बंगाल में चुनावी हिंसा और ममता बनर्जी का अधिनायकवाद!

नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (NCRB) के के आंकड़ों अनुसार, 2013 में बंगाल में राजनीतिक कारणों से 26 लोगों की हत्या हुई थी, जो किसी भी राज्य से अधिक थी। वर्ष 2015 में राजनीतिक झड़प की कुल 131 घटनाएं दर्ज की गई थीं, जिसमें 184 लोगों की हत्या हुई। वर्ष 2016 में बंगाल में राजनीतिक कारणों से झड़प की 91 घटनाएं , जिसमें 205 लोग हिंसा के शिकार होकर मारे गये। गौर कीजिए कि यह सब ममता बनर्जी के शासन काल में हुआ है। मरने वालों में सबसे ज्यादा भाजपा के कार्यकर्ता हैं।

सन 1997 में वामदल की सरकार में गृहमंत्री रहे बुद्धदेब भट्टाचार्य ने विधानसभा मे जानकारी दी थी कि वर्ष 1977 से 1996 तक पश्चिम बंगाल में 28,000 लोग राजनीतिक हिंसा में मारे गये थे। ये आंकड़े राजनीतिक हिंसा की भयावह तस्वीर पेश करते हैं।


बंगाल में 1996 के बाद भी राजनीतिक हत्याएं खूब हुई। एक आंकड़ों के मुताबिक पश्चिम बंगाल में 1977 से 2014 तक करीब-करीब 54 हजार राजनीतिक कार्यकर्ताओं और स्थानीय लोगों की हत्या हो चुकी है। अपने विरोधी विचारधारा वाले लोगों की हत्या करने में पहले कम्युनिस्ट पार्टी और अब तृणमूल कांग्रेस के कार्यकर्ता शामिल रहे हैं।

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