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समय आ गया है कि ‘Indian Armed Forces’ को मीडिया ट्रायल से अलग रखा जाए !

Farida Khanam | फरवरी 2018 की ही बात है! सेना की प्रेस विज्ञप्ति निकलती है की एक 51 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल को गोपनीय दस्तावेज पाकिस्तान की एक महिला को भेजे जाने का मामला सामने आया है, मामला प्रथम दृष्टया हनी ट्रेप का जान पडता है और आगे की जांच के लिए मामला पुलिस को सौंपा जा रहा है।

51 वर्षीय लेफ्टिनेंट कर्नल अचानक फोटो और नाम सहित मिडिया पर छा जाते हैं, मिडिया चटकारे ले ले कर एक रंगीन कर्नल, हसीनाओं के जाल में कर्नल, और ना जाने कितनी तरह तरह की कहानियों को बना कर पेश करती है। एक ‘कौन जात’ चैनल फौरन हिन्दु कर्नल की तुलना आतंकवादी मुस्लिम गुटों से कर सवाल उठाते हैं की हर कौम में गद्दार हैं तब सवाल मुसलमानों पर ही क्यों उठाया जाता है? निरंतर कई दिनों तक कर्नल साहब का मिडिया ट्रायल जारी रहता है ।

अब देखिए कुछ ही दिनों पश्चात एक हाई लेवल पर उच्च अधिकारियों की जांच समिति गठित की जाती है! जांच समिति कर्नल साहब पर लगे सारे आरोपों की कड़ी जांच करती है और सारे आरोप निराधार पा कर उन्हें बाईज्जत बरी कर देती है। यही नहीं कर्नल साहब को फौरन उनके पद पर बहाल भी कर दिया जाता है लेकिन यह समाचार किसी भी मिडिया की सुर्खियों में नहीं जगह पाता।

देश के लिए अपने जीवन की अमूल्य जवानी के 30 साल न्योछावर करने के पश्चात भी एक निर्दोष लेफ्टिनेंट कर्नल कहीं मुंह दिखाने लायक नहीं रहे। साल भर में मात्र 1 महीने परिवार के साथ रहने के लिए अवकाश, सबसे कठोर और अनुशासन वाली नौकरी और तनख्वाह एक सरकारी वरिष्ठ कालेज के प्रिंसिपल से कम!

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इस जांच अवधी के दौरान लेफ्टिनेंट कर्नल और उनके परिवार को क्या-क्या नहीं सुनना पडा होगा ? कैसे वह अपने पड़ोसी का सामना करते होगें , कैसे उनके बच्चे अपने दोस्तों के बिच सफाई देते होंगे की उनके पिता चरित्रहीन और देश के गद्दार नहीं? और यह सब हुआ मिडिया के ट्रायल के कारण! क्या यह उचित नहीं होता की सेना पुरी जांच होने तक एक इतने बरसों से सेवा दे रहे अधिकारी का केस सिर्फ शक की बिना पर मिडिया के सामने उजागर नहीं करती?

आज कितने न्यूज़ चैनल है जो आतंकवादियों से सरहदों पर लड रहे सैनिकों का साक्षात्कार दिखाते हैं? या उन्हें उस वक्त अपने स्टुडियो में जगह देते हैं जब वह प्राकृतिक आपदाओं से जुझ कर आम लोगों की जाने बचा रहे होते हैं? क्या हमने कभी अपने जीवन में एक लेफ्टिनेंट कर्नल की कहानी सुनी की यह बेहद ईमानदारी से, वीरता से अपनी ड्यूटी निभाते हुए सेवानिवृत्त हो रहे हैं ?

लेफ्टिनेंट कर्नल साहब अपनी तमाम उम्र देश को न्योछावर करने के पश्चात भी अब कभी सर उठा कर नहीं चल सकेंगे, हमारे देश में वह लोग भी कम नहीं जो उनकी जांच करने वाली समिति पर ही ऊंगली उठा दें। आज वक्त है सरकार इस तरह की सेवाएं दे रहे कर्मचारीयों को मिडिया ट्रायल पर जाने से बचाए वर्ना वह समय दूर नहीं जब कोई युवा सेना में जाने से पूर्व हजारों-हजार बार सोचेगा

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