूप था। अभी— अभी तो खूब खिल गया था, निखार आ गया था। लेकिन मुझे बचपन से याद है।

जब उनके पास बहुत सुविधा भी नहीं थी तब भी लुटाने में उन्हें रस था। उनकी जो मेरे मन में यादें हैं पुरानी—पुरानी से पुरानी यादें— लुटाने की हैं। वे कोई बहुत धनी व्यक्ति...

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ओशो के शब्दों में कैलाश का रहस्य!

कैलाश – एक अद्भुत तीर्थ दो-तीन बातें सिर्फ उल्लेख कर दूं, क्योंकि वे घटित होती हैं। जैसे कि आप कहीं भी जाकर एकांत में बैठ कर साधना करें तो बहुत कम संभावना है कि...

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श्री अरविंद को किसी ने एक बार पूछा कि आप भारत की स्‍वतंत्रता के संघर्ष की आजादी के युद्ध में अग्रणी सेनानी थे; लड़ रहे थे। फिर अचानक आप पलायनवादी कैसे हो गये

श्री अरविंद को किसी ने एक बार पूछा कि आप भारत की स्‍वतंत्रता के संघर्ष की आजादी के युद्ध में अग्रणी सेनानी थे; लड़ रहे थे। फिर अचानक आप पलायनवादी कैसे हो गये कि सब...

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दादू के चेले तो अनेक थे पर दो ही चेलों का नाम मशहूर है। एक रज्‍जब और दूसरा सुंदर।

आज आपको सुंदर कि विषय में एक घटना कहता हूं। दादू की मृत्‍यु हुई। तब दादू के दोनों चेलों ने बड़ा अजीब व्यवहार किया। रज्‍जब ने आंखे बंद कर ली और पूरे जीवन कभी...

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सांस्कृतिक पुनर्जागरण की रणभेरी कौन बजाएगा ? पंच मक्कारों को धूल कौन चटाएगा ? एक सरल रोडमैप !

आदित्य जैन। यदि किसी व्यक्ति ने आचार्य रजनीश जैन अर्थात ओशो जैसे बहुआयामी साधक से दीक्षा ली हो वह सनातनी हिन्दू के सारे कर्तव्यों का पालन करता हो गोरख की नाथ परंपरा से जुड़ा...

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मुझे निरंतर लोग कहते हैं कि हम यह चाहते हैं-शांति चाहते हैं, आनंद चाहते हैं, आत्मा चाहते हैं। 

आप तो सब चाहते हैं, लेकिन चाहने से जगत में कुछ भी नहीं मिलता है। अकेली चाह बिलकुल इंपोटेंट है, बिलकुल नपुंसक है, उसमें कोई शक्ति नहीं है। चाह के पीछे संकल्प और श्रम भी...

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दूसरी बात है सम्यक श्रम। वह भी जीवन से विच्छिन्न हो गया है, वह भी अलग हो गया है। 

श्रम एक लज्जापूर्ण कृत्य हो गया है, वह एक शर्म की बात हो गई है। पश्चिम के एक विचारक आल्वेयर कामू ने अपने एक पत्र में मजाक में लिखा है कि एक जमाना ऐसा...

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सैकड़ों साल बाद भी अपने महापुरूषों के जीवन से तुमने कुछ नहीं सीखा: ओशो

प्रश्न: भगवान,पड़ोसी देशों द्वारा किए जाने वाले शस्त्र-संग्रह और उसके कारण बढ़ रहे तनाव के संदर्भ में देश की सुरक्षा की दृष्टि से श्रीमती इंदिरा गांधी द्वारा हाल ही एक भाषण में दी गई...

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सारा जगत ओवर फ्लोइंग है, आदमी को छोड़कर। सारा जगत आगे के लिए नहीं जी रहा है, सारा जगत भीतर से जी रहा है। 

सारा जगत ओवर फ्लोइंग है, आदमी को छोड़कर। सारा जगत आगे के लिए नहीं जी रहा है, सारा जगत भीतर से जी रहा है। फूल खिल रहा है, खिलने में ही आनंद है। सूर्य निकल...

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Documentary Review :भारत की यात्रा उनके मन के बंद दरवाज़ों को खोल सकती थी

शीला जैसे लोग वह बंद द्वार हैं, जिन्हें खोलकर आज भी आप ओशो के जीवन के किसी अध्याय में प्रवेश कर सकते हैं।

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19 जनवरी : ओशो का निर्वाण दिवस! “ओशो: जो न कभी पैदा हुए, न कभी मृत हुए।”

ओशो का भौतिक शरीर 11 दिसंबर 1931 को पैदा हुआ और 19 जनवरी 1990 को इस दुनिया से विदा हुआ। लेकिन केवल शरीर के विदा होने से विदा होने वाली वह चेतना नहीं है।...

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नानक गृहस्थ भी हैं, संन्यासी भी- ओशो

नानक ने एक अनूठे धर्म को जन्म दिया है, जिसमें गृहस्थ और संन्यासी एक हैं। और वही आदमी अपने को सिख कहने का हकदार है, जो गृहस्थ होते हुए संन्यासी हो, संन्यासी होते हुए...

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सेवा धर्म नहीं है,बल्कि धर्म सेवा है: ओशो

मैं नहीं कहता हूं कि सेवा धर्म है। मैं जरूर कहता हूं कि धर्म सेवा है। अगर कोई व्यक्ति धर्म को उपलब्ध हो, तो उसके जीवन में जो भी है, वह सब सेवा बन...

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शून्य में जगत की महानतम शक्ति का आविर्भाव होता है!

ओशो – शास्त्रों और संतों का कहना है कि पर-स्त्रीगमन करने से साधक का पतन होता है और साधना में उसकी गति नहीं होती। इस मूलभूत विषय को समझने का प्रयास करें!

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जूडो की कला कहती है, मारो मत। जब कोई मारे, तो उसके सहयोगी हो जाओ!

जूडो की कला कहती है, मारो मत। जब कोई मारे, तो उसके सहयोगी हो जाओ! उसको दुश्मन मत मानो। मानो कि जैसे वह अपने ही शरीर का एक हिस्सा है। और तब थोड़ी ही...

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शिव कहते हैं, उस अस्तित्व को स्वयं में पाकर समाधि का सुख उपलब्ध होता है। OSHO

तुम्हारे भीतर से जब तुम बाहर की तरफ जाते हो तो चीजें एक दूसरे से दूर होती जाती हैं, फासला बढ़ता जाता है। इसलिए हजार तरह के विज्ञान पैदा हो गये हैं, होंगे ही;...

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बुद्ध कहते थे, बरस रहा है अमृत, लेकिन कुछ हैं, जो अपने घड़ों को उलटा रखे बैठे हैं।

जिस दिन घड़ा सीधा होगा, उस दिन अमृत बरसने लगेगा, ऐसा नहीं है। अमृत तो उस दिन भी बरस रहा था, जिस दिन आप घड़ा उलटा किए थे। वहां भी बरस रहा था, जहां कोई...

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