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इस्लामिक आक्रमकता के क्या कारण हैं इस्लामिक आक्रमकता से बचने के लिए भारत को क्या करना चाहिए

दीपक कुमार द्विवेदी दुनियाभर मे सिंतबर 2001 के बाद 13000 हजार से अधिक आंतकवादी हमले हो चुके हैं इन हमलों मे हजारों निर्दोष नागरिक लहूलुहान हो गए हैं और जाने कितनो की जान चली गई है कत्लेआम करने कोई दैत्य नहीं थे बल्कि मुसलमान थे वो मुसलमान जो अपने मजहब के पक्के थे और ईमान का पालन करने के लिए सामूहिक नरसंहार जैसी वारदातों को अंजाम दे रहे हैं इन पक्के मुसलमानों की तरह सोच रखने वाले दुनिया मे अभी भी करोड़ों और मजहब के नाम पर ऐसा ही नरसंहार करने के लिए तैयार है

मुसलमान असहिष्णु श्रेष्ठतावादी स्वेच्छाचारी अराजक हिंसक होते है वे उद्दंड होते है और यदि कोई उनकी बात बात काट को काट या उनको प्रमुखता व सम्मान देकर व्यवहार न करे तो वो फट पड़ते हैं जबकि वे खुद को दुसरो को अपशब्द कहते रहते हैं और दूसरे धर्मावलंबियों संप्रदायो या पंथों के लोगों के अधिकारो का हनन करते हैं !

इस्लाम एक बुरी आस्था है इस बुराई का स्रोत इस्लाम पवित्र ग्रंथों के अशुद्ध अर्थो मे नही मिलता हैं बल्कि शुद्ध अर्थो मे मिलता है दुनिया मे इस्लाम के आलवा किसी कारण से इतना रक्त नही बहाया गया है कुछ इतिहासकारों के मुताबिक अकेले भारत मे ही इस्लाम की तलवार से 10 करोड़ हिंदुओं को मौत के घाट उतार दिया गया फारस मिस्र और सभी देश जहां लूटेरे मुसलमानो का आक्रमण हुआ लाखों लोगो काट डाला गया गैर मुसलमानों के सामूहिक कत्ल सिलसिला उस वक्त से तो चला हैं ही जब ये लूटेरे हमला कर रहे थे इसके बाद भी सदियों तक यही जारी रहा है ये रक्तपात सिलसिला आज भी जारी है

(1 )इस्लाम का मूल तत्व क्या है दुनिया भर मे जितने शोध हुए उससे पता चलता है कि इस्लाम के मूल मे झूठ छल प्रपंच मक्कारी और काम वासना हैं और इस्लाम समेत जितने अब्राहिमक मजहब हैं सबका मूल उनका काल बोध हैं (2)आसमानी किताब की 26 खूनी आयत

1-V.erse 9 Surah 5 فَاِذَاانْسَلَخَالۡاَشۡهُرُالۡحُـرُمُفَاقۡتُلُواالۡمُشۡرِكِيۡنَحَيۡثُوَجَدْتُّمُوۡهُمۡوَخُذُوۡهُمۡوَاحۡصُرُوۡهُمۡوَاقۡعُدُوۡالَهُمۡكُلَّمَرۡصَدٍ​ ۚفَاِنۡتَابُوۡاوَاَقَامُواالصَّلٰوةَوَاٰتَوُاالزَّكٰوةَفَخَلُّوۡاسَبِيۡلَهُمۡ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ

अर्थ फिर, जब हराम के महीने बीत जाऐं, तो ‘मुश्रिको‘ को जहाँ-कहीं पाओ कत्ल करो, और पकड़ो और उन्हें घेरो और हर घातकी जगह उनकी ताक में बैठो. फिर यदि वे ‘तौबा‘ कर लें ‘नमाज‘ कायम करें और, जकात दें तो उनका मार्ग छोड़ दो. निःसंदेह अल्लाह बड़ा क्षमाशील और दया करने वाला है.” (पा0 10, सूरा. 9, आयत 5,2ख पृ. 368)

2-Verse 9 Surah 28 يٰۤاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡۤااِنَّمَاالۡمُشۡرِكُوۡنَنَجَسٌفَلَايَقۡرَبُواالۡمَسۡجِدَالۡحَـرَامَبَعۡدَعَامِهِمۡهٰذَا​ ۚوَاِنۡخِفۡتُمۡعَيۡلَةًفَسَوۡفَيُغۡنِيۡكُمُاللّٰهُمِنۡفَضۡلِهٖۤاِنۡشَآءَ​ ؕاِنَّاللّٰهَعَلِيۡمٌحَكِيۡمٌ अर्थ ”हे ‘ईमान‘ लाने वालो! ‘मुश्रिक‘ (मूर्तिपूजक) नापाक हैं.” (10.9.28 पृ. 371)

3- Verse 4 Surah 101 وَاِذَاضَرَبۡتُمۡفِىالۡاَرۡضِفَلَيۡسَعَلَيۡكُمۡجُنَاحٌاَنۡتَقۡصُرُوۡامِنَالصَّلٰوةِ ​ۖاِنۡخِفۡتُمۡاَنۡيَّفۡتِنَكُمُالَّذِيۡنَكَفَرُوۡا​ ؕاِنَّالۡـكٰفِرِيۡنَكَانُوۡالَـكُمۡعَدُوًّامُّبِيۡنًا‏
अर्थ निःसंदेह ‘काफिर तुम्हारे खुले दुश्मन हैं.” (5.4.101. पृ. 239)

4- Verse 9 Surah 123 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡاقَاتِلُواالَّذِيۡنَيَلُوۡنَكُمۡمِّنَالۡكُفَّارِوَلۡيَجِدُوۡافِيۡكُمۡغِلۡظَةً​ ؕوَاعۡلَمُوۡاۤاَنَّاللّٰهَمَعَالۡمُتَّقِيۡنَ अर्थ हे ‘ईमान‘ लाने वालों! (मुसलमानों) उन ‘काफिरों‘ से लड़ो जो तुम्हारे आस पास हैं, और चाहिए कि वे तुममें सखती पायें.” (11.9.123 पृ. 391)

