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भ्रष्टाचार के आरोपी पत्रकार उपेंद्र राय ने India speaks daily और उसके प्रधान संपादक संदीप देव को भेजा 100 करोड़ का नोटिस! मिलेगा करारा जवाब!

भ्रष्टाचार के आरोपी पत्रकार उपेंद्र राय ने pgurus.com से मुंह की खाने के बाद अब India Speaks Daily तथा उसके संपादक संदीप देव के नाम मानहानि के 100 करोड़ का नोटिस भेजा है। वो भी तब जब indiaspeaksdaily.com स्पष्ट तौर पर अपनी स्टोरी में जिक्र कर चुका है कि ये सारे तथ्य पीगुरु से लिए गए हैं जिसकी पुष्टि इंडिया स्पीक्स नहीं करता है। लेकिन अब हमारी लीगल टीम उसके कानूनी नोटिस का पूरजोर ढंग से जवाब देगी, क्योंकि हमारा संकल्प ही लोकतंत्र का चौथा स्तंभ माने जाने वाले मीडिया में व्याप्त भ्रष्टाचार को उजागर करना है।

उपेंद्र राय की ओर से उसके वकील अक्षय मलिक ने इंडिया स्पीक्स डेली को जो नोटिस भेजा है, उसमें कहा गया है-

* आप तत्काल अपनी वेबसाइट India Speaks Daily से उपेंद्र राय संबंधित खबरों को डिलीट करें।

* आप हमारे क्लाइंट उपेंद्र राय से साफ और बोल्ड अक्षरों में माफी मांगें।

* पीगुरु के न्यूज को आप झूठा लिखें।

* हमारे क्लांट की मानहानि हुई है, इससे उनकी मानसिक प्रताड़ना हुई है इसलिए आप 100 करोड़ का मुआवजा दें।

* हमारे क्लाइंट उपेंद्र राय से संबंधित कोई भी खबर प्रकाशित करने से पूर्व हमसे इजाजत लें।

* इन शर्तो को नहीं मानने पर हम आपके खिलाफ कानूनी कार्रवाई करेंगे और एफआईआर दर्ज कराएंगे।

* यदि आप इन कंडीशन को पूरा नहीं करते हैं तो तत्काल 51 हजार रुपया का जुर्माना भरना होगा।

एक बार फिर हम यह दोहरा देना चाहते हैं कि मीडिया में घुन लगाने वाले उपेंद्र राय जैसे हर भ्रष्टाचार के आरोपी पत्रकारों के खिलाफ हमारी टीम का अभियान जारी रहेगा। हमारी टीम अपने इस अभियान को अंजाम तक पहुंचाने के लिए ना कभी थकेगी और ना कभी झुकेगी। उपेंद्र राय आपको हमें झुकाने के जितनी ताकत लगानी है लगा लीजिए। हम आपके भ्रष्टाचार को उजागर करके ही दम लेंगे। हमारी लीगल टीम आपके भेजे नोटिस का सही जवाब देगी। इंतजार करें।

गौरतलब है कि indiaspeaksdaily.com ने स्वघोषणा (disclaimer) में स्पष्ट रूप से लिखा हुआ है कि इस मामले के सारे तथ्य एक अंग्रेजी वेबसाइट पीगुरु से लिए गए हैं, जिसकी पुष्टि इंडिया स्पीक्स डेली नहीं करता है। दूसरी बात यह कि इसी नोटिस के आधार पर ही उपेंद्र राय ने नोएडा पुलिस स्टेशन में पीगुरु के खिलाफ केस दर्ज कराया था। लेकिन नोएडा पुलिस ने प्राथमिक जांच के बाद उपेंद्र राय की इस शिकायत को खारिज कर दिया था। नोएडा पुलिस इस संदर्भ में एक प्रेस नोट भी जारी कर चुकी है। इस बाबत india speaks daily, उसके संपादक संदीप देव व उपसंपादक संजीव जोशी के नाम भेजी गई उपेंद्र राय की नोटिस कहीं टिकती ही नहीं है। लेकिन दिक्कत है कि उपेंद्र राय जैसे मंद बुद्धि पत्रकार को कानून की समझ थोड़ी भी नहीं है!

