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Tagged: sanatan hindu dharm

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नासदीय सूक्त EP-1

डॉ रजनी रमण झा । नासदीय सूक्त (ऋग्वेद, मण्डल – १०, सूक्त -२९)………………………………………..(१)नासदासीन्नो सदासीत्तदानीं नासीद्रजो नो व्योमा परो यत् । किमावरीव: कुह कस्य शर्मन्नम्भ: किमासीद् गहनं गभीरम् । अर्थ – उस (प्रलयकाल में या...

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भारतीय ज्ञान परंपरा के लोप का अधिकार शासक और शासन को नहीं है

प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज । सभी प्राणी और सभी मनुष्य अपने-अपने कर्तव्य का पालन करें। वे सब स्वधर्म में निरत रहें, इसमें राजा को व्यवधान नहीं डालना चाहिये। प्रजा को स्वधर्म में प्रवृत्त रखने...

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सनातन धर्म में 84 लाख योनियों की गणना कुछ इस तरह है!

कर्मों की योनियाँ प्रश्न :- कितने प्रकार की और कितनी योनियां हैं? उत्तर :- तीन प्रकार की योनियाँ हैं- १.कर्म योनि।२.भोग योनि।३.उभय योनि। कुल योनियाँ चौरासी लाख कही जाती है। कुल्लियात आर्य मुसाफिर में...

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वर्णसंकर का सही अर्थ जानना चाहिये, इस विषय में भारी भ्रम फैलाया गया है

प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज । सभी जातियां धर्मशास्त्र के अनुसार अलग-अलग जन (जातियाँ) कही गई हैं। इनको धर्मशास्त्रों ने वर्णसंकर नहीं कहा है। मनु ने बहुत स्पष्ट कहा है कि वर्णसंकर संतानें कुल तीन...

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अपने धर्म,कुल वंश और अस्तित्व की रक्षा के लिये ज्यादा बच्चे पैदा करे हिन्दू समाज-महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी

आज धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र में श्री जयराम विद्यापीठ आश्रम में चल रहे माँ बगलामुखी व महादेव के यज्ञ के दूसरे दिन महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी जी महाराज,कार्ष्णि स्वामी अमृतानंद जी,महन्त राजेन्द्र पूरी जी तथा अन्य...

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ब्राह्मणों और जातिप्रथा पर दुष्ट बुद्धि ईसाइयों का नियोजित आक्रमण-2

प्रो. रामेश्वर मिश्र । पंकज ब्राह्मणों से तंग आकर ईस्ट इंडिया कंपनी के भारतीय अधिकारियों ने यूरोप के अनेक पादरियों (ईसाई अध्येताओं) को ब्राह्मणों पर चोट के लिये कुछ लिखने-पढ़ने को पुरस्कृत करने की...

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महामंडलेश्वर यति नरसिंहानंद गिरी,जयराम पीठाधीश्वर ब्रह्मस्वरूप ब्रह्मचारी जी ने महायज्ञ में भाग लिया

आज धर्मक्षेत्र कुरुक्षेत्र के जयराम विद्यापीठ आश्रम में सभी सनातन धर्मावलंबियों को जगद्जननी माँ जगदम्बा व महादेव की अखण्ड भक्ति की प्राप्ति,सद्बुद्धि की प्राप्ति, सनातन धर्म की रक्षा, सनातन धर्म के मानने वालों के...

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कुल, गोत्र एवं प्रवर

प्रो. रामेश्वर मिश्र पंकज । श्रीमद्भगवद् गीता में कुलों के धर्मों को शाश्वत कहा है। इस प्रकार परमज्ञान और आत्मज्ञान की दृष्टि से जहां व्यक्ति इकाई है, वहीं शेष समस्त सामाजिक व्यवहार के लिये...

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आज जो प्रयास करें तो आने वाले 10 हजार वर्ष तक क्या कलयुग में सतयुग जैसी व्यवस्था स्थापित किया जा सकता है

दीपक कुमार द्विवेदी । हम लोग सृष्टि उत्पत्ति के विषय बहुत हद तक समझ चुके हैं प्रलय कैसे होता है यह भी समझते होंगे सृष्टि आयु कितनी होती है यह भी हम लोग समझते...