5- Verse 4 Surah 56 اِنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡابِاٰيٰتِنَاسَوۡفَنُصۡلِيۡهِمۡنَارًاؕكُلَّمَانَضِجَتۡجُلُوۡدُهُمۡبَدَّلۡنٰهُمۡجُلُوۡدًاغَيۡرَهَالِيَذُوۡقُواالۡعَذَابَ​ ؕاِنَّاللّٰهَكَانَعَزِيۡزًاحَكِيۡمًا‏ अर्थ जिन लोगों ने हमारी ”आयतों” का इन्कार किया, उन्हें हम जल्द अग्नि में झोंक देंगे. जब उनकी खालें पक जाएंगी तो हम उन्हें दूसरी खालों से बदल देंगे ताकि वे यातना का रसास्वादन कर लें. निःसन्देह अल्लाह प्रभुत्वशाली तत्वदर्शी हैं” (5.4.56 पृ. 231)

6-Verse 9 Surah 23 يٰۤاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَتَّخِذُوۡۤااٰبَآءَكُمۡوَاِخۡوَانَـكُمۡاَوۡلِيَآءَاِنِاسۡتَحَبُّواالۡـكُفۡرَعَلَىالۡاِيۡمَانِ​ ؕوَمَنۡيَّتَوَلَّهُمۡمِّنۡكُمۡفَاُولٰۤـئِكَهُمُالظّٰلِمُوۡنَ‏ अर्थ हे ‘ईमान‘ लाने वालों! (मुसलमानों) अपने बापों और भाईयों को अपना मित्र मत बनाओ यदि वे ईमान की अपेक्षा ‘कुफ्र‘ को पसन्द करें. और तुम में से जो कोई उनसे मित्रता का नाता जोड़ेगा, तो ऐसे ही लोग जालिम होंगे” (10.9.23 पृ. 370)

7- Verse 9 Surah 37 اِنَّمَاالنَّسِىۡٓءُزِيَادَةٌفِىالۡكُفۡرِ​ يُضَلُّبِهِالَّذِيۡنَكَفَرُوۡايُحِلُّوۡنَهٗعَامًاوَّيُحَرِّمُوۡنَهٗعَامًالِّيُوَاطِـُٔـوۡاعِدَّةَمَاحَرَّمَاللّٰهُفَيُحِلُّوۡامَاحَرَّمَاللّٰهُ​ ؕزُيِّنَلَهُمۡسُوۡۤءُاَعۡمَالِهِمۡ​ ؕوَاللّٰهُلَايَهۡدِىالۡقَوۡمَالۡـكٰفِرِيۡنَ अर्थ अल्लाह ‘काफिर‘ लोगों को मार्ग नहीं दिखाता” (10.9.37 पृ. 374)

8-Verse 5 Surah 57 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَـتَّخِذُواالَّذِيۡنَاتَّخَذُوۡادِيۡنَكُمۡهُزُوًاوَّلَعِبًامِّنَالَّذِيۡنَاُوۡتُواالۡكِتٰبَمِنۡقَبۡلِكُمۡوَالۡـكُفَّارَاَوۡلِيَآءَ​ ۚوَاتَّقُوااللّٰهَاِنۡكُنۡتُمۡمُّؤۡمِنِيۡ अर्थ हे ‘ईमान‘ लाने वालो! उन्हें (किताब वालों) और काफिरों को अपना मित्र बनाओ. अल्ला से डरते रहो यदि तुम ‘ईमान‘ वाले हो.” (6.5.57 पृ. 268

9-Verse 33 Surah 61 مَّلۡـعُوۡنِيۡنَ ​ۛۚاَيۡنَمَاثُقِفُوۡۤااُخِذُوۡاوَقُتِّلُوۡاتَقۡتِيۡلً अर्थ फिटकारे हुए, (मुनाफिक) जहां कही पाए जाऐंगे पकड़े जाएंगे और बुरी तरह कत्ल किए जाएंगे.” (22.33.61 पृ. 759)

10- Verse 21 Surah 98 اِنَّكُمۡوَمَاتَعۡبُدُوۡنَمِنۡدُوۡنِاللّٰهِحَصَبُجَهَـنَّمَؕاَنۡـتُمۡلَهَاوَارِدُوۡنَ अर्थ कहा जाऐगा): निश्चय ही तुम और वह जिसे तुम अल्लाह के सिवा पूजते थे ‘जहन्नम‘ का ईधन हो. तुम अवश्य उसके घाट उतरोगे.”

11-Verse 32 Surah 22 وَمَنۡاَظۡلَمُمِمَّنۡذُكِّرَبِاٰيٰتِرَبِّهٖثُمَّاَعۡرَضَعَنۡهَا​ؕاِنَّامِنَالۡمُجۡرِمِيۡنَمُنۡتَقِمُوۡنَ और उस से बढ़कर जालिम कौन होगा जिसे उसके ‘रब‘ की आयतों के द्वारा चेताया जाये और फिर वह उनसे मुँह फेर ले. निश्चय ही हमें ऐसे अपराधियों से बदला लेना है.” (21.32.22 पृ. 736)

12-Verse 48 Surah 20 وَعَدَكُمُاللّٰهُمَغَانِمَكَثِيۡرَةًتَاۡخُذُوۡنَهَافَعَجَّلَلَكُمۡهٰذِهٖوَكَفَّاَيۡدِىَالنَّاسِعَنۡكُمۡ​ۚوَلِتَكُوۡنَاٰيَةًلِّلۡمُؤۡمِنِيۡنَوَيَهۡدِيَكُمۡصِرَاطًامُّسۡتَقِيۡمًا अर्थ अल्लाह ने तुमसे बहुत सी ‘गनीमतों‘ का वादा किया है जो तुम्हारे हाथ आयेंगी,” (26.48.20 पृ. 943)

13 -Verse 8 Surah 69 فَكُلُوۡامِمَّاغَنِمۡتُمۡحَلٰلاًطَيِّبًاۖوَّاتَّقُوااللّٰهَ​ ؕاِنَّاللّٰهَغَفُوۡرٌرَّحِيۡمٌ अर्थ तो जो कुछ गनीमत (का माल) तुमने हासिल किया है उसे हलाल व पाक समझ कर खाओ” (10.8.69. पृ. 359)