ज्ञात हो कि उपेंद्र राय पर भ्रष्टाचार आरोपी पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेनामी आवेदक होने का आरोप है, वह चिदंबरम भी अपनी साख बचाने के लिए इसी प्रकार का हथकंडा अपनाने का प्रयास करता है। पूर्व वित्त मंत्री पी चिदंबरम के बेनामी आवेदक और दलाल के नाम से प्रख्यात पत्रकार उपेंद्र राय की यूपी पुलिस के सामने एक नहीं चली। यूपी पुलिस ने चोरी और सीनाजोरी पर आधारित उनकी शिकायत को खारिज कर दिया है। दरअसल राय ने अपने खिलाफ छपे आलेख के कारण India speaks daily से पूर्व Pgurus वेबसाइट के खिलाफ आपराधिक मानहानि के लिए एफआईआर दर्ज कराई थी। लेकिन यूपी पुलिस ने जांच के बाद उनकी शिकायत में कोई तथ्य नहीं होने की वजह से उसे खारिज कर दिया।

मुख्य बिंदु

* Pgurus वेबसाइट के खिलाफ की गई शिकायत को यूपी पुलिस ने किया खारिज
* एक बार फिर उपेंद्र राय की चालबाजी के प्रयास को मुंह की खानी पड़ी
* वेबसाइट के मालिक श्री अय्यर ने समय पर कार्रवाई करने के लिए यूपी पुलिस का किया धन्यवाद

Pgurus वेबसाइट के मुताबिक उपेंद्र राय की एक और गंदी चालाकी नहीं चली। Pgurus के खिलाफ उसकी झूठी एफआईआर को नोएडा पुलिस ने खारिज कर दिया है। धोखेबाजी, मनी लॉन्ड्रिंग और संदेहास्पद तरीके से संवेदनशील प्रवेश कार्ड पाने का खुलासा करने के लिए जिस प्रकार पीगुरु के खिलाफ केस दर्ज कराया गया है वह बहुत ही घटिया है। उसके इस प्रयास को विफल करने के लिए यूपी पुलिस वाकई में धन्यवाद की पात्र है।

वेबसाइट ने आगे लिखा है कि पहले तो उपेंद्र राय ने 25 अप्रैल को सौ करोड़ रुपये के आपराधिक मानहानि का कानूनी नोटिस भेजा जिसे उचित जवाब के साथ खारिज कर दिया गया। अपने नोटिस में उसने खुद को नई दिल्ली स्थित ग्रेटर कैलाश- भाग एक का निवासी बताया था। जबकि 27 अप्रैल को यूपी के सेक्टर-20 में दर्ज कराई गई अपनी एफआईआर में खुद को जलवायु विहार, नोएडा का निवासी बताया है। उसकी इस करतूत से यह स्पष्ट हो जाता है कि वह इस मामले में संबंधित सभी एजेंसियों को मूर्ख बना रहा था। दूसरी बात यह हो सकती है कि दिल्ली में जहां वह रहता है वहां के पुलिसवालों को अपना चेहरा दिखाना नहीं चाहता होगा, और इसलिए उसने नोएडा पुलिस को बेवकूफ बनाने का प्रयास किया।

Pgurus वेबसाइट के खिलाफ उपेंद्र राय ने भारतीय दंड संहिता की धारा 420 और 509 और आईटी सेक्शन 66 के तहत केस दर्ज किया है। ताज्जुब है कि किसी प्रकाशित आलेख पर धारा 420 कैसे लग सकता है जबकि यह धारा ठगी और धोखाधड़ी करने पर लगाई जाती है। इसी प्रकार धारा 509 तब लगाई जाती है जब किसी महिला के खिलाफ अपराध हुआ हो। और तीसरा धारा जो लगाई है वह सूचना तकनीक का मामला, ये धारा कंप्यूटर हाइक होने पर लगाई जाती है।

इस वेबसाइट ने ऐसी कई रिपोर्ट छापी है जिसमें कई सेल कंपनियों के एकाउंट से उपेंद्र राय के एकाउंट में बहुत ही अधिक मात्रा में पैसे को जाते हुए दिखाया गया है। 2014 से 17 के बीच व्हाईट लायन रीयल इस्टेट डेवलपर्स तथा जैसी कंपनियों के अलावा 19 हाउसिंग लोन्स दिखाए गए हैं। वेबसाइट ने दावा किया है कि उसने वही मामले की रिपोर्ट छापी है जिसे जांच एजेंसियों ने मनी लाउंड्रिंग के रूप में पाया है।

