पीडी पत्रकारों के माध्यम से राफेल सौदे पर झूठ फैलाना बंद करे कांग्रेस!



Posted On: October 29, 2018 in Category:
Rafale Deal (File Photo)
ISD Bureau
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सीबीआई को पिंजड़े का तोता का खिताब दिलाने वाली कांग्रेस अपनी राजनीतिक रोटी सेंकने के लिए उसे और बदनाम करने पर तुल गई है। अपने पीडी पत्रकारों के माध्यम से बलात छुट्टी पर भेजे गए सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा के कंधे पूर बंदूक रखकर राफेल डील पर भ्रांतियां फैलाने में जुट गई है। राफेल डील मामले और सीबीआई की अंदरुनी जानकारी को लेकर कांग्रेस के नेता खासकर राहुल गांधी इतने सारे झूठ बोल चुके हैं कि सरकार को राष्ट्रीय सुरक्षा की गोपनीयता भंग करने के आरोप में उनके खिलाफ कार्रवाई करनी चाहिए। यह महज सरकार का नहीं बल्कि राष्ट्रीय सुरक्षा की गोपनीयता का मामला है।

मुख्य बिंदु

* सूत्रों के हवाले से सीबीआई और राफेल डील पर झूठ और भ्रांतियां फैला रही है कांग्रेस

* कैसे कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी सीबीआई की गोपणीय सूचना लीक करते रहे हैं

गौरतलब है कि कांग्रेस और राहुल गांधी सीबीआई के आंतरिक कलह को राफेल डील से जोड़कर नया झूठ फैलाना शुरू कर दिया है। अव्वल तो कांग्रेस बलात छुट्टी को पद से हटाना बताकर नई भ्रांति फैला रही है। कांग्रेस द्वारा संचालित नेशनल हेराल्ड में एक स्टोरी प्लांट की गई है कि आलोक वर्मा ने राफेल डील की गोपनीय फाइल भेजने के लिए रक्षा सचिव संजीव मिश्रा को पत्र लिखा था। देश के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकार अजीत डोवाल ने व्यक्तिगत रूप से मिलकर उन्हें यह पत्र वापस लेने को कहा। वर्मा के इनकार करने पर उन्हें पद से हटा दिया गया।

यह नैरेटिव सीबीआई से लेकर मोदी सरकार को राफेल डील पर बदनाम करने का प्रयास है। क्योंकि राफेल डील का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंच चुका है। इस मामले में आलोक वर्मा को लिखे पत्र के आधार पर प्रशांत भूषण और अरुण शौरी ने कोर्ट में अर्जी दी थी। इस अर्जी पर सुप्रीम कोर्ट ने साफ-साफ कह दिया है कि वह राफेल डील की नहीं बल्कि उसकी प्रक्रिया को देखेंगे। अगर प्रक्रिया सही हुई तो फिर मामला वहीं खत्म हो जाता है। ध्यान रहे कि सुप्रीम कोर्ट ने यह आदेश भी एटॉर्नी जनरल से सहमति लेने के बाद ही दिया था। सुनवाई के दौरान एटॉर्नी जनरल ने देश की सुरक्षा की गोपनीयता का हवाला देते हुए दस्तावेज उपलब्ध कराने में पहले ही असमर्थता जता चुके हैं।

ध्यान रहे कि प्रशांत भूषण और शौरी ने आलोक वर्मा को सौंपे पत्र के आधार पर सुप्रीम कोर्ट में अर्जी दी थी। ऐसे में सवाल उठता है कि सीबीआई निदेशक आलोक वर्मा कैसे एक निजी शिकायत के आधार पर रक्षा सचिव को राफेल डील की गोपनीय फाइल मंगवाने के लिए पत्र लिख सकते हैं? अगर यह सच भी है तो इससे साफ हो जाता है कि आलोक वर्मा कांग्रेस के हाथों खेल रहे थे। इससे स्वत: ही दूसरा सवाल उठ खड़ा होता है, कि आखिर कांग्रेस और आलोक वर्मा के बीच में सरकार को बदनाम करने के लिए क्या डील हुई थी? कांग्रेस को ऐसे में पहले इसका खुलासा करना चाहिए।

राफेल डील को लेकर कांग्रेस जितनी हड़बड़ी दिखा रही है वह अपने ही जाल में फंसती जा रही है। अब तो सीबीआई को भी लपेटे में ले लिया है। यह मामला अपने आप में गंभीर है क्योंकि यह राष्ट्रीय सुरक्षा की गोपनीयता से खिलवाड़ से संबंधित है। इसलिए विरोधी पार्टी होने के नाते आरोप लगा कर बज नहीं सकती कांग्रेस।

URL: Congress stop spreading lies on the Rafal deal through paid journalists

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