14-Verse 66 Surah 9يٰۤاَيُّهَاالنَّبِىُّجَاهِدِالۡكُفَّارَوَالۡمُنٰفِقِيۡنَوَاغۡلُظۡعَلَيۡهِمۡ​ؕوَمَاۡوٰٮهُمۡجَهَنَّمُ​ؕوَبِئۡسَالۡمَصِيۡرُ ‏ अर्थ हे नबी! ‘काफिरों‘ और ‘मुनाफिकों‘ के साथ जिहाद करो, और उन पर सखती करो और उनका ठिकाना ‘जहन्नम‘ है, और बुरी जगह है जहाँ पहुँचे” (28.66.9. पृ. 1055)

15-Verse 41 Surah 27 فَلَـنُذِيۡقَنَّالَّذِيۡنَكَفَرُوۡاعَذَابًاشَدِيۡدًاۙوَّلَنَجۡزِيَنَّهُمۡاَسۡوَاَالَّذِىۡكَانُوۡايَعۡمَلُوۡنَ‏ अर्थ तो अवश्य हम ‘कुफ्र‘ करने वालों को यातना का मजा चखायेंगे, और अवश्य ही हम उन्हें सबसे बुरा बदला देंगे उस कर्म का जो वे करते थे.” (24.41.27 पृ. 865)

16- Verse 41 Surah 28 ذٰلِكَجَزَآءُاَعۡدَآءِاللّٰهِالنَّارُ​ ۚلَهُمۡفِيۡهَادَارُالۡخُـلۡدِ​ ؕجَزَآءًۢبِمَاكَانُوۡابِاٰيٰتِنَايَجۡحَدُوۡنَ‏ अर्थ यह बदला है अल्लाह के शत्रुओं का (‘जहन्नम‘ की) आग. इसी में उनका सदा का घर है, इसके बदले में कि हमारी ‘आयतों‘ का इन्कार करते थे.” (24.41.28 पृ. 865)

17- Verse 9 Surah 111 اِنَّاللّٰهَاشۡتَرٰىمِنَالۡمُؤۡمِنِيۡنَاَنۡفُسَهُمۡوَاَمۡوَالَهُمۡبِاَنَّلَهُمُالۡجَـنَّةَ​ ؕيُقَاتِلُوۡنَفِىۡسَبِيۡلِاللّٰهِفَيَقۡتُلُوۡنَوَيُقۡتَلُوۡنَ​وَعۡدًاعَلَيۡهِحَقًّافِىالتَّوۡرٰٮةِوَالۡاِنۡجِيۡلِوَالۡقُرۡاٰنِ​ ؕوَمَنۡاَوۡفٰىبِعَهۡدِهٖمِنَاللّٰهِفَاسۡتَـبۡشِرُوۡابِبَيۡعِكُمُالَّذِىۡبَايَعۡتُمۡبِهٖ​ؕوَذٰلِكَهُوَالۡفَوۡزُالۡعَظِيۡمُ अर्थ निःसंदेह अल्लाह ने ‘ईमानवालों‘ (मुसलमानों) से उनके प्राणों और उनके मालों को इसके बदले में खरीद लिया है कि उनके लिए ‘जन्नत‘ हैः वे अल्लाह के मार्ग में लड़ते हैं तो मारते भी हैं और मारे भी जाते हैं.” (11.9.111 पृ. 388)

18 -Verse 9 Surah 58 وَمِنۡهُمۡمَّنۡيَّلۡمِزُكَفِىالصَّدَقٰتِ​ ۚفَاِنۡاُعۡطُوۡامِنۡهَارَضُوۡاوَاِنۡلَّمۡيُعۡطَوۡامِنۡهَاۤاِذَاهُمۡيَسۡخَطُوۡنَ‏ अर्थ अल्लाह ने इन ‘मुनाफिक‘ (कपटाचारी) पुरुषों और मुनाफिक स्त्रियों और काफिरों से ‘जहन्नम‘ की आग का वादा किया है जिसमें वे सदा रहेंगे. यही उन्हें बस है. अल्लाह ने उन्हें लानत की और उनके लिए स्थायी यातना है.” (10.9.68 पृ. 379)

19 -Verse 8 Surah 65 يٰۤـاَيُّهَاالنَّبِىُّحَرِّضِالۡمُؤۡمِنِيۡنَعَلَىالۡقِتَالِ​ ؕاِنۡيَّكُنۡمِّنۡكُمۡعِشۡرُوۡنَصَابِرُوۡنَيَغۡلِبُوۡامِائَتَيۡنِ​ ۚ وَاِنۡيَّكُنۡمِّنۡكُمۡمِّائَةٌيَّغۡلِبُوۡۤااَلۡفًامِّنَالَّذِيۡنَكَفَرُوۡابِاَنَّهُمۡقَوۡمٌلَّايَفۡقَهُوۡنَ
अर्थ हे नबी! ‘ईमान वालों‘ (मुसलमानों) को लड़ाई पर उभारो. यदि तुम में बीस जमे रहने वाले होंगे तो वे दो सौ पर प्रभुत्व प्राप्त करेंगे, और यदि तुम में सौ हो तो एक हजार काफिरों पर भारी रहेंगे, क्योंकि वे ऐसे लोग हैं जो समझबूझ नहीं रखते.” (10.8.65 पृ. 358)

20-Verse 5 Surah 51 يٰۤـاَيُّهَاالَّذِيۡنَاٰمَنُوۡالَاتَتَّخِذُواالۡيَهُوۡدَوَالنَّصٰرٰۤىاَوۡلِيَآءَ ​ۘبَعۡضُهُمۡاَوۡلِيَآءُبَعۡضٍ​ؕوَمَنۡيَّتَوَلَّهُمۡمِّنۡكُمۡفَاِنَّهٗمِنۡهُمۡ​ؕاِنَّاللّٰهَلَايَهۡدِىالۡقَوۡمَالظّٰلِمِيۡنَ अर्थ हे ‘ईमान‘ लाने वालों! तुम यहूदियों और ईसाईयों को मित्र न बनाओ. ये आपस में एक दूसरे के मित्र हैं. और जो कोई तुम में से उनको मित्र बनायेगा, वह उन्हीं में से होगा. निःसन्देह अल्लाह जुल्म करने वालों को मार्ग नहीं दिखाता.” (6.5.51 पृ. 267)

