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पसमांदा के नाम पर खेल!

दिनेश डेका। फायाज जानते हुए भी कि यद्दपि उसका पासमान्दा गुट धर्म की विॺय में जुलुम का शिकार है फिर भी घर वापसी के लिये कोशिश नहीं कर रहा है और पासमान्दा को उसी रुप में बरकरार रखने के लिये कोशिश कर रहा है৷ इस से समझ आता है कि फायाज को साम्प्रदायिकता जिन्दा रखके मोदी का वोट बेंक दुर्बलता का फायदा भरपूर रूप से उठाने का कायदा लगा रहा है৷

पासमान्दा घर वापसी करता तो भारत का रुप और स्थिति दोनों सुन्दर हो जाता৷ लेकिन फायाज जैसा लोग यह नहीं चाहता है और मोदी लोभ के कारण उस आग पर घी डाल रहा है৷ हिन्दुवों को इन दोनो की बातों में बिलकुल बिलकुल नहीं आना चाहिये ৷ ये सुविधावादी लोग है৷ और सुविधावादी को गले लगाना मतलब खुद फांसी का फान्दा अपना गले में डालना৷ हटाईये इन सबको और मोदीको भी नहीं तो हिन्दु १९५० के भीतर दुनिया से गायब हो जायेगा৷

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बहुत दुख से मोदी का विरुद्ध लिखने के लिये मोदी ही खुद बाध्य कर रहे है৷ क्यों भाई मोदी, घर वापसी में आपका क्या प्रब्लेम है? ये पासमान्दा लोग मोगलों का समय का बलि और उपेक्षित है, आज का नहीं৷ ये लोग आज का पासमान्दा ही रह जायेंगे शायद हजारों साल तक (अगर तब तक हिन्दु धर्म रहे तो) अगर इस नीति से चलते रहे तो৷ फायाज और मोदी क्यों इस घर वापसी विॺय में चुप है? वही अंग्रेज का नीतिः Divide and Rule है ना?

मिस्टर मोदी आज का भारतीय इतना मूर्ख नहीं रहें৷ याद रखना৷ कोई भी हिन्दु भारतीय मुसलमान को घृणा नहीं करता, तकलीफ नहीं देता है; लेकिन उनके साथ एक होकर रहना चाहते है उनका पूर्व का हिन्दु रूप में৷ और इसके लिये घर वापसी ही एकमात्र विकल्प है৷ यह बात जानते तो खूब हो৷ यह गंदा सोच है क्या? यह सोचना या बोलना प्रधानमंत्री को मना है क्या? धर्म और मजहब को जिंदा रखके लड़वाते रहने नाम सेकुलार है क्या? नहीं है৷ तो फिर चुप क्यों हो?

हिन्दु को मुसलमान बनना सही नहीं है क्योंकि हिन्दु ही दुनिया का एकमात्र प्राकृतिक रूप से गठित प्राचीनतम धर्म है; इसलाम, इसाई, जैन, सिख, बौद्ध आदि सारे किसी एक दो का सृष्ट फिक्स्ड (fixed) मजहब है जो कभी भी धरम नहीं बन सकता क्योंकि इनको कोई भी बदलाव स्वीकार नहीं है (कभी अगर स्वीकार हो भी गया तो भी यह धरम नहीं बन पायेगा कारण धरम कोई एक दो से नहीं बनता, धरम मनुष्य समाज का चिंता, स्थिति, गति और समय का निरन्तर प्रभाव से अपने आप उभर आता है और इसीलिये हमेशा गतिमान रहता है; समय का साथ चलकर बदलता रहता है मूल विचार को आगे बढ़ाते हुए)৷

दुसरी ओर, मुसलमान आक्रांतवों का शिकार आज का इन भारतीयों (पासमान्दा या और भी) का क्या अपराध है कि वे अपना पुराना अभिशाप से मुक्त नहीं हो सकें, और दुख भरा कहानी से बाहर आ नहीं पायें৷ कभी इनको अपना जख्म से छुटकारा नहीं मिल सकें? प्रधानमंत्री को इस गहरी विॺय पर चिंता / काम करना मना है क्या? सरकारी सहायता इनके लिये जरुरी नहीं है क्या? आर्थिक सुविधा ही काफी है क्या? इनका इतना बड़ा हिन्दु जनता से हमेशा लड़-झगड़के रहना, दुनिया का जितना बुरा काम है उनमें लगे रहना सही काम है क्या? कोरान इनका हाथ में पकड़ा देना प्रधानमंत्री का डिउटी है क्या? इन को शिक्षा और पैसा देने से ही प्रधानमंत्री का दायित्व खतम हो जाता है क्या? …

मोदी, यह कुटिल नीति “सब का . . . “ इनको इस ग्लानि से नहीं बचा पायेगा৷ इन भारतीय को सम्मान और सौहार्द से जीने अवकाश नहीं देगा৷ जो मोगलों का अत्याचार से बच गया वे लोग इनका अपना भाई बहन है৷ फिर भी ७४ साल का राजनीति इन्हे ऐसा बनाके रखा कि ये हिन्दुवोंको पराया/शत्रु समझता रह गया৷ कोई स्नेह यात्रा कुछ भी परिवर्तन नहीं ला पायेगा৷ वह पुराना जख्म के बढ़ता दरद से राहत नहीं दे पायेगा৷ उल्टा हिन्दु गुस्सा हो जायेगा तृप्तिकरण का गलत नीति के कारण৷ नतीजा?