इतना ही नहीं ऐसी 26 कंपनियां है जिसने उपेंद्र राय की क्लीयर वाटर सॉल्युशन, एचएसबीएल कोऑपरेटिव जैसी कंपनियों में पैसे भेजें हैं। वेबसाइट के पास उपलब्ध दस्तावेज के मुताबिक इन 26 कंपनियों ने करीब 100 करोड़ रुपये उपेंद्र राय की कंपनियों में डाले हैं। अब सवाल उठता है कि क्या उपेंद्र राय बता सकते हैं कि वे ऐसा कौन सा काम करते हैं कि उनके पास इन 26 कंपनियों के इतने पैसे आए हैं? जबकि उन्होंने खुद ही अपने कानूनी नोटिस में बता रखा है कि वह एक ईमानदार पत्रकार हैं। उन्होंने तो पीआईबी एक्रेडिएशन के लिए प्रेस इनफॉरमेशन ब्यूरो के सामने यह घोषणा भी कर रखी है कि वह एक फुल टाइम पत्रकार हैं। एक सवाल यहां भी जिसका जवाब देना उनके लिए काफी मुश्किल हो सकता है कि आखिर एक पत्रकार कैसे अपने एकाउंट में इतना पैसा रख सकता है? और एक पत्रकार देश के अन्य शहरों में इतनी संपत्ति कैसे अर्जित कर सकता है?

उपेंद्र राय द्वारा Pgurus के खिलाफ दायर केस के बाद भाजपा के वरिष्ठ नेता सुब्रमण्यम स्वामी ने 28 अप्रैल को ट्वीट किया। अपने ट्वीट में उन्होंने कहा कि मैं जानता हूं कि रावण का जन्म नोएडा में हुआ था, लेकिन क्या सेक्टर 20, नोएडा के एसएचओ एक ऐसे व्यक्ति की शिकायत पर पीगुरु जैसे प्रतिष्ठित वेबसाइट के खिलाफ केस दर्ज करेगें जिस सीबीआई ने यूसीएम घोषित कर रखा है।

इंडिया स्पीक्स डेली का पक्ष

* इंडिया स्पीक्स डेली उपेंद्र राय और उसके वकील के सारे दावों को खारिज करता है।

श्री उपेन्द्र राय को इंडिया स्पीक्स डेली का जवाब

* जब इस खबर को मूल रूप से प्रकाशित करने वाले पीगुरु के खिलाफ ही उपेंद्र राय की शिकायत पुलिस ने खारिज कर दी है तो फिर वह किस आधार पर इंडिया स्पीक्स डेली से यह उम्मीद करते हैं कि हम इस खबर को हटाएं?

* हम स्पष्ट कर चुके हैं कि हमने पूरी खबर साभार पीगुरु से ली थी। तथ्यों को लेकर हमने किसी तरह का अपना दावा पेश नहीं किया था। जब यह खबर अभी भी पीगुरु पर है और नोएडा पुलिस द्वारा उपेंद्र राय की शिकायत खारिज हो चुकी है तो फिर उपेंद्र राय का कोई पक्ष या दावा नहीं बनता है।

* रही मानहानि की बात तो फिर कानून को गुमराह करने वाले व्यक्ति की क्या मानहानि? सुप्रीम कोर्ट ने अपने निर्णय में स्पष्ट कहा है कि उपेंद्र राय जैसे लोग आदतन साफ-सुथरी जांच में अड़ंगा डालते हैं। वहीं जांच एजेंसी सीबीआई उसे- UCM-Undesirable contect man की सूची में शामिल कर चुका है। अर्थात् उपेंद्र राय वो पत्रकार हैं, जिससे संपर्क कर कोई भी अधिकारी दागी हो जाएगा! फिर ऐसे पत्रकार का क्या मान और क्या उसकी हानि?

* उपेंद्र राय और उसके वकील से हम यह स्पष्ट कहना चाहते हैं कि वह हमारे इस लेख को ही कानूनी जवाब समझें। हम उनकी गीदड़ भभकियों से डरने वालों में से नहीं है। हम उनका मुकाबला कानूनी रूप से करेंगे। हमारी लीगल टीम इसके लिए तैयार है।

* संविधान का अनुच्छेद-19 हमें अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता देता है और हम एक मीडिया संस्थान होने के नाते इसकी जिम्मेवारी समझते हुए इसका निर्वहन करते हैं।

धन्यवाद!
संदीप देव
प्रधान संपादक
इंडिया स्पीक्स डेली

उपेन्द्र राय से सम्बंधित खबरों के लिए नीचे पढें:

1- पत्रकारिता की आड़ में एक पत्रकार ने खड़ा किया दौलत का अंबार! उसकी दलाली पर फिदा पी. चिदंबरम ने उसे बनाया अपने साम्राज्य का राजदार!

2- CBI की Undesirable Contact Men सूची में शामिल पत्रकार को किसकी शह पर इश्यू किया गया PIB कार्ड ?

नोट: यह पूरी खबर https://www.pgurus.com/ पर दर्ज सूचनाओं के आधार पर साभार लिखी गयी है। India speaks daily इसमें से किसी भी तथ्य की पुष्टि का दावा नहीं करता है।

URL: upendra rai send legal notice to india speaks daily editor-in-chief sandeep deo, will get fitting reply

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