21-Verse 9 Surah 2قَاتِلُواالَّذِيۡنَلَايُؤۡمِنُوۡنَبِاللّٰهِوَلَابِالۡيَوۡمِالۡاٰخِرِوَلَايُحَرِّمُوۡنَمَاحَرَّمَاللّٰهُوَرَسُوۡلُهٗوَلَايَدِيۡنُوۡنَدِيۡنَالۡحَـقِّمِنَالَّذِيۡنَاُوۡتُواالۡـكِتٰبَحَتّٰىيُعۡطُواالۡجِزۡيَةَعَنۡيَّدٍوَّهُمۡصٰغِرُوۡنَ अर्थ किताब वाले” जो न अल्लाह पर ईमान लाते हैं न अन्तिम दिन पर, न उसे ‘हराम‘ करते हैं जिसे अल्लाह और उसके रसूल ने हराम ठहराया है, और न सच्चे दीन को अपना ‘दीन‘ बनाते हैं उनकसे लड़ो यहाँ तक कि वे अप्रतिष्ठित (अपमानित) होकर अपने हाथों से ‘जिजया‘ देने लगे.” (10.9.29. पृ. 372

22-Verse 5 Surah 14 وَمِنَالَّذِيۡنَقَالُوۡۤااِنَّانَصٰرٰٓىاَخَذۡنَامِيۡثَاقَهُمۡفَنَسُوۡاحَظًّامِّمَّاذُكِّرُوۡابِهٖفَاَغۡرَيۡنَابَيۡنَهُمُالۡعَدَاوَةَوَالۡبَغۡضَآءَاِلٰىيَوۡمِالۡقِيٰمَةِ​ ؕوَسَوۡفَيُنَبِّئُهُمُاللّٰهُبِمَاكَانُوۡايَصۡنَعُوۡنَ‏ अर्थ 22 ”…….फिर हमने उनके बीच कियामत के दिन तक के लिये वैमनस्य और द्वेष की आग भड़का दी, और अल्लाह जल्द उन्हें बता देगा जो कुछ वे करते रहे हैं. (6.5.14 पृ. 260)

23-Verse 4 Surah 89 وَدُّوۡالَوۡتَكۡفُرُوۡنَكَمَاكَفَرُوۡافَتَكُوۡنُوۡنَسَوَآءً​ فَلَاتَتَّخِذُوۡامِنۡهُمۡاَوۡلِيَآءَحَتّٰىيُهَاجِرُوۡافِىۡسَبِيۡلِاللّٰهِ​ ؕفَاِنۡتَوَلَّوۡافَخُذُوۡهُمۡوَاقۡتُلُوۡهُمۡحَيۡثُوَجَدتُّمُوۡهُمۡ​وَلَاتَتَّخِذُوۡامِنۡهُمۡوَلِيًّاوَّلَانَصِيۡرًا अर्थ वे चाहते हैं कि जिस तरह से वे काफिर हुए हैं उसी तरह से तुम भी ‘काफिर‘ हो जाओ, फिर तुम एक जैसे हो जाओः तो उनमें से किसी को अपना साथी न बनाना जब तक वे अल्लाह की राह में हिजरत न करें, और यदि वे इससे फिर जावें तो उन्हें जहाँ कहीं पाओं पकड़ों और उनका वध (कत्ल) करो. और उनमें से किसी को साथी और सहायक मत बनाना.” (5.4.89 पृ. 237)

24-Verse 9 Surah 14قَاتِلُوۡهُمۡيُعَذِّبۡهُمُاللّٰهُبِاَيۡدِيۡكُمۡوَيُخۡزِهِمۡوَيَنۡصُرۡكُمۡعَلَيۡهِمۡوَيَشۡفِصُدُوۡرَقَوۡمٍمُّؤۡمِنِيۡنَۙ ‏ अर्थ उन (काफिरों) से लड़ों! अल्लाह तुम्हारे हाथों उन्हें यातना देगा, और उन्हें रुसवा करेगा और उनके मुकाबले में तुम्हारी सहायता करेगा, और ‘ईमान‘ वालों लोगों के दिल ठंडे करेगा” (10.9.14. पृ. 369)

25- Verse 3 Surah 151 سَنُلۡقِىۡفِىۡقُلُوۡبِالَّذِيۡنَكَفَرُواالرُّعۡبَبِمَاۤاَشۡرَكُوۡابِاللّٰهِمَالَمۡيُنَزِّلۡبِهٖسُلۡطٰنًا ​​ۚوَمَاۡوٰٮهُمُالنَّارُ​ؕوَبِئۡسَمَثۡوَىالظّٰلِمِيۡنَ मतलब: हम शीघ्र ही इनकार करनेवालों के दिलों में धाक बिठा देंगे, इसलिए कि उन्होंने ऐसी चीज़ों को अल्लाह का साक्षी ठहराया है जिनके साथ उसने कोई सनद नहीं उतारी, और उनका ठिकाना आग (जहन्नम) है. और अत्याचारियों का क्या ही बुरा ठिकाना है.

26- Verse 2 Surah 191 وَاقۡتُلُوۡهُمۡحَيۡثُثَقِفۡتُمُوۡهُمۡوَاَخۡرِجُوۡهُمۡمِّنۡحَيۡثُاَخۡرَجُوۡكُمۡ​ وَالۡفِتۡنَةُاَشَدُّمِنَالۡقَتۡلِۚوَلَاتُقٰتِلُوۡهُمۡعِنۡدَالۡمَسۡجِدِالۡحَـرَامِحَتّٰىيُقٰتِلُوۡكُمۡفِيۡهِ​ۚفَاِنۡقٰتَلُوۡكُمۡفَاقۡتُلُوۡهُمۡؕكَذٰلِكَجَزَآءُالۡكٰفِرِيۡنَ मतलब: और जहां कहीं उनपर क़ाबू पाओ, क़त्ल करो और उन्हें निकालो जहां से उन्होंने तुम्हें निकाला है, इसलिए कि फ़ितना (उपद्रव) क़त्ल से भी बढ़कर गम्भीर है. लेकिन मस्जिदे-हराम (काबा) के निकट तुम उनसे न लड़ो जब तक कि वे स्वयं तुमसे वहां युद्ध न करें. अतः यदि वे तुमसे युद्ध करें तो उन्हें क़त्ल करो – ऐसे इनकारियों का ऐसा ही बदला है.

