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Tagged: sanatan sanskriti

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आगम और निगम की व्याख्या !

तंत्र शास्त्र उपयोगी भी, विज्ञान सम्मत भी भारतीय अध्यात्म का गौरवशाली साहित्य दो भागों में विभक्त है-’आगम’ और ‘निगम’।सामान्यतया आगम तंत्र के लिए और निगम वेदों के लिए प्रयुक्त होता है। वेदों की महत्ता...

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1000 वर्ष प्राचीन श्री मनकामेश्वर शिव मंदिर !

डॉ विनीता अवस्थी। सावन के पवित्र महीने में महादेव अपने भक्तों को, आशीर्वाद, स्नेह व प्रेम से ओतप्रोत तो करते ही हैं अपितु आप वर्ष में किसी भी समय चले जाएं उनके दर्शन आपको...

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श्रीलंका -बौद्ध मत एक सनातन सिद्धांत एक बौद्ध भिक्षु से भेंट !

डॉ विनीता अवस्थी। दिल्ली एयरपोर्ट पर जम्मू जाने वाली उड़ान की बोर्डिंग प्रारंभ हो गई थी। एक लंबी पंक्ति देख हम थोड़ा ठहर गए, जहां हम बैठे थे वहां एक परिवार अनुपम श्वेत वस्त्रों...

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हरेला का त्यौहार

विपिन त्रिपाठी। श्रावण मास में उत्तराखंड में “हरेला का त्यौहार” बहुत धूमधाम से मनाया जाता  है। मैं इस बार हरेले के समय  हल्द्वानी में था। वहां पर परिवार के सदस्यों के साथ इस त्यौहार...

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आइए जानते हैं “लखबरिया गुफाओं” और “द्वापर युग” के शिवलिंग का इतिहास

डॉ पंकज शर्मा (बुढ़ार) मध्यप्रदेश। मैकल पर्वत की तराई क्षेत्र में मध्यप्रदेश के शहडोल जिला मुख्यालय से करीब 45 किलोमीटर दूर बुढ़ार तहसील के दक्षिण में ग्राम लखबरिया है। जहां प्राचीन लखबरिया गुफाएं हैं,इस...

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श्री बड़ी काली जी का मंदिर

डॉ विनीता अवस्थी। ” मां काली का अद्भुत स्वरूप” लखनऊ की चौक की सड़कें भी आपको कभी कभी गलियों का आभास कराती हैं, पुराने लखनऊ की गहमागहमी वाली सड़कों पर गाड़ी को पार कराना...

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केले का पत्ता और भगवान श्रीराम व हनुमान!

श्वेता पुरोहित। जब रावण की सेना को हराकर और सीता जी को लेकर श्री रामचंद्र जी वापस अयोध्या पहुँचे तो वहाँ उस खुशी में एक बड़े भोज का आयोजन हुआ। वानरसेना के सभी लोग...

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क्यों समझ से बाहर है “स्त्री” ?

श्वेता पुरोहित : त्रियाचरित्रम् अर्थात तीन प्रकार के चरित्र !१ – सात्विक २- राजसिक ३- तामसिक ब्रह्माण्ड का सञ्चालन सुचारु रूप से चलाने के लिये उन्होंने तीन प्राकृतिक गुणों की रचना की जो सत्व,...

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यमाष्टक – यमराज का अपने दूत के प्रति उपदेश !

श्वेता पुरोहित। श्रीव्यास जी बोले – अपने किंकर को हाथ में पाश लिये कहीं जाने को उद्यत देखकर यमराज उसके कान में कहते हैं—“दूत! तुम भगवान् मधुसूदन की शरण में गये हुए प्राणियों को...

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भगवान का रूप इतना सुन्दर क्यों होता है ?

राजकुमार अशोक मिश्रा । ऐसा माना जाता है कि सभी दिव्य गुणों और भूषणों—मुकुट, किरीट, कुण्डल आदि ने युग-युगान्तर, कल्प-कल्पान्तर तक तपस्या कर भगवान को प्रसन्न किया। भगवान बोले—‘वर मांगो।’ गुणों और आभूषणों ने...

