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कोरोना का मॉडर्न मेडिसिन में कोई इलाज संभव नहीं-कमान्डर नरेश, फाउन्डर ज़ायरोपैथी

मार्च 2020 में कोरोना की शुरूआत होते ही मैंने लोगों को बताया था कि मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम में ना ही कोरोना की दवा बन पायेगी, ना ही कोई थिरैपी काम करेगी और ना ही कोई वैक्सीन कारगर होगी। आज यह साबित हो गया।

मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम ने कोरोना के शुरूआत में विभिन्न प्रकार की दवाओं का प्रयोग किया जिसके कारण हज़ारों लोगों की अकारण मृत्यु हो गई। कुछ जगहों पर प्लाजमा थिरैपी के लिये प्लाजमा बैंक खुलवाये जो अपने आप में एक स्कैंडल बना।

वैक्सीन कारगर ना होने की पूरी संभावनाओं को ताक पर रख कर विश्व के प्रत्येक विकसित देश ने जल्द से जल्द वैक्सीन बनाने की होड़ लगा ली।

आखिरकार 10 सालों में भी ना बन बन पाने वाली वैक्सीन 10 महीनों में ही बना ही डाली ! वैक्सीन बनने का ऐलान सभी विकसित और विकासशील देशों ने सिलसिलेवार सीनिऑरिटी मेन्टेन करते हुये किया।

सभी विकसित देशों ने वैक्सीन के इमर्जेंसी एप्रूवल के अंतर्गत कुछ Do’s और Dont’s भी जारी किये, पर हमारे देश में ऐसा कुछ इसलिये नहीं किया गया क्योंकि हमारी वैक्सीन 110% सुरक्षित जो है ! विश्व के सभी विकसित देश अपनी-अपनी वैक्सीन दुनिया भर में बेंच रहे हैं परन्तु हम दान दे रहे हैं ?

कुछ दिनों पहले इंग्लैंड के कोरोना वैक्सीन डिप्लोयमेंट मंत्री नधीम ज़हावी ने पार्लियामेंट में बताया कि कोरोना के 4000 से अधिक स्ट्रेन हैं जिनमें तेजी से फैलने वाले ब्रिटिश, साउथ अफ्रीकन तथा ब्राजीलियन स्ट्रेन भी शामिल हैं। इसलिये सभी वैक्सीन बनाने वाली कम्पनियों को अपने-अपने वैक्सीन समय के साथ अपग्रेड करने होंगे।

सभी जानते हैं कि कोरोना के स्ट्रेन लगातार तेजी से बदल रहे हैं। प्रत्येक बदलते स्ट्रेन के साथ वैक्सीन को बदलना संभव नहीं होगा। इसका यह भी मतलब है कि आज लगवाई गई वैक्सीन कुछ समय बाद निष्क्रिय हो जायेगी और लोगों को बार-बार वैक्सीन लगवानी पड़ेगी।

किसी भी मुकाबले को जीतने के लिये प्रतिद्वंदी से आगे निकलना जरूरी है अतः अगर कोरोना को मात देना है तो स्ट्रैटिजी बदलनी होगी। वैक्सीन के सहारे कोरोना से नहीं जीता जा सकता !

कोरोना को मात देने का एकमात्र उपाय इम्यूनिटी ही है। मजबूत इम्यूनिटी के अलावा कोई भी अन्य उपाय कारगर नहीं होगा। इम्यूनिटी मजबूत करने के लिये सिर्फ ट्रेडीशनल मेडिसिन सिस्टम ही उपयुक्त सिद्ध होगा।

आयुर्वेद में इम्यूनिटी बढ़ाने के हजारों उपाय हैं, वहीं मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम के प्रत्येक ड्रग्स से इम्यूनिटी कमजोर होती है। हमारे स्वास्थ्य मंत्री जानते तो हैं पर मानते नहीं।

मुझे समझ नहीं आता कि हमारे देशवासियों को हमारी ट्रेडिशनल मेडिसिन सिस्टम पर भरोसा क्यों नहीं हो रहा ? कोरोना काल में सभी ने किसी ना किसी रूप में सुरक्षित रहने के लिये आयुर्वेद औषधियों तथा नियमों का पालन किया और यही कारण है कि पाश्चात्य देशों की तुलना में हमारे देश में कम छति हुई।

इसके बावजूद भी क्या विवशता है कि हम अपने परंपरागत औषधीय सिस्टम का परित्याग कर मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम का समर्थन कर रहे हैं, जहाँ सिर्फ लक्षणों को दबाकर साइड़ इफेक्ट के रूप में दूसरे अंग को क्षतिग्रस्त कर नई बीमारी पैदा की जाती है ?

मेरा सभी से अनुरोध है कि कोरोना से सीख लें और स्वदेशी को प्रशस्त करें, देश-विदेश सभी को अपने देश में विकसित नई स्वास्थ्य प्रणाली ज़ायरोपैथी के बारे में बतायें जहाँ प्रिवेंटिका जैसी एक ही गोली आपकी इम्यूनिटी को इतना मजबूत कर देती है

कि कोरोना का कोई भी स्ट्रेन आपका बाल बाँका भी ना कर पाये। स्वास्थ्य के क्षेत्र में ज़ायरोपैथी ने माननीय प्रधानमंत्री जी के “वोकल फ़ॉर लोकल” के सपने को साकार करके दिखाया है।

कोरोना काल में लॉकडाउन समाप्त होने के बाद हजारों लोगों ने कोरोना से सुरक्षित रहने के लिये “प्रिवेन्टिका” अपनाई और आज भी सुरक्षित हैं। इसके अलावा ज़ायरोपैथी द्वारा सुझाये गये सप्लीमेंट के कॉम्बिनेशन से हजारों लोग कोरोना नेगेटिव और पूर्ण स्वस्थ हुये और उन्हें कोरोना का कोई साइड इफ़ेक्ट भी नहीं हुआ।

मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम कोरोना पॉज़िटिव से कोरोना नेगेटिव करने को ही बहुत बड़ी उपलब्धि मान रहा है। परन्तु कोरोना नेगेटिव होने के बावजूद भी लोगों की परेशानियाँ समाप्त नहीं हो रहीं हैं और वे पूरी तरह स्वस्थ नहीं महसूस कर रहे।

वैसे तो कोरोना नेगेटिव होने के बाद बहुत लोगों की मृत्यु कोरोना के साइड इफ़ेक्ट से हुई हैं पर हाल ही में रिपब्लिक हिन्दी के जाने माने पत्रकार विकास शर्मा (पूछता है भारत) के कोरोना नेगेटिव होने के बाद आकस्मिक निधन ने मॉडर्न मेडिसिन सिस्टम से लोगों का भरोसा और भी उठा दिया है ।

ज़ायरोपैथी ने ऐसे ही हज़ारों लोगों को कोरोना नेगेटिव होने के बाद उन्हें पूरी तरह से स्वस्थ करने में मदद की है।

अब जब लगातार बढ़ते कोरोना के स्ट्रेन से पूरे विश्व में वैक्सीन की सार्थकता समाप्त हो रही है तो हमारी सलाह है कि प्रिवेन्टिका प्रयोग कर स्वयं को स्वस्थ रखें और दूसरों को भी सुरक्षा की एक नयी राह दिखायें।

कमाण्डर नरेश कुमार मिश्रा
फाउंडर ज़ायरोपैथी
ईमेल : zyropathy@gmail.com
वेबसाइट: www.zyropathy.com

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