उपरोक्त आयतों से स्पष्ट है कि इनमें ईर्ष्या, द्वेष, घृणा, कपट, लड़ाई-झगड़ा, लूटमार और हत्या करने के आदेश मिलते हैं. इन्हीं कारणों से देश व विश्व में मुस्लिमों व गैर मुस्लिमों के बीच दंगे हुआ करते है !

3- दारुल अमन : دارالامن House of Safety: बचाव का घर यह उस भूभाग को कहा जाता है, जहाँ अधिकांश गैर मुस्लिम रहते हों , लेकिन मुसलमानों को भी कोई न कोई अधिकार दिया गया हो या जहाँ पर इस्लाम को खतरा होने का भय नहीं लगे। इस्लाम इस वर्गीकरण के अनुसार भारत भी एक “दारुल अमन है। क्योंकि यहाँ मुसलमानों को हिन्दुओं से अधिक अधिकार प्राप्त हैं !

4- दारुल हरब : دارالحرب House of War: युद्ध का घर ,यह उस भूभाग को कहा जाता है जहाँ गैर मुस्लिमों की संख्या अधित हो या गैर मुस्लिम सरकारे हों, या जहाँ पर प्रजातंत्र (Democracy) चलती हो या जिनका मुस्लिम देशों से विवाद हो और यदि दारुल हरब के लोग दारुल इस्लाम में जाएँ तो उनको निम्न दर्जे का व्यक्ति या दिम्मी Dimmi मानकर जजिया लिया जाये.. या कोई अधिकार नहीं दिया जाए.

5- दारूल इस्लाम Peace: इसको दारुल तौहीद دارُالتوحيد भी कहा जाता है, यह उस भूभाग को कहा जाता है जहाँ पर इस्लामी हुकूमत होती हो, और जहाँ पर मुसलमान निडर होकर अपनी गतिविधियाँ चला सकें. दारुल इस्लाम मुसलमानों गढ़ होता है. अबू हनीफा ने यह नाम कुरान की इन आयतों से लिया था। “अल्लाह तुम्हें सलामती के घर (दारुल इस्लाम ) की ओर बुलाता रहता है, ताकि तुम सीधे रास्ते पर चलो ” सूरा -यूसुफ 10 :25 (इसी आयत की तफ़सीर में लिखा है “जहाँ पर मुसलमानों की हर प्रकार की सुरक्षा हो और जहाँ से वह जिहाद करें तो उन पर कोई आपत्ति नहीं आये, इसी तरह लिखा है “और अल्लाह मुसलमानों के लिए ऐसा सलामती का घर (दारुल इस्लाम) चाहता है जहाँ पर उनके मित्र और संरक्षक मौजूद हों

“सूरा-अल अनआम6 :128 इसी दारुल इस्लाम का सपना दिखा कर जिन्ना ने मुसलमानों को पाकिस्तान बनवाने के लिए प्रेरित किया था। क्योंकि जिन्ना की नजर में भारत ناپاك नापाक (अपवित्र) देश था और जिन्ना पाक پاك (पवित्र) देश پاكِستان बनाना चाहता था. (ये बात और है कि खुद जिन्ना हिन्दू रक्त का वंशज था और न केवल सिगरेट पीता था, बल्कि लन्दन में पोर्क (सूअर का माँस) भी खाता था)

6- दारुल हुंदा :دارالهنُنده House of Calm : विराम का घर, यह उस क्षेत्र को या उस देश को कहा जाता है, जिसका किसी मुस्लिम देश से युद्ध या झगडा होता रहता हो. लेकिन किसी कारण से लड़ाई बंद हो गयी हो और भविष्य में या तो समझौते की गुंजायश हो या फिर युद्ध की संभावना हो .और यह एक प्रकार की Wait and Watch की स्थिति होती है !

7- दारुल अहद :دارُالعهد House of Truce: युद्ध विराम का घर..:- इसे दारुल सुलह دارالسُلح या House of Treaty भी कहा जाता है यह उन देशो को कहा जाता है, जिन्होंने मुस्लिम देशो से किसी प्रकार की कोई संधि या समझौता कर लिया हो और जिसे दोनो देशों के आलावा दुसरे मुस्लिम देशो ने स्वीकार कर लिया हो

8- दारुल दावा دارُالدعوة House of Invitation: आह्वान का घर… यह उन देशों या उन क्षेत्रों या उन इलाकों को कहा जाता है जहाँ गैर-मुस्लिम हों और जिनको मुसलमान बनाने के लिए कोशिश करना जरुरी हो. यहाँ के लोग इस्लाम के बारे में अधिक नहीं जानते हो. (ऐसे भूभाग को दारुल जहलिया دارالجاهلِية या House of ingorant भी कहा जाता है) और फिर किसी भी उपाय से उस भूभाग को दारुल इस्लाम में लेन की योजनाएं बनाई जाती है या फिर उस क्षेत्र को कहा जाता है जहाँ के मुसलमान कट्टर नहीं होते हैं और उनको कट्टर बनाने की जरूरत हो, ताकि उनको जिहादी कामों में लगाया जा सके, और इस काम के लिए उस क्षेत्रों में जमातें भेजी जाती है.

