मजहबी मानसिकता, औरत और बलात्कार!

आज से एक श्रृंखला शुरु की है। हमारी बच्चियों से मजहबी दरिंदे बलात्कार कर रहे हैं। रेप जिहाद ने पूरे यूरोप का चरित्र बदल डाला है। लव जिहाद की शिकार जुही का पति अंसारी उसे अपने भाईयों के साथ मिलकर सात टुकड़ों में काटता है और लाश फेंक देता है। तो मंदसौर में इरफान, आसिफ के साथ मिलकर सात साल की बच्ची का नृशंशतापूर्वक रेप करने के उपरांत उसकी आंत बाहर निकाल देता है। मैं बहुत दुखी हूं। इन मजहब वालों की किताब में गोता लगाकर इनकी पूरी मानसिकता को समझने और आप लोगों तक पहुंचाने का प्रयास कर रहा हूं। इस सिरीज का पहला लेख- मजहबी मानसिकता और बलात्कार को पढि़ए और समझिए, क्योंकि खतरा बिल्कुल हमारे पड़ोस में हमारी बच्चियों के लिए घात लगाए बैठा है…

दम घुट रहा है मेरा! और आज मंदसौर की घटना सुनकर नहीं, बल्कि वर्षों से! बोल या लिख नहीं पा रहा था। सोच रहा था कि भारत में बसने वाले मजहबी सीरिया, पाकिस्तान, सउदी अरब, ईरान, इराक से अलग हैं। ये हमारे अपने हैं। इनके अंदर भी भारतीय खून है। ये हैवान नहीं हैं। और ऐसे मेरे कई मजहबी मित्र हैं, जो इनसानियत से लबरेज हैं, उसे साबित भी करते हैं, और वो आज भी मेरे अपने हैं, लेकिन जब एक छोटी बच्ची की आंत फाड़ने वाले किसी इरफान या आसिफ के लिए उनकी घनी चुप्पी देखता हूं तो डर लगता है! ये पढ़े-लिखे हैं, लेकिन अपने मजहबी दायरे में इतने कैद हैं कि पत्रकार होकर भी मुसलिम एकता के लिए जमा होते हैं, तो फिर दम घुटता है! मंसदौर पर चुप्पी और कठुआ पर इनके सोशल मीडिया अभियान को देखता हूं तो फिर सोचना जरूरी हो जाता है!

और मेरा जब दम घुटता है तो मैं या तो अपनी अंतरयात्रा पर निकल पड़ता हूं या फिर किताबों के संग यात्रा करने लगता हूं। मंदसौर से विचलित मन इनकी आसमानी किताबों की यात्रा पर निकल गयी, पहले भी कई बार पढ़ा, लेकिन आज जब फिर से पलटा तो डर गया! क्या ये हमें बर्बर मध्ययुग में ले जाने की कोशिश कर रहे हैं, जहां औरतों को इन्होंने केवल ‘यौन दास’ समझा और वैसे ही उनके साथ बर्बरतापूर्ण व्यवहार किया, जैसा कि इरफान और आसिफ ने मंदसौर की सात वर्षीय बच्ची के साथ किया है?

मैं कोई अकेला नहीं हूं, जो इस सवाल से जूझ रहा है। रविंद्रनाथ टैगोर हों या फिर डॉ भीमराव अंबेडकर, सबने यही माना है कि मजहबी कौम दूसरों को जीने का अवसर देना नहीं चाहती। शायद यही वजह है कि इनका समूचा इतिहास खून-खराबे, हत्या-बलात्कार से भरा है। अभी हाल ही में देश की राजधानी दिल्ली में जूही नामक एक महिला को उसके ही मुसलमान पति ने अपने भाईयों के साथ मिलकर सात टुकड़े में काट डाला। उसके नसों को काट कर पहले उसके शरीर का सारा खून नाली में बहाया और फिर शव को छोटे-छोटे टुकड़े में काट कर कार्टून में बंद कर फेंक दिया। हिंदू लड़की जूही ने सोचा था कि वह तो अंसारी से प्रेम कर रही है, और प्रेम तो किसी धर्म-मजहब को नहीं मानता, लेकिन उसे क्या पता था कि मजहबियों का प्रेम भी एक जेहाद ही है!

निर्भया तो सबको याद है। उसकी योनी में रॉड डालकर उसकी आंत तक को बाहर खींचने वाला उस मजहबी कौम का ही एक नाबालिग था। आज मंदसौर में एक सात वर्षीय बच्ची के फूल सी कोमल शरीर को चीड़-फाड़ कर रख दिया गया है! उस छोटी-सी बच्चे के पूरे शरीर पर जख्म हैं, उसकी आंत काट कर निकाली गयी है और उसकी स्थिति नाजुक है। वह बच भी गई तो क्या ताउम्र वह इस हादसे से उबर पाएगी?

