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Tagged: patriotic poem

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कलम आज उनकी जय बोल

जला अस्थियां बारी-बारी, चटकाई जिनमें चिंगारी,जो चढ़ गये पुण्यवेदी पर,लिए बिना गर्दन का मोल।कलम, आज उनकी जय बोल। जो अगणित लघु दीप हमारे, तूफ़ानों में एक किनारे,जल-जलाकर बुझ गए किसी दिन,मांगा नहीं स्नेह मुंह...

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तू माफी के योग्य नहीं

तूने सारी आशा तोड़ी , अब माफी के योग्य नहीं ; कानून बनाकर वापस लेता , तू इस पद के योग्य नहीं । राष्ट्र से खुद को बड़ा समझना , पागलपन का दौरा है...

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औरत का हौसला

कमलेश कमल. औरत में ख़ून की कमी हो सकती हैहौसले की नहींघर या बाहररसोई या बिस्तरकहीं वह होती नहीं कमतर छूटे अपनोंऔर टूटे सपनों से भीनहीं टूटती औरतसब कुछ झोंकघर बसाती-सजाती हैऔर तो औरघिसती...

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प्रभु जी तुम दीपक हम बाती, जाकी ज्योति बरै दिन-राती’ का वास्तविक अर्थ!

कमलेश कमल. कबीर के समकालीन ही बनारस में एक ऐसे समदर्शी संत हुए, जिनके भक्ति परक अवदान पर तो कार्य हुआ है, लेकिन बौद्धिक-चिंतन और समतामूलक समाज के स्थापन हेतु प्रयासों पर अपेक्षाकृत कम...

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स्वतंत्रता दिवस के अवसर पर देश को समर्पित कविता पाठ!

जिस स्वतंत्रता को हम सब इतनी सहजता से लेते हैं जैसे कि यह हमें विरासत में मिली हो, उसे हासिल करने के लिये कैसे कैसे बलिदान दिये गये, हम कल्पना भी नहीं कर सकते....

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