तात्पर्य यह है कि मुसलमानों ने विश्व के देशो या किसी देश के भूभाग या किसी क्षेत्र को जो अलग अलग दार या Houses में बाँट कर विभाजित किया है. वह राजनीतिक, या भौगोलिक सीमाओं के आधार पर नहीं है .इस्लामी परिभाषा में “दार “कोई देश, प्रान्त, जिला या उसका कोई हिस्सा भी हो सकता है, और इन्हीं दार के house के हालात देख कर मुसलमान अपनी रणनीतियाँ तय करते है… जैसे कहीं तो शांत हो जाते हैं और कही आतंकवाद को तेज कर देते हैं. इस्लाम का एकमात्र उद्देश्य और लक्ष्य इन सब “दार “को दारुल इस्लाम के दायरे में लाने का है, ताकि दुनिया में “विश्व में इस्लाम राज्य Pan Islamic State” की स्थापना हो सके. मुसलमानों की तरह Catholic Church ने भी देशों को बाँट रखा है. आज इस बात की आवश्यकता है कि हम इस्लाम की कुटिल नीतियों और नापाक मंसूबों विफल करने का यत्न करते रहें, और देश को “दारुल इस्लाम” बनाने से रोकने के लिए पूरी ताकत लगा दें, और इस पवित्र कार्य में लोगों को उत्साहित करें और हरेक साधनों का उपयोग करें… तभी देश और धर्म बच सकेगा !

(4)इस्लामिक अलतकिया क्या है


मुसलमानों का सबसे ताकतवर हथियार है ‘अल-तकिया’। इसे पढ़कर आप भी मानेंगे कि किसी भी मुल्ले की बातों पर यकीन नहीं करना चाहिए।

अल तकिया ने इस्लाम के प्रचार प्रसार में जितना योगदान दिया है, उतना इनकी सैंकड़ों हजारों कायरों की सेनायें नहीं कर पायीं ।

अल-तकिया के अनुसार यदि इस्लाम के प्रचार – प्रसार अथवा बचाव के लिए किसी भी प्रकार का झूठ, धोखा करना पड़े, या माफी मांगनी पड़े – सब धर्म स्वीकृत है। यह सब धर्म स्वीकृत तब भी है जब यह सब माफी मांगना काफिरों से भी किया जाए।

मुसलमानों के विश्वासघात के अन्य उदाहरण, जो कि अल तकिया का प्रयोग कर के हुआ है।

  1. मुहम्मद गौरी ने 17 बार क़ुरान की कसम खाई थी कि भारत पर हमला नहीं करेगा, लेकिन हमला किया ।
  2. अलाउद्दीन खिलजी ने चित्तोड़ के राणा रतन सिंह को दोस्ती के बहाने बुलाया फिर क़त्ल कर दिया ।
  3. औरंगजेब ने शिवाजी को दोस्ती के बहाने आगरा बुलाया फिर धोखे से कैद कर लिया ।
  4. औरंगजेब ने क़ुरान की कसम खाकर श्री गोविन्द सिंह को आनंदपुर से सुरक्षित जाने देने का वादा किया था। फिर हमला किया था।
  5. अफजल खान ने दोस्ती के बहाने शिवाजी की हत्या का प्रयत्न किया था।
  6. मित्रता की बातें कहकर पाकिस्तान ने कारगिल पर हमला किया था ।

ये ऐसी स्थिति है जिसको मुसलमान खुद समझ नहीं पा रहे हैं कि इतनी जल्दी उनकी पोल कैसे खुल गई। सिर्फ भारत की बात नहीं दुनिया के हर कोने में मुसलमानों को शक की नज़र से देखा जा रहा है। आखिर वैश्विक आतंकवाद की उत्पत्ति भी तो इस्लाम और आसमानी किताब क़ुरान से ही हुई है। मुसलमान झूठ बोलेगा क्योंकि क़ुरान के 3:28 में लिखा है कि सिर्फ अपने फायदे के लिए, और जान बचाने के लिए गैर मुसलमानों से दोस्त होने का ढोंग करो दिल से कुछ मत करो। क़ुरान में 16:102, 66:2, 40:28, 2:225, 3:54; सहिह बुखारी के 84:64-65 में इन्हीं सरी बातों को कहा गया है। क़ुरान में कहा गया है कि अल्लाह ने झूठ और मक्कारी का मनाही नहीं किया हुआ है। क़ुरान कहता है कि काफिरों से झूठ बोलो, धोखा दो, काफिरों का धोखे से खून भी कर दो, यह सब कुरान में माफ है – और पाक (अल्लाह का काम, नेक काम, पुण्य कर्म) काम है।

(5)इस्लामिक जेहाद के प्रकार 1 सेक्स जेहाद (लव जिहाद ) 2राजनैतिक जेहाद 3 लैंड जेहाद 4 रोजगार जिहाद 5 घुसपैठ 6 जिहाद रेप जिहाद 7 जनसंख्या जिहाद 8 बुद्धिजीवि जिहाद जिहाद इस्लाम में जो आवस्यक है जिससे इस्लाम को जाना जाता है यानी प्रत्येक मोमिन को करणीय है नमाज, जकात, हज, रोजा और इन सबके लिए जिहाद— जिहाद का वास्तविक अर्थ है संघर्ष करना, युध्द जिहाद यांनी पवित्र युद्ध है जिहाद, “इस्लामिक सत्ता” की विस्तार के लिए जिहाद, जिहाद के बारे बड़ा ही भ्रम है सबसे पहले “बुद्धिजीवी जिहाद” को हमे समझना होगा प्रत्येक “इस्लामिक स्कालर” अपने पन्थ के मदरसों के अनुसार परिभाषित करता है

कुछ स्कालर जिहाद का अर्थ करते हैं कि दीन दुखियों की मदद करना, महिलाओं की सुरक्षा करना, बुराई के खिलाफ संघर्ष, अपने अन्दर की बुराई के खिलाफ संघर्ष जबकि जो पूरे विश्व में जो इस्लामिक व्यवहार दिखाई दे रहा है वह इसके बिल्कुल अलग विपरीत इसलिए आज सम्पूर्ण विश्व में हिंसा, हत्या का पर्याय ही ‘इस्लाम’ हो गया है लेकिन ‘इस्लामिक स्कालर’ बुद्धिजीवी जिहाद द्वारा गलत को सही परिभाषित करते नहीं थक रहे, भारत में इस्लामिक शासन जिहाद का ही एक हिस्सा था सूडान में जिहाद द्वारा 40 लाख लोगों को अमानवीयता यातना देकर बेघर कर दिया गया

