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संवैधानिक संस्था को बदनाम करने के लिए कितना नीचे गिरेगी कांग्रेस, अब उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू के खिलाफ पहुंची सुप्रीम कोर्ट !

सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग लाने के मामले में कांग्रेस की हर जगह हार हुई है। हार ही नहीं हुई है उसकी पूरे देश में करी आलोचना भी हुई। इसके बावजूद कांग्रेस न्यायपालिका जैसी लोकतांत्रिक संस्था को बदनाम करने से बाज नहीं आ रही है। अब कांग्रेस के राज्य सभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा तथा अमिय हर्षाद्रे याग्निक ने मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव खारिज किए जाने के उपराष्ट्रपति के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। अपनी याचिका में सुप्रीम कोर्ट से इस मामले में उपराष्ट्रपति के आदेश को खारिज करने की मांग की गई है। इसके साथ ही सुप्रीम कोर्ट से राज्य सभा के अध्यक्ष एम वेंकैया नायडू को एक समिति गठित करने के निर्देश देने की मांग की गई है ताकि वह समिति सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच कर सके।

मुख्य बिंदु

* महाभियोग प्रस्ताव निरस्त करने के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में नायडू के आदेश खारिज करने की दी याचिका
* कांग्रेस सांसद वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने जस्टिज चेमलेश्वर के बेंच के नाम से दी है याचिका
* सांसद प्रताप सिंह बाजवा और अमिय हर्षाद्रे याग्निक के हवाले से उपराष्ट्रपति के फैसले को असंवैधानिक और एकपक्षीय

सुप्रीम कोर्ट में इस संदर्भ में याचिका दायर कर कांग्रेस ने न सिर्फ न्यायपालिका का बल्कि लोकतांत्रिक मूल्यों के स्तंभ माने जाने वाले संवैधानिक पदों का भी अपमान किया है। कांग्रेस ने अपनी अधिनायकवादी प्रवृत्ति दिखा दी है। उन्होंने दिखा दिया है कि अगर उसकी बात नहीं मानी गई तो वह किस हद तक स्वयं भी गिर सकती है और हमारी लोकतांत्रिक मूल्यों को भी गिरा सकती है। इस बार कांग्रेस की मंशा न्यायपालिका और कार्यपालिका के बीच टकराव बढ़ाने की है। बाजवा और डॉ हर्षाद्रे ने अपनी याचिका में आरोप लगाया है कि 50 से अधिक राज्य सभा सदस्यों के हस्ताक्षर के बावजूद राज्यसभा अध्यक्ष द्वारा प्रस्ताव का खारिज करना दिखाता है कि उनका फैसला अवैध, एकपक्षीय तथा संविधान के अनुच्छेद 14 का उल्लंघन करता है। इसलिए उनके आदेश को निरस्त करते हुए नए सिरे से जांच के निर्देश दिए जाएं।

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गौरतलब है कि उपराष्ट्रपति और राज्य सभा के अध्यक्ष वेंकैया नायडू ने पहले ही सुप्रीम कोर्ट के मुख्य न्यायाधीश दीपक मिश्रा के खिलाफ महाभियोग के प्रस्ताव को खारिज कर चुके हैं। लेकिन प्रस्ताव खारिज होने के बाद राज्य सभा को दो सदस्यों ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर कर देश के मुख्य न्यायाधीश के खिलाफ लगे आरोपों की जांच कराने के निर्देश देने की मांग की है।

सांसद और वरिष्ठ वकील कपिल सिब्बल ने सोमवार को यह याचिका उस बेंच के सामने दायर की है जिसका नेतृत्व जस्टिस जे चेलमेश्वर कर रहे हैं। कपिल सिब्बल ने अपनी याचिका में उन बेंच के नाम का जिक्र करते हुए दायर की है। यह याचिका राज्य सभा सांसद प्रताप सिंह बाजवा और डॉं. अमिय हर्षाद्रे याग्निक के हवाले से दायर की गई है। हालांकि याचिका तो दायर कर दी गई है लेकिन उसे अभी कोई नंबर नहीं दिया गया है। मालूम हो कि रजिस्ट्रार इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के चीफ जस्टिस से ऑर्डर नहीं ले सकते हैं। सुप्रीम कोर्ट में 45 सालों से यह परंपरा चली आ रही है कि जिस मामले को मुख्य न्यायाधीश सूचीबद्ध नहीं कर सकते हैं उसका निर्धारण दूसरे नंबर के वरिष्ठ जज कर सकते हैं। इस मामले में वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कहा है कि इसी प्रकार के एक मामले में सुप्रीम कोर्ट 2013 में यह फैसला दे चुका है।

अब आप इसी से अंदाजा लगा सकते हैं कि ये लोग कितने नीचे स्तर तक जाकर साजिश कर सकते हैं न्यायपालिका के खिलाफ। इस मामले में वरिष्ठ वकील हरीश साल्वे ने सही कहा था कि सुप्रीम कोर्ट में बैठे ऐसे साजिशकर्ताओं के साथ कड़ाई से पेश आना चाहिए।

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