इन्हे पुनः अपना पुराणी धरम में वापस आना ही एकमात्र और सबसे उत्तम उपाय नहीं है क्या? मोदी, इसमें तृप्तिकरण का लोभ दिखाके बाधा दे रहे हो৷ हिन्दुवोंने विश्वास करके चुना था — कुछ अच्छा करेगा৷ जिसका धरम से मजहबीकरण हुआ था उनको पुनः पूर्व स्थिति में लाने से हिन्दु नाराज होगा क्या? वे लोग नाराज होंगे क्या৷ सब जानता असली समाधान क्या है৷ उस समाधान को सब मानेगा सिवाय मुस्तिमेय कुछ मजहब व्यापारी को छोड़ कर৷ इतना सुन्दर काम से क्यों दूर भाग रहे हो मोदी? यह सबसे जरुरी और अच्छा काम है सारे भारतीयों के लिये৷ भारत शांति, समृद्धि का प्रतीक बन जायेगा৷ सस्ता राजनीति में मग्न हो गये — फल क्या होगा? दुखी पासमान्दा आदि दुखी ही रह जायेगा और सुखी हिन्दु भी दुखी बन जायेगा (अनेक हो भी गया)৷

मिस्टर फायाज, मोदी का गलती / कुटिलता का फायदा उठाने का निकृष्ट भावना को छोड़ो और खुद घर वापसी आन्दोलन में जी जान लगाके काम करना आरंभ कर दो৷ जो दूरदृष्टि रखता है वही सही ढंग से सफल होता है৷ तुम्हारा घर वापसी का कोशिश सफल होगा क्योंकि यह अतीत, वर्तमान और भविष्य तीनों को जोड़ता है৷ सारा पासमान्दा तथा सारा भारत, बल्कि सारी दुनिया तुम्हें नतमस्तक होके नमन करेंगे क्योंकि इसमें सब का / दुनिया का भलाई है, सिर्फ एक वर्ग / एक देश का नहीं৷ एकता लाओ घर वापसी के जरिये, हर हिन्दु तुम्हें आदर पूर्वक अपना गोद में बैठायेंगे৷ संकीर्णता छोड़ कर सही रास्ते आ जाओ৷

अच्छा, गभीर मन से सोचोतो फायाजः तुम्हारा नाम फायाज होता था क्या अगर तुम्हारा कोई पूर्वज किसी बदमाश का शिकार नहीं होता तो? फिर देर किस बात कि? अपना नाम, टाइटल अभी का अभी बदलकर कोई पसंदीदा सनातनी नाम ले लो सरकार को संज्ञान में रख कर और बन जाओ अपना दादा नानी की सुसन्तान৷ हिन्दु बनने के लिये कोई नियम मेरी जानकारी में नहीं है৷ समाज को बोल दो मैं हिन्दु बन गया৷ बस इतना ही काफी है৷ देश का हालत बदलना बहुत बहुत जरुरी है৷ औरों को बदलने के लिये पहले खुद को बदलना पड़ता है৷ तो बदलो৷ भारत एक पुण्यभूमि है৷ यंहा जनम लिये हो तो कुछ पुण्य काम करो क्योंकि भारत को इस दिशा में सिर्फ तुमही लोग पूरी तरह से बदल सकोगे৷ हिन्दु कोशिश कर रहा है৷ लेकिन यह गिलहरी कोशिश है৷ असली वीर तुमलोग हो सकते हो৷ किसीने तुम्हें बदला था जबरदस्ती, अब तुमलोग अपना खुशी से बदलो৷

लेकिन हा, तुम्हारा ही कोई विरोध करेंगे৷ उन उनकेा भी बदल देना৷ तुम तो दिमाग का तेज, संकल्प का दृढ़ हो৷ तुम्हें सिर्फ शुद्ध रास्ता पकड़ना है৷ सफलता तुम्हारा कदम चुमेगी৷ आंखें खोलो, आगे बढ़ो৷ (मै करीब ८० साल का बुढ़ा हुं इसलिये सबको ’तुम’ या ’तु’ बोलना पसंद करता हुं क्योंकि इनमें जो आत्मीयता है वह ’आप’ में नहीं है৷)

मोदी तो पहला नम्बर में व्यापारी है, दुसरा नम्बर में कमविद्या राजनीतिविद / कूटनीतिविद है और जरा भी शासनकर्ता नहीं है और मौके का फायदा उठानेवाला आदमी है, जो कुछ फायदा हाथों हाथ दिखायेगा लेकिन असर लम्बा नहीं होगा৷ भाई फायाज, खुद इस अच्छा काम में लग जाओ, मोदी तुम्हारा पीछे दौरेगा৷ इस काम सब भारत का एक विरल उदाहरण बनो और किसी नेता के पीछे दौड़ना छोड़ के खुद एक नमस्य नेता बन जाओ৷

आशीर्वाद! हृदय से आशीर्वाद!

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