लेकिन इस्लामिक विद्वान जैसे मौलाना बदरुद्दीन, अभिनेता आमिर खान, नसरुद्दीन साह, शाहरुख खान, संगीतकार जावेद अख्तर, राजनेता अकबरुद्दीन ओवैसी, गुलाम नबी आजाद, आज़म खान, फारुख अब्दुल्ला इत्यादि विश्व के मानव समाज को अंधेरे में रखने का प्रयास करते रहते हैं लेकिन बहुत सारे ‘मुस्लिम स्कालर’ इसके अतिरिक्त विचार हीनहीं रखते बल्कि उनके पक्ष में संघर्ष करते भी दिखाई देते हैं, लेकिन जो बुद्धिजीवी स्कालर इस्लामिक (आतंकी जिहाद) का विरोध करते दिखते हैं जैसे तारिक फतेह, सलमान रुश्दी, तस्लीमा नसरीन, सलाम आजाद (ठीक है) ये सब लोग इस्लामी आतंकियो के हमेसा निशाने पर रहते हैं बहुतों को अपना जीवन बचाने के लिए अपने घर व देश की तिलांजलि देनी पड़ी ।
जिहाद के प्रकार

इस्लामी जगत में कुरान के बाद सर्बाधिक महत्व हदीश को दिया जाता है कभी कभी तो हदीश को ही प्रमुखता दी जाती है क्योंकि मुहम्मद साहब ने अपने जीवन में जो जो किया वही हदीश है यानी मुहम्मद की जीवनी इस प्रकार जो मुहम्मद साहब ने किया उसे किसी प्रकार करना उस उद्देश्यों को प्राप्त करना उसके लिए जो भी रास्ता हो नैतिक अथवा अनैतिक उन सभी रास्तों को जेहाद कहा जाता है, इसके दो प्रकार है 1- ‘अल अकबर जिहाद’ जो बड़े उद्देश्यों के लिए किया जाता है

काफ़िरों से युद्ध उनके देश पर हमला इत्यादि 2- ‘जेहाद अल असगर’ इसे छोटा मोटा काम के लिए किये जाते हैं, आज जो इस्लाम धर्म को जानने वाले हैं वे हदीश के अनुसार जिहाद कर रहे हैं वह जिहाद इस प्रकार है अविस्वासी के खिलाफ संघर्ष, लव जिहाद, लैंड जिहाद, जनसंख्या जिहाद, रेप जिहाद, बुद्धिजीवी जिहाद, हत्या हिँसा जिहाद, लूट जिहाद, सेक्स जिहाद, धर्मांतरण जिहाद, घुसपैठ जिहाद, राजनीतिक जिहाद ऐसे सौ प्रकार के जिहाद हैं और इन सब प्रकार से इस्लाम में इस पवित्र युध्द से जिहादियों को जन्नत में 72 हूरें मिलती हैं, इसलिए किसी भी आतंकी हमलों, मुसलमानों द्वारा बलात्कार, लव जिहाद व धर्मान्तरण पर कोई मुफ्ती या मौलाना कुछ भी बोलने से बचता है ।
1-लव जिहाद

वर्तमान में लव जिहाद पूरे भारत को अपने गिरफ्त में ले रखा है एक आँकड़े के अनुसार प्रत्येक वर्ष एक लाख हिन्दू, ईसाई लड़कियों को लव जिहाद के माध्यम से शिकार बनाया जाता है यह लव जिहाद शब्द किसी हिंदू वादी संगठन ने नहीं दिया है इसे केरल, कर्नाटक में उच्च न्यायालय के जजों ने बताया कि ये लव नहीं लव जिहाद है, मस्जिद व मदरसों की योजना से महिला कॉलेज के सामने सौंदर्य प्रसाधन की दुकान, मोबाईल रिचार्ज करने की दुकान खुलवाना, प्रत्येक मस्जिदों मदरसों में बाइक उपलब्ध कराने की योजना, पंचर बनाने, दाढ़ी वनाने वाले लड़कों को कपड़े मोबाईल उपलब्ध करा हिन्दुओं के अच्छे घरों की लड़कियों को चिन्हित कर पीछे लगाना फिर इस्लामिक देशो, मुत्ताह विवाह, मानव बम इत्यादि के लिए उपयोग करना प्रतिदिन अखबारों में समाचार आते रहते हैं हिंदू समाज में अपनी मर्यादा बचाने में इसकी चर्चा नहीं करता।
2-लैंड जिहाद

जिस प्रकार लव जिहाद पूरे भारत को गिरफ्त में ले रखा है उसी प्रकार लैंड जिहाद भी है बांग्लादेशी घुसपैठियों ने झारखंड, बिहार में अपना कार्य बड़ी ही योजना से कर रहे हैं बिहार के किशनगंज, अररिया, पूर्णिया, कटिहार झारखंड के साहेबगंज गोड्डा, दुमका इत्यादि जिलों में बंगालियों की बड़ी संख्या में जमीने हैं अधिकांश बँगाली प.बंगाल बस गए हैं यहाँ के मुसलमानों को इन सब की जानकारी होने के कारण इन घुश्पैठियों को इन्हीं जमीनों में बसना फिर धीरे-धीरे लेखपालों- सचिव को घुस देकर आधार कार्ड बनवाना, वनवासियों की जमीनों के बिक्री पर प्रतिबंध होने के कारण ये घुष्पैठिये उनकी लड़कियों को फंसा विवाह कर उनकी जमीन पर कब्जा करने की प्रक्रिया उनका इस्लामी करण करना जिससे बिहार,झारखंड का जनसंख्या का संतुलन बिगड़ गया है परंपरागत तीज त्योहारों पर आक्रमण करना आये दिन हो रहा है, रेलवे स्टेशन, रेलवे लाइन के बगल वाली खाली ज़मीनों पर अधिकार पूर्वक झुग्गी झोपड़ी लगाना जिससे समाजिक सुरक्षा को खतरा उत्पन्न हो गया है।
3-रोजगार जिहाद