और यह स्थिति केवल भारत में नहीं है। सीरिया में तो यजीदी महिलाओं को यौन दास बनाकर बाजार में खुलेआम बेचने का वीडियो हम सभी ने देखा है। ब्रिटेन में छोटी-छोटी बच्चियों को बीच सड़क पर पकड़ कर रेप किया जा रहा है। यह रेप करने वाले मजहबी शरणार्थी के रूप में ब्रिटेन आए थे, पाकिस्तानी के रूप में ब्रिटेन में रह रहे थे और आज उन्हीं शरण देने वालों की बच्चियों और महिलाओं को रौंद रहे हैं? जर्मनी, स्वीडन, फ्रांस-आखिर किस देश की महिलाएं हैं जो मजहबी यौन हमले की शिकार नहंी हैं? पूरी दुनिया रेप जेहाद, लव जेहाद, सेक्स जेहाद जैसे नारों और कृत्यों से भयाक्रांत है।

इन सबको दरिंदगी नहीं तो और क्या कहेंगे? क्या इनसानियत या फि सेक्यूलर इनसानियत? क्योंकि इनके बचाव में लगा वामपंथी मीडिया बिरादरी इसी सेक्यूलर इनसानियत के कारण मंदसौर की उस छोटी-सी मासूम बच्ची की तकलीफ को आवाज देने से इनकार कर रहा है, जबकि उस बच्ची को इनसाफ दिलाने के लिए पूरे मंदसौर की महिलाएं सड़क पर निकल आयी हैं! फिर भी खामोशी है! यह खामोशी मेरा गला घोंट रही है।

ब्रिटेन में टॉमी रॉबिन्सन नामक पत्रकार ने जब इस खामोशी को तोड़ते हुए वहां के रेपिस्ट मजहबी ग्रूमिंग गिरोह का पर्दाफाश किया तो उसे जेल में डाल दिया गया! पूरी दुनिया में वामपंथी लेफ्ट बिरादरी इस मजहबी रेपिस्टों का प्रवक्ता बन इन्हें बचाने का प्रयास करता है और यह सब इसलिए ताकि दोनों मिलकर दुनिया की सारी संस्कृतियों का गला घोंट सकें, दुनिया की हर महिला को अपनी हवस का शिकार बना सकें! लेफ्ट यौन स्वतंत्रता के नाम पर महिलाओं को भोगता है और यौन दास के रूप में मजहबी जमात महिलाओं को रौंदता है! इनके मूल में नारी सिर्फ भोग्या है! हां बातें यह जरूर नारी स्वतंत्रता, नारीवाद, फेमिनिज्म की करते हैं! यह भारी-भरकम शब्द मजहब और स्वतंत्रता की आड़ में स्त्रियों को यौन गुलाम बनाने की मानसिकता का प्रकटीकरण है!

पढ़ रहा था उस आसमानी किताब को, जो महिलाओं को खेती से अधिक कुछ नहीं समझता। आसमानी किताब कहता है, तब खुदा ने पूर्वोक्त आयत का इलहाम किया-

“तुम्हारी स्त्रियां तुम्हारे लिए खेती समान हैं। तो अपनी खेती में जिस तरह से चाहो, जाओ।” (2.223)

इन आयतों के इलहाम (यानी पैगंबर के उपर उतरना) के मौकों का वर्णन उस मानसिक सोच को दर्शाता है, जो स्त्री को भोग की वस्तु से अधिक मानने को तैयार नहीं है। स्त्री को खेती समझने वाले आयत के बारे में इब्न अब्बास ने इस प्रकार वर्णन किया है-

मदीना के लोग जो अन्सर खिताब से जाने जाने लगे थे, पहले मशरूक थे। यहूदी उनके पड़ोसी थे। क्योंकि यहूदी के पास एक खुदाई किताब- (तोरः) थी, इसलिए ये मशरूक यह समझते थे कि यहूदियों का इल्म उनके इल्म से ज्यादा है। इसलिए वे यहूदियों के रीति-रिवाजों और तौर-तरीकों को अपना लिया करते थे। संभोग के लिए यहूदी हमेशा आगे की अंग-स्थिति को अपनाते थे, जिसके अंतर्गत महिला जोड़ीदार को पीठ के बल लेटना होता था, क्योंकि वे ऐसा मानते थे कि यह स्थिति नारी सुलभ शील की रक्षा के लिए अधिक उपयुक्त है। अंसर भी इसी स्थिति को अपनाते थे। इसके विपरीत कुरैश अलग-अलग स्थितियों में संभोग का आनंद लिया करते थे, जिसमें अग्रस्थिति, पश्च स्थिति, पार्श्व स्थितियां और उकड़ूं स्थिति शामिल थी।

