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कांग्रेस की नीति हमेशा से ही अदूरदर्शी और मुस्लिम तुष्टिकरण की रही है!

जिस प्रकार देश की राजनीतिक दशा और दिशा नई करवट ले रही है उसे देखते हुए कांग्रेस की राह और भी मुश्किल दिख रही है। ऐसे हालात में अगर कांग्रेस पार्टी किसी क्षेत्रीय पार्टी की पिछलग्गू बन जाए तो इसमें कोई आश्चर्य की बात नहीं। वैसे भी कांग्रेस को पिछलग्गू बनना उसे विरासत में मिल हुई है। कोई आंदोलन हो या अभियान या फिर किसी प्रकार की योजनाएं ही क्यों न हो कांग्रेस हमेशा से ही दूसरों का ही अपनाती रही है।

मुख्य बिंदु:

* राजनीतिक दशा को देखते हुए किसी क्षेत्रीय पार्टी की पिछलग्गू भी बन सकती है कांग्रेस!
* किसी आंदोलन और अभियान का पिछलग्गू बनना कांग्रेस को विरासत में मिली है!
* बाबा साहब भीमराव आंबडेकर ने तो गांधी की कुछ नीतियों को अदूरदर्शी बताया था!

कांग्रेस पार्टी का इतिहास ही कुछ ऐसा रहा है। इस बात का उल्लेख स्वयं बाबा साहब भीमराव आंबेडकर ने अपनी किताब ‘Pakistan or partisan of India’ यानि ‘पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन’ में किया है। आंबेडकर ने तो अपनी इस किताब में कांग्रेस के पुरोधा महात्मा गांधी के नेतृत्व और उनकी नीति को अदूरदर्शी करार दिया है। खासकर दलित और मुस्लिम समुदायों के प्रति उनकी सोच को लेकर। ।

अपनी इस किताब में आंबेडकर ने कई ऐसे उदाहरण देकर अपनी कही हुई बातों को साबित भी किया है। उन्होंने लिखा है कि स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान गांधी जी के नेतृत्व में लिया गया फैसला भविष्य के लिए अदूरदर्शी साबित हुआ है। उदाहरण के तौर पर उन्होंने लिखा है कि टर्की के राजा (खलीफा) के पदच्यूत किए जाने के विरोध में भारतीय मुस्लिम समुदायों द्वारा शुरू किया गया खिलाफत आंदोलन का समर्थन करना एसा ही एक अदूरदर्शी निर्णय था।

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गांधी की अदूरदर्शिया ये रही कि उन्होंने हिंदू-मुस्लिम एकता के लिए इस आंदोलन का नेतृत्व किया। जबकि उस देश के मुस्लिम समुदाय स्वयं ही अपने सुल्तान का समर्थन नहीं करना चाहते थे। क्योंकि वहां के मुसलमान जनतंत्र के समर्थक थे। इस आंदोलन की असलियत सामने आने के बाद बहुत सारे हिंदुओं ने भी खिलाफत आंदोलन से हाथ खींचना शुरू कर दिया। आंदोलन को असफल होते देखकर ही गांधी ने असहयोग आंदोलन की नीव रखी।
आंबेडकर ने अपनी किताब में स्पष्ट लिखा है कि गांधी का असहयोग आंदोलन का चलाना खिलाफत आंदोलन का समर्थन करना ज्यादा था बनिस्पत स्वराज प्राप्ति के पहले लक्ष्य। इस प्रकार गांधी का असहयोग आंदोलन का दूसरा लक्ष्य था स्वराज प्राप्ति जबकि पहला लक्ष्य तो खिलाफत आंदोलन को सफल बनाना था।

ठीक उसी तरह जिस प्रकार आज कांग्रेस का दलितों का समर्थन करना तो महज दिखावा भर है उसका मूल लक्ष्य तो भाजपा के खेमे में जा चुके दलितों को बदनाम करना और उसी बहाने सामाजिक सौहार्द को बिगाड़ना।

डॉ. बीआर आंबेडकर की किताब ‘पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन’से !

URL: The Congress policy has always been short-sighted and Muslim appeasement!

Keywords: Dr BR Ambedkar, hindu Muslims, anti hindu congress, Ambedkar books, congress policy, Mahatma Gandhi
Partition of India, पाकिस्तान अथवा भारत का विभाजन, भीमराव आंबेडकर,

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