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मंदसौर निवासी शेख जफर कुरैशी ने स्वामी चिदम्बरानन्द सरस्वती जी की के समक्ष सनातन धर्म में घर वापसी की।

घर वापसी से पहले मुझसे जफर जी की बात हुई थी। उनसे मेरी पहचान भाई विशाल शर्मा ने कराई थी। जफर ने बताया था कि किस तरह से सनातन धर्म के प्रति बचपन से...

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भगवान नरसिंह देव के प्रकटीकरण दिवस पर जानिए कि उन्होंने कहां मारा था हिरण्यकशिपु को! और वो स्थान आज कहां है?

भगवान विष्णु के चतुर्थ अवतार भगवान नरसिंह देव के प्रकटोत्सव पर सभी सनातनियों को ढेर सारी शुभकामनाएं। भगवान नरसिंह ने वैशाख माह के शुक्लपक्ष की चतुर्दशी तिथि पर प्रकट होकर भक्त प्रह्लाद की रक्षा...

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ज्ञानवापी तीर्थ का स्कंद पुराण के काशी खण्ड पूर्वार्ध में वर्णन !

श्वेता पुरोहित। ईशानके द्वारा ज्ञानोद (ज्ञानवापी) तीर्थका प्राकट्य, ज्ञानवापी की महिमाके प्रसंगमें सुशीला (कलावती)-की कथा, काशीके विविध तीर्थोका वर्णन विविध तीर्थों का वर्णन अगस्त्यजी बोले-स्कन्द! अब आप ज्ञानोद सहर तीर्थका माहात्म्य बतलाइये, क्योंकि स्वर्गवासी...

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जिसे अपना इतिहास नहीं पता वह कुलटा-पुत्र के समान है!

स्वजातिपूर्वजानां तु यो न जानाति संभवम्।स भवेत् पुंश्चलीपुत्र सदृश: पितृवेदक।। अर्थात्:- जो व्यक्ति अपने पूर्वजों के इतिहास से अनभिज्ञ है, वह उस कुलटा-पुत्र (पुंश्चलीपुत्र) के समान है, जो यह नहीं जानता कि उसके पिता...

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सनातन और पश्चिम की दो राहों में फंसा पति – पत्नी संबंध

आदित्य जैन । सनातन परम्परा में पत्नी को जीवन संगिनी ( संपूर्ण जीवन संग रहने वाली ) , भार्या ( भार को वहन करने वाली ) , धर्म पत्नी ( कर्तव्य का बोध कराने...

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भगवान श्रीकृष्ण ने गीता में यह क्यों कहा, स्वधर्मे निधन श्रेय: परधर्मो भयावह:।

जब तक हिंदुओं का अपने धर्म पर अटल विश्वास था, धर्म पग-पग पर उनकी रक्षा करता था। जब से हिंदुओं का धर्म-बंधन शिथिल हुआ धर्म ने उसका साथ छोड़ दिया। और यह धर्म-बंधन शिथिल...

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वर्ष प्रतिपदा

हेमंत शर्मा । चैत्र प्रतिपदा, यानी गुड़ी पड़वा, अपना न्यू ईयर, नवीनता का पर्व। हम यह मानते हैं कि दुनिया इसी रोज बनी थी। यह हमारा नया साल है, लेकिन अपना यह नववर्ष रात...

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भारतीय दर्शन और संस्कृति की सनातन परम्परा को पुनर्जीवन दे रहे हैं प्रो. ऋषिकांत पाण्डेय

आदित्य जैन । वर्तमान समय में भारत के विश्वविद्यालयों में ऐसे शिक्षक दुर्लभ हैं जो अपने विद्यार्थियों से असीम प्रेम करते हो , अपने विषय के प्रकांड विद्वान हो तथा भारतीय दर्शन और संस्कृति...

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