जब मुजाहिर (प्रवासी) मदीना आए तो उनमें से एक ने अंसर महिला से विवाह कर लिया और उसने अपने अंदाज और रिवाज के मुताबिक (विभिन्न स्थितियों का इस्तेमाल करते हुए) संभोग करने की कोशिश की। लेकिन औरत को यह अंदाज पसंद नहीं आया और उसने कहा कि संभोग केवल उत्तान (पीठ के बल) स्थिति में ही किया जाता है। उसने आदमी को कोई दूसरी स्थिति अपनाने की इजाजत नहीं दी। जब यह विवाद लंबे समय तक चलता रहा तो यह बात पैगंबर-ए-पाक की जानकारी में लाई गई। तब खुदा ने पूर्वोक्त आयत का इलहाम किया, “तुम्हारी स्त्रियां तुम्हारे लिए खेती समान हैं। तो अपनी खेती में जिस तरह से चाहो, जाओ।” (2.223)

(फतवे, उलेमा और उनकी दुनिया-अरुण शौरी की पुस्तक से साभार।)

यहां ध्यान दीजिए कि स्त्री की मर्जी का कोई सम्मान नहीं किया गया। स्त्री की कोई मर्जी पैगंबर या खुदा को मंजूर नहीं था, इसलिए पैगंबर ने खुदा के इलहाम के आधार पर स्त्री की मर्जी को सिरे से खारिज कर दिया और पुरुषों को कहा कि जैसे चाहे स्त्रियों को भोगो!

मैं हिंदू माता-पिता, अभिभावकों से कहना चाहता हूं कि क्या आप अपने घर की स्त्रियों, बेटियों को एक गुलाम के रूप में देखना चाहते हैं? यदि नहीं तो आप इस खतरे को महसूस करते हुए उस आसमानी किताब को क्यों नहीं पढ़ते ताकि अपने बच्चों को हैवानों से बचा सकें, सावधान कर सकें?

आप इनकी मानसिकता को समझते रहेंगे तो बचपन में अपनी बच्ची को किसी मोमीन की नजर पड़ने से बचाए रहेंगे? और जब बच्ची बड़ी होगी तो आप मोमीनों की महिलाओं के प्रति मानसिकता की उसे शिक्षा दे सकेंगे ताकि वह स्कूल-कॉलेज में लव जिहाद, रेप जिहाद का शिकार होने से बच जाए?

मध्ययुग के अभिभावक आपसे ज्यादा समझदार थे, तभी इन हैवानों से अपनी बच्चियों को बचाने के लिए भारत में पर्दा प्रथा, बाल विवाह, रात्रि विवाह का चलन शुरु हुआ। आपको पर्दा प्रथा और बाल विवाह जैसी कुरीतियों को अपनाने को नहीं कह रहा हूं, बल्कि खुद आसमानी किताब, हदीस, शरियत का अध्ययन कर अपनी बच्चियों और घर की स्त्रियों को सचेत करने को कह रहा हूं!

कोई इमरान, कोर्ह आसिफ, कोई मोहम्मद आपकी बेटी को जूही की तरह टुकड़े करने के लिए घात लगाए बैठा, आपकी बच्चियों की आंतें बाहर निकालने के लिए मौके की ताक में है, उसे रौंदने के लिए हाथ में हिंदू कलावा बांध कर बाइक लिए मंडरा रहा है, इसलिए यदि आप नहीं चेते तो फिर आपको किसी से शिकायत करने और यहां तक कि आंसू बहाने का भी हक नहीं है? जन्म लेना और मरने के इंतजार में जीते चले जाना ही जिंदगी नहीं है, बल्कि अपने आत्मसम्मान की रक्षा करते हुए गौरवपूर्ण जीवन जीना ही वास्तविक जिंदगी है! इसे कब समझेंगे आप?

URL: The World of Fatwas or the Sharia in Action through rape love jihad-1

Keywords: History of islam, World of Fatwas, Sharia, love jihad, rape jihad, Women’s Rights in Islam, know about islam, Mandsaur Rape Case, Doctors shocked at Mandsaur gang rape victim’s injuries, say she is too traumatised to talk,

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