कहते हो इसलाम में हलाला नहीं है तो फिर पैगंबर साहब ने यह क्या कहा है?

मुसलमानों के अंदर कुप्रथा के रूप में मौजूद तीन तलाक, हलाला और बहुविवाह पर देश में संग्राम मचा हुआ है। सुप्रीम कोर्ट और मोदी सरकार इन कुप्रथाओं को समाप्त करना चाहती है, लेकिन मुसलिम पर्सनल बोर्ड, कांग्रेस पार्टी और मुल्ले-मौलवी इन कुप्रथाओं को बनाए रखना चाहते हैं। मुसलिम पर्सनल बोर्ड और मुल्ले-मौलवी का तर्क है कि हलाला और तीन तलाक न तो कुरान में है और न ही पैगंबर मोहम्मद इसे उचित मानते हैं। इनका यह तर्क गले नहीं उतरता। जब न कुरान इसे सही मानता है और न पैगंबर-ए-इसलाम तो फिर ये इसे छोड़ना क्यों नहीं चाहते? क्यों ये कह रहे हैं कि महजब में सरकार दखलअंदाजी न करे? असल में असल में पैगंबर-ए-इसलाम के समय हलाला का साफ जिक्र है और यही वजह है कि ये मुल्ले-मौलवी औरतों का शोषण करते हुए उसे बनाए रखने पर आमदा हैं। ये साफ-साफ झूठ बोल रहे हैं। पाठक खुद बुखारी खंड-दो पृष्ठ-789 में पैगंबर के समय हलाला का जिक्र देख और पढ़ सकते हैं। वहां लिखा है-

हजरत आयशा लिखती हैं:-

रफाअत की पत्नी पैगंबर-ए-पाक के पास आई और उन्हें यह बताया कि रफाअत ने तीन बार तलाक (तलाक-ए-बाइन) कह दिया है। जिसे वापिस नहीं लिया जा सकता। उसके बाद उसने अब्दुल रहमान से निकाह किया, लेकिन उसका लिंग कपड़े के फुंदने के समान था (अर्थात वह नपुंसक था)। इस पर पैगंबर साहिब बोले “शायद तुम दोबारा रफाअत से शादी करना चाहती हो” (अपने मन ही मन वह हां करना चाहती थी।) पैगंबर साहिब ने उसके इरादे को भांपते हुए कहा, नहीं जब तक कि वह (दूसरा पति) तुम्हें नहीं भोग लेता और तुम उसे नहीं भोग लेती।” (यह प्रक्रिया हलालः कहलाती है, जिसके अंतर्गत अपने दूसरे पति के साथ फिर से शादी करना तब तक उचित नहीं माना जाता जब तक कि दूसरे पति का उसके साथ सहवास न हो जाए।)

पैगंबर-ए-पाक ने जाबिर से पूछा (जब वह सफर से वापिस लौटा): ” तुमने दोशीजः (कुमारी) से शादी की थी या गैर दोशीजः से?” जाबिर बोला एक बेवा से। इस पर पैंगबर साहिब बोले, “तुमने किसी दोशीजः से शादी क्यों नहीं की। वह तुम्हारा मन बहलाव करती, तुमसे लार-दुलार करती और तुम भी उसे चुमकारते पुचकारते।” उसके बाद मदीना पहुंचकर पैगंबर-ए-पाक बोले, “हम यहां ईशा (रात की नमाज) तक इंतजार कर लेते हैं ताकि औरतें अपने सिर के बालों को धो लें और अपने जघन बालों को साफ कर लें।” (बुखारी, खंड दो, पृष्ठ 789 से संक्षेपित)

नोट- यह हिस्सा अरुण शौरी की पुस्तक ‘फतवे, उलेमा और उनकी दुनिया’ पुस्तक से ली गई है। हिंदी में यह पुस्तक वाणी प्रकाशन से प्रकाशित है। इस तथ्य के लिए indiaSpeaksdaily.com का अपना कोई दावा नहीं है।

इसलाम में औरतों की स्थिति जानने के लिए पढ़ें:-

1-मजहबी मानसिकता और बलात्कार!

URL: The World of Fatwas or the Sharia in Action through rape love jihad-2

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