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भ्रामित मनुष्य

सारा कुमारी । मनुष्य को प्राणी वर्ग में सर्वश्रेष्ठ प्राणी का दर्जा दिया गया है, क्यूंकि ईश्वर ने व्यक्ति को सोचने समझने के लिए एक दिमाग़ भी दिया है, जिससे हम सही गलत का...

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आस्था के महापर्व छठ का लोक-माहात्म्य

कमलेश कमल सनातन-संस्कृति में ‘धर्म’ का प्रमुख स्थान है, परंतु बड़ी बात है कि यहाँ धर्म ‘लोक’ और ‘उत्सव’ से परिचालित होता है। साथ ही, यहाँ के पर्व-त्योहारों के मूल में ‘प्रकृति के साथ...

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योगिनी -एक योद्धा ( भाग-2)

डॉ विनीता अवस्थी.अब अचानक ही गर्दन पर भारी हाथ की पकड़ आभास हुई अगले ही क्षण वह घोड़े से नीचे गिर गई अपितु एक ही क्षण में संभल कर उठ खड़ी हुई परंतु अब...

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वाणी और उसके प्रकार

वाणी चार प्रकार कि होती है यथा परा, पश्यंती, मध्यमा और वैखरी. परा वाणी अश्रव्नीय, अननुमेय,अप्रतर्क्य तथा अदृश्य है. यह वाणी का मूल रूप है और आत्मा के साथ एक रूप है.जब श्रृष्टि  का आविर्भाव...

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धर्म के लिए जब विष्णु ने शिव से अपने ही एक अवतार का वध करवा दिया !

वरं प्राणपरित्याग: शिरसो वाथ कर्तनम्।न तु धर्मपरित्यागो लोके वेदे च गर्हित:।। अर्थात्:- भले ही शीश कट जाए अथवा प्राण चले जाएं, यह सौ गुना अच्छी स्थिति है, तथापि लोक तथा वेद में वर्णित धर्म...

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योगिनी -एक योद्धा

डॉ विनीता अवस्थी. घोड़ों की टापो की आवाज पास आती जा रही थी कम से कम 8-10 खूंखार विशालकाय देह घुड़सवार, विभिन्न आयुद्धों से सुसज्जित -तीर कमान, नुकीले भाले, खड़ग, हस्त नख तथा हाथों...

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मंत्र के अभ्यास से मिलती है मन से मुक्ति!

आप नियमित ओंकार मंत्र का जाप (अभ्यास) कीजिए। यह मन से मुक्ति की आपकी यात्रा को प्रशस्त करेगा। मैं यह स्वयं के अनुभव से बता रहा हूं। एक समय ऐसा आएगा कि आपके अंदर...

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सनातन धर्म के अष्ट चिरंजीवी!

कालक्रमानुसार भारत के सप्त चिरंजीवियों के नाम इस प्रकार हैं:- राजा बलि, भगवान परशुरामजी, हनुमानजी, विभीषण, महर्षि वेदव्यासजी, कृपाचार्यजी और अश्वत्थामा। इन सप्त चिरंजीवी के साथ आठवें चिरंजीवी के रूप में ऋषि मार्कण्डेय का...

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पुष्कर तीर्थ का वास्तविक इतिहास

ईरान में बुखारा नामक स्थान पर एक व्यक्ति का जन्म हुआ जिसका नाम ब्रह्मा पड़ा, क्योंकि उसने ब्रह्मवाद का प्रतिपादन किया। यह बुखारा नाम मूलतः पुष्कर था‌। अपभ्रंश होते-होते वही पुष्कर शब्द क्रमशः पुकर,...

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वैदिक काल गणना, सृष्टि की उत्पत्ति और आधुनिक विज्ञान!

दीपक कुमार द्विवेदी. वैदिक काल गणना और सृष्टि के उत्पत्ति के आधुनिक और वैदिक सिद्धान्त में क्या अंतर है मैं जिस विषय पर बात करने जा रहा हू उसे आज के आधुनिक विज्ञान भी...

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