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Tagged: poetry

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मेरे द्वारा विरचित विरह-शतक से कुछ काव्य-कुसुम

कमलेश कमल. उल्लसित कंठ से करूँ अमियप्रगल्भ-प्रभा का यशोगानतुम उर्वशी, तुम उर्मिला हे प्रियतेरा सबसे गर्वित मान (74) भूल कभी सकता हूँ क्याविरह-विदग्ध विषम यह पीड़ानयनों से मिट सकती है क्यातेरे सुभ्रुवों की कन्दुक-क्रीड़ा...

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पुष्प के सुवास का पता भ्रमर को कौन देता है?

कमलेश कमल. पुष्प के सुवास का पता भ्रमर को कौन देता है? आम्र-मंजरियों का ठिकाना कोयल को कैसे मिलता है? साइबेरिया के प्रवासी पक्षी सहस्त्र-योजन दूर भरतपुर की अनुकूल पारिस्थितिकी को कैसे जान जाते...

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औरत का हौसला

कमलेश कमल. औरत में ख़ून की कमी हो सकती हैहौसले की नहींघर या बाहररसोई या बिस्तरकहीं वह होती नहीं कमतर छूटे अपनोंऔर टूटे सपनों से भीनहीं टूटती औरतसब कुछ झोंकघर बसाती-सजाती हैऔर तो औरघिसती...

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सरस्वती वंदना

कमलेश कमल. शब्द-साधना पथ का मैंएक आश भरा अन्वेषी हूँसतत चलूँ इस पथ पर मैंमाँ, मुझ को आशीष दे। सारी विद्या का कोश खराअमित ज्ञान का सिंधु धराहंस सा पग पाऊँ मैंमाँ, मुझको आशीष...

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ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहीं राष्ट्रकवि रामधारी सिंह “दिनकर” की रचना

ये नव वर्ष हमें स्वीकार नहींहै अपना ये त्यौहार नहींहै अपनी ये तो रीत नहींहै अपना ये व्यवहार नहीं धरा ठिठुरती है सर्दी सेआकाश में कोहरा गहरा हैबाग़ बाज़ारों की सरहद परसर्द हवा का...

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गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है

गरीबी पर लिखी शायरी लोगों को खूब रुलाती है, और शायर का जमीर यूं ही बंजर बना रहता है! देख लीजिए, जावेदों और गुलज़ारों का जीवन,उनकी बेगमों का दर्द और पीड़ा और उनका अभिजात...