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सबूत के साथ उजागर हुए मिशनरीज ऑफ चैरिटी के काले कारनामे!

मानव सेवा के नाम पर मानवीयता का सौदा करने वाली रांची के मिशनरीज ऑफ चैरिटी के सारे काले कारनामे लोगों के सामने आने लगे हैं वह भी पूरे सबूत के साथ। इससे साफ है कि क्रिश्चनिटी से जुड़ी यह संस्था न तो मानव की सेवा में लगी थी न ही वह मानवता की रक्षा कर रही थी। यह तो सेवा के नाम पर मानवता का सौदा करने में जुटी थी। तभी तो मां बनने के लिए शरण में आने वालों की या तो पूरी दुनिया उजाड़ देती या छीन लेती थी। उसे उसके बच्चों से ही दूर कर देती थी। उसके अभिभावकों से हलफनामा लेकर उसके बच्चों पर पहले ही अपना अधिकार जमा लेती थी। तभी मिशनरीज ऑफ चैरिटी से संबंधित ‘निर्मल हृदय’ होम का नाम अब मानव तस्करी से जुड़ता दिख रहा है। उसके इस कारनामें को इंडिया टुडे ग्रुप ने पूरे सबूत के साथ उजागर कर दिया है। मदर टेरेसा द्वारा स्थापित मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम मानवता की पूजा नहीं करता बल्कि मासूम बच्चों का सैदा करते आ रही है।

मुख्य बिंदु

* नाम ‘निर्मल हृदय’, लेकिन काम कठोरता और निष्ठुरता का

* अभिभावकों से हलफनामे लेकर बच्चों पर पा लेता था अधिकार

* अभिभावकों के हलफनामे ही उस संस्था के खिलाफ है मजबूत सबूत

मिशनरीज ऑफ चैरिटी के ‘निर्मल हृदय’ होम से बच्चे बेचे जाने के संदर्भ में नित नए चौंकाने वाले तथ्य सामने आ रहे हैं। इंडिया टुडे समूह को मिले सबूत के आधार पर कहा जा सकता है कि यह होम मानवीय संवेदनाओं के साथ खिलवाड़ करने वाली संस्था बन गया है। आरोप है कि यहां जो महिलाएं अपने बच्चे को जन्म देने के लिए भर्ती होती थी, उसके अभिभावकों से उसके बच्चे का हक छीन लेने का हलफनामा ले लेती थी। बच्चा-जच्चा के स्वास्थ्य के प्रति उसकी लापरवाही का अंदाजा इसी से लगा सकते हैं कि हलफनामें में किसी अनहोनी की जिम्मेवारी अभिभावक की होने की बात लिखी होती थी। ये सब इसलिए कराए जाते थे ताकि कानूनी संरक्षण की आड़ में सारे गलत काम किया जा सके।

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जबकि इस प्रकार का कोई हलफनामा लेना ही अपने आप में गैरकानूनी है। लेकिन मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम यह करता था, ताकि यहां आने वाले कम से कम डरे रहें और वह आगे बढ़कर उनके खिलाफ कोई शिकायत न करें। रांची की समाज कल्याण अधिकारी कंचन सिंह ने इस प्रकार के किसी हलफनामे को ही अवैध बताया। अब सवाल उठता है कि इतने दिनों तक इस संस्था पर कार्रवाई क्यों नहीं हुई?

मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम बच्चा जन्म देने के लिए आने वाली महिलाओं के अभिभावकों से जो हलफनामा लिखाता था वह इस प्रकार का होता था। “मैं श्री/सुश्री/श्रीमति….अपनी बेटी/बहन/भतीजी/रिश्तेदार…को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सिस्टरों के संरक्षण में कुछ दिनों के लिए उसके डिलीवरी (प्रसव) तक रखना चाहता/चाहती हूं. क्योंकि मेरी बेटी/बहन/भतीजी/रिश्तेदार शादी से पहले ही किसी लड़के के साथ गलत कर गर्भवती हो गई। अतः वह अपनी मर्जी से बच्चे को मिशनरीज ऑफ चैरिटी की सिस्टरों को सदा के लिए सौंप देना चाहती है। हमें भी बच्चा नहीं चाहिए। प्रसव के बाद हम अपनी बेटी/बहन/भतीजी/रिश्तेदार को घर वापस ले जाएंगे। इसके अलावा यह भी लिखा होता है कि अगर अगर प्रसव या ऑपरेशन के समय मेरी बेटी/बहन/भतीजी/रिश्तेदार के जान पर खतरा हो तो उसकी कोई जिम्मेदारी सिस्टर्स पर नहीं होगी, पर मेरी खुद की होगी।

साफ है कि इस प्रकार का हलफनामा ही उस होम में चल रही अनियमितता की पोल खोलने के लिए पर्याप्त है। इसके साथ ही यह हलफनामा ही उस होम के खिलाफ सबसे बड़ा सबूत है। मालूम हो कि बच्चे बेचे जाने के आरोप में इस मिशनरीज ऑफ चैरिटी होम की दो सिस्टरों को पुलिस पहले ही गिरफ्तार कर चुकी है। पुलिस से पूछताछ के दौरान चार बच्चों को बेचने की बात भी उन्होंने कबूल कर ली है।

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URL: The exploits of the Missionaries of Charity exposed with evidence

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