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सावधान : प्रधानमंत्री योजना के नाम पर देश भर में चल रहा था फर्जीवाड़े का रैकेट!

यदि आप किसी भी तरह की सरकारी योजनाओं से मदद हासिल करना चाहते हैं तो इस बारे में अवश्य  गहन जांच-पड़ताल कर ले अन्यथा आपको ठगी का शिकार होना पड़ सकता है। 

दिल्ली पुलिस की साइबर सेल ने एक ऐसे ही मामले का पर्दाफाश करते हुए प्रधानमंत्री शिशु विकास योजना के नाम पर देशभर के अभिभावकों के साथ ठगी करने वाले दो अलग-अलग मॉड्यूल का भंडाफोड़ किया है। पुलिस का दावा है इस संबंध में बिहार और यूपी से तीन मास्टर माइंड बदमाशों को गिरफ्तार किया गया । इनकी पहचान नीरज पांडय (32), आदर्श यादव (28) और सुरेंद्र यादव (30) के रूप में हुई है।

इन आरोपियों ने www.pmsvy-Cloud.in के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई हुई थी और देशभर के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों को सरकारी योजना के नाम पर हेल्थ इंश्योरेंस और आर्थिक मदद का झांसा देते थे। इतना ही नहीं आरोपियों ने देशभर के राज्यों, जिला, तहसील और गांवों तक में अपना नेटवर्क बनाया हुआ था। पुलिस ने खुलासा किया है कि ठगी की रकम का 40 फीसदी हिस्सा राज्य, तहसील व गांवों में बैठे एजेंट के पास जाता था जबकि बाकी 60 फीसदी आरोपियों के खाते में चला जाता था।

साइबर क्राइम के पुलिस उपायुक्त अनेश रॉय का कहना है कि पिछले दिनों नेशनल हेल्थ अथार्रिटी के निदेशक ने दिल्ली पुलिस से प्रधानमंत्री शिशु विकास योजना के नाम पर ठगी की शिकायत दर्ज कराई थी। उन्होंने अपनी शिकायत में बताया ‌था कि आरोपियों ने www.pmsvy-cloud.in के नाम से फर्जी वेबसाइट बनाई हुई है। इस तरह की शिकायत के बाद साइबर क्राइम यूनिट ने मामले की छानबीन शुरू की। बाद में रैकेट में शामिल आरोपियों नीरज यादव को पटना (बिहार) और आदर्श यादव को अयोध्या (यूपी) से दबोचा गया। दोनों को पुलिस रिमांड पर लेकर जब इनसे पूछताछ की गई तो दोनों ने बताया कि इनका तीसरा साथी जो पहले इनके साथ ही काम करता था अब पटना में इसी नाम से अपना वेबसाइट बनाकर अलग से ठगी कर रहा है। इसके बाद पुलिस की टीम ने आरोपी सुरेंद्र यादव को भी पटना से दबोच लिया।

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आरोपियों के कब्जे से सात मोबाइल, तीन लैपटॉप, दो सीपीयू, आईकार्ड, रजिस्टर व अन्य सामान बरामद किया गया है। आरोपियों के कंप्यूटर से 15 हजार से अधिक अभिभावकों का डाटा मिला। इन लोगों ने सरकारी योजना का लाभ देने के नाम पर पूरे देश में नेटवर्क फैलाया हुआ था। योजना का लाभ देने के नाम पर प्रत्येक अभिभावकों से 250 रुपये रजिस्ट्रेशन के लिए वसूले जाते थे। आरोपी खासकर सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को ही निशाना बनाते थे। फिलहाल गैंग बच्चों के डाटा के आधार पर देशभर के निजी अस्पतालों से कमिशन लेने की भी तैयारी कर रहा था। इसके अलावा पहले से पंजीकृत हुए अभिभावकों से दूसरी योजनाओं का लालच देकर और ठगी की तैयारी चल रही थी।

दिल्ली पुलिस का कहना है जांच पड़ताल में साफ हुआ है कि इस साल के जनवरी से यह ठगी का धंधा चलाया जा रहा था । इन लोगों को अच्छी तरह पता था कि सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के अभिभावकों को इस तरह की फर्जी योजना का लालच देकर आसानी से ठगा जा सकता है।

देशभर में अपना नेटवर्क चलाने के लिए आरोपियों ने दस लोगों की नियुक्ति की हुई थी। हर एक के पास दो-दो, तीन-तीन या चार राज्य की जिम्मेदारी थी। राज्य के प्रमुख, जिला प्रमुख की नियुक्ति करते थे। यह जिला प्रमुख ग्राम पंचायत या तहसील में अपने एजेंट नियुक्त करते थे। इसके बाद अभिभावकों से संपर्क कर उनसे रजिस्ट्रेशन के नाम पर 250 रुपये लिये जाते थे। 150 रुयये मास्टर माइंड- तीनों आरोपियों के होते थे। वहीं 50-50 रुपये राज्य प्रमुख और जिला प्रमुख व अन्य लोगों के होते थे। पुलिस ने दावा किया कि इस रैकेट का जाल केरल, तमिलनाडु, पंजाब, गुजरात, हरियाणा, जम्मू कश्मीर, मध्य प्रदेश, कर्नाटक, गोवा ,महाराष्ट्र, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना राजस्थान, असम, अरुणाचल प्रदेश, मिजोरम, सिक्किम ,मेघालय, त्रिपुरा, बिहार, उत्तरप्रदेश, उड़ीसा, उत्तराखंड, नागालैंड और हिमाचल प्रदेश तक फैला था।

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पुलिस ने दावा किया है कि
आरोपी आदर्श यादव एमबीए किए हुए है। दूसरा आरोपी नीरज पांडेय बीसीए किया हुआ है जबकि तीसरा आरोपी सुरेंद्र यादव ग्रेजुएट है। इस साल की शुरूआत से आरोपियों ने फर्जी वेबसाइट बनाकर ठगी मिलकर शुरू की। लेकिन बीच में सुरेंद्र की बाकी दोनों आदर्श और नीरज से खटपट हुई तो वह खुद ही अलग होकर ठगी का धंधा करने लगा।

पुलिस पकड़े गए आरोपियों से पूछताछ कर इनके बाकी साथियों का पता लगाने का प्रयास कर रही है। पुलिस का कहना है कि इस तरह रैकेट से कई अन्य लोग भी जुड़े हुए हैं जिनको दबोचने की प्रक्रिया चल रही है।

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Archana Kumari

Archana Kumari

राजधानी दिल्ली में लंबे समय तक अपराध संवाददाता के रूप में कार्य का अनुभव। अर्चना विभिन्न समाचार पत्रों तथा न्यूज़ चैनल में काम कर चुकी हैं। फिलहाल स्वतंत्र पत्रकारिता।

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