इन एंजल्स में वो बात नहीं – चार्लीज एंजल्स फिल्म रिव्यू

कभी न नज़र आने वाले चार्ली की तीन हसीनाओं की याद अब तक दर्शकों के जेहन से मिटी नहीं है। सन 2000 में प्रदर्शित हुई ‘चार्लीज़ एंजल्स‘ को युवा दर्शकों के लिए रिबूट किया गया है। इन दिनों फिल्मों की ‘रिबूटिंग’ का भूत हॉलीवुड को बहुत चढ़ा हुआ है। इस रिबूटिंग ने हॉलीवुड के ख्यात सुपर हीरोज की मूल थीम को ही नष्ट कर के रख दिया है। सुपरमैन से उसकी मासूमियत और स्पाइडरमैन से उसकी मुफलिसी छीन ली गई है। ऐसा ही कुछ नई वाली चार्लीज एंजल्स को देखकर महसूस हुआ। ये नई फिल्म उस पुरानी वाली फिल्म के पासंग भी नहीं ठहरती।

एक नई तकनीक का आविष्कार किया गया है। इसे केलेस्टो नाम दिया गया है। केलेस्टो न केवल ऊर्जा की जरूरतें पूरी कर सकता है बल्कि जरूरत पड़ने पर एक खतरनाक हथियार का रूप ले सकता है। इधर एंजल्स के बॉस जॉन बोसली के रिटायर होते ही केलेस्टो चोरी होकर अंतर्राष्ट्रीय बाजार में बिकने आ जाता है।

सबीना विल्सन, एलेना और जेन कानो इस षड्यंत्र का पता लगाने के लिए चार्ली की ओर से नियुक्त की जाती हैं। केलेस्टो उनके पास आए, उससे पहले ही तीनों एंजल्स पर घातक हमले होना शुरू हो जाते हैं। तीनों के सामने दो मकसद हैं। एक तो कैसे भी केलेस्टो को गलत प्रयोग होने से पहले वापस लाना और दूसरा एजेंसी में छुपे गद्दार को खोजना।

फिल्म का स्क्रीनप्ले बहुत बेहतर था लेकिन इस बेहतर स्क्रीनप्ले के साथ निर्देशिका एलिजाबेथ बैंक्स न्याय नहीं कर सकी। जितना अच्छा कथानक था, उतना ही बुरा निर्देशन रहा। ना तो किरदार ढंग से स्थापित हो सके और न ही एक्शन दृश्यों में ये फिल्म पुरानी चार्लीज़ एंजल्स के आगे टिक सकी है।

इस सीरीज की यूएसपी मुख्यतः रोमांचक एक्शन रहा है लेकिन यहाँ फिल्म बेहद कमज़ोर साबित हुई है। मूल फिल्म में ड्रयु बैरीमोर, कैमरॉन डियाज, लूसी ल्यू जैसे सितारे थे। इन तीनों ने एंजल्स की भूमिकाएं ऐसे निभाई थी, जैसे वे इन्हीं के लिए बनी हो। लेकिन इस नई फिल्म को देखकर निराशा होती है। नई लड़कियों में एक भी उन तीनों की याद हल्की नहीं कर सकी।

चार्लीज एंजल्स का एक मुख्य ‘एसेंस’ कॉमेडी का था। इस फिल्म में हास्य के लिए कोई जगह नहीं रखी गई। आश्चर्य है कि चार्ली की सुंदरियों का बेस ही इस फिल्म में बदल दिया गया। उनके सेन्स ऑफ़ ह्युमर के बिना ये फिल्म देखना खुद पर अत्याचार करने जैसा लगता है। हॉलीवुड रिबूटिंग के चक्कर में अपनी क्लासिक फिल्मों का कचरा करने में लगा हुआ है। हमने सुपरमैन को हिंसक होते हुए देख लिया जबकि मूल कॉमिक्स में वह अपराधी को कभी नहीं मारता। ऐसी ही तोड़फोड़ चार्लीज एंजल्स के साथ हो गई है।

इस सप्ताह तीन फ़िल्में प्रदर्शित हुई। उनमे से बस मोतीचूर-चकनाचूर की रिपोर्ट कुछ बेहतर आ रही है। मरजावां की ओपनिंग तो पहले ही दिन मर गई। चार्लीज एंजल्स का भी भारत में कुछ ख़ास स्वागत नहीं हुआ है। इस सप्ताह बॉक्स ऑफिस सुस्त सा रहा है इसलिए टॉकीजों का रुख करने का कुछ ख़ास लाभ नहीं होगा।

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Vipul Rege

Vipul Rege

पत्रकार/ लेखक/ फिल्म समीक्षक पिछले पंद्रह साल से पत्रकारिता और लेखन के क्षेत्र में सक्रिय। दैनिक भास्कर, नईदुनिया, पत्रिका, स्वदेश में बतौर पत्रकार सेवाएं दी। सामाजिक सरोकार के अभियानों को अंजाम दिया। पर्यावरण और पानी के लिए रचनात्मक कार्य किए। सन 2007 से फिल्म समीक्षक के रूप में भी सेवाएं दी है। वर्तमान में पुस्तक लेखन, फिल्म समीक्षक और सोशल मीडिया लेखक के रूप में सक्रिय हैं।

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