बिहार, झारखंड और प.बंगाल गरीबो के रोजगारों पर जबरदस्त हमला कर रहे हैं इधर जितनी भी लेमन चाय ट्रेनों में बेच रहे हैं, सड़क के किनारे जो भी टायर बनाने, पंचर वनाने वाले, बाल बनाने वाले नाई, मकान बनाने वाले मजदूर- राजमिस्त्री, गाड़ी बनाने वाले मिस्त्री, इधर संगठित तरीके से रोहंगिया घुश्पैठियो जो देश के सैट राज्यों में फ़ैल चुके है को रोजगार देने समुचित व्यवस्था के लिए प्रत्येक सहरों में मुगफली (बदाम) बेचने के लिए ठेला उपलब्ध कराने, कम पूजी लगाकर सड़कों के किनारे फल, सब्जी व अन्य रोजगार करवाने के लिए कुछ इस्लामिक घुश्पैठियों का गिरोह सक्रिय है, एक तो वैसे भी बेरोजगारी मुह बाएं खड़ी है दूसरी तरफ इस प्रकार का जिहाद जारी है।
4_बुद्धिजीवी जिहाद

देश के अंदर अर्बन नक्सलियों के समान इस्लामिक जिहादी भी हैं वे अपने अपने तरीके से इस्लामिक आतंकवाद को जस्टिफाई करने का काम करते रहते हैं जैसे फ़िल्म अभिनेता आमिर खान, सलमान खान, शाहरुख खान या अन्य कोई सभी को गणेश जी, शंकर जी या किसी देवी देवताओं पर दूध चढ़ाना अच्छा नहीं उसका गलत तरीके से ब्याख्या, किसी भी सिनेमा में हिंदुओं की भावनाओं का खयाल नहीं रखना उन्हें अपमानित करने का काम करना, दीपावली पर प्रदूषण, किसी देवी देवताओं को पशु बली प्रदूषण लेकिन ईद पर लाखो करोणों जानवरों की हिंसा पानी की बर्बादी, ईद पर पटाखे यह सब प्रदूषण के दायरे में नहीं यही और रोहंगिया मुसलमानों को सुरक्षित बसाने हेतु टीवी पर उदारता कि बहस चलाना उन्हें जायज ठहराना और भारतीय वांग्मय के बारे में गलत ब्याख्या करना इसे कहते हैं बुद्धिजीवी जिहाद।
5-राजनैतिक जिहाद

बड़ी योजना के तहत इस्लाम मतावलंबी आरक्षित सीटों पर कब्जा करने का प्रयास कर रहे हैं जैसा कि हमे पूरा पता है कि आरक्षण केवल हिन्दू समाज के उपेक्षित व कमजोर वर्ग के लिए है लेकिन अनुसूचित जाति व अनुसूचित जनजाति की लड़कियों से विवाह कर उनके आरक्षित सीटों पर मुखिया, सरपंच जिला पार्षद बन इन कमजोर वर्गों के साथ अन्याय कर उनके अधिकारों का हनन कर रहे हैं, देश के अंदर 12% मुस्लिम जनसंख्या है वे स्वविवेक से वोट नहीं करते उसके लिए फतवा जारी किया जाता है किसे वोट देना है यह मस्जिद का ईमाम तय करता है मस्जिद मदरसों में कोइ देशभक्ति का पाठ नहीं पढाया जाता बल्कि उन्हें देश के महापुरुषों के बारे मे भी कुछ जानकारी नहीं दी जाती केवल और केवल इस्लामिक विस्तार भारत बिरोधी बातें भारतीय स्वाभिमान की बात तो अच्छा लगता ही नहीं इनके आइकॉन रहीम रसखान व कलाम न होकर औरंगजेब, दाऊद इब्राहिम, सहाबुद्दीन तथा ओबैसी जैसे लोग हैं इन्हीं के इशारे पर काम करते हैं इस प्रकार हिंदू समाज को विवेक पूर्वक विचार करने की आवश्यकता
6-घुष्पैठ जिहाद

एक तरफ ‘बांग्लादेश’ से घुश्पैठियों का आगमन लगातार हो रहा है वर्तमान में एक आँकड़े के अनुसार यह संख्या 3 करोड़ से 5 करोड़ के बीच में है दूसरी तरफ ‘रोहंगियो’ की घुसपैठ तेज गति में हो रही है हज़ारों की संख्या में बिहार में तथा झारखंड में बस गए हैं रेलवे स्टेशन, रेलवे लाइन के किनारे किनारे अनाधिकृत झुग्गी झोपड़ी लगाकर स्थानीय वासियों के रोजगारों पर कब्जा कर रहे हैं इन्हें सेक्युलर राजनेताओं का संरक्षण प्राप्त है, ब्रम्हदेश से 7 किमी की दूरी पर चीन की सीमा पड़ती है लेकिन वहाँ एक भी रोहंगिया नहीं गया सभी हज़ारों किमी दूर ‘जम्मू कश्मीर’ इस्लामिक प्रदेश में पहुंच गए जहाँ कोई भी हिन्दू किसी दूसरे प्रदेश से नहीं बस सकता लेकिन ‘रोहंगिया’ खुलेआम जा सकता है सभी इस्लामिक संगठन उसे बसाने ब्यवस्था बनाने में लगे हैं कोइ भी राजनेता बोलने को तैयार नहीं है इस प्रकार ‘घुसपैठ जिहाद’ जारी है जो भारत और भारतीयता के लिए खतरा बनकर सामने खड़ा है।
6-जनसंख्या जिहाद

जब देश का विभाजन हुआ था उस समय देश की जनसंख्या 30 करोड़ थी डॉ आंबेडकर ने कहा था कि जब धर्म के आधार पर देश का विभाजन हुआ है तो भारत में एक भी मुसलमान व पाकिस्तान में एक भी हिन्दू नहीं रहना चाहिए लेकिन दुर्भाग्य कैसा अपनी संख्या से अधिक पाकिस्तान जमीन ले लिया उस पर भी यहाँ एक बड़ी संख्या मुसलमानों की रह गई ये वैसे नहीं रहे ये बड़ी ही योजना वद्ध तरीके से रुके भारत के प्रथम शिक्षा मंत्री मौलाना आजाद जो जमायते इस्लामी हिन्द के अध्यक्ष थे वे पूरे भारत का इस्लामी करण करना चाहते थे उन्होंने शिक्षा नीति सेकुलर के नाम पर नष्ट कर दिया, परिवार नियोजन सभी के लिए लेकिन मुसलमान उसमें भागीदार नहीं प्रत्येक मुसलमान 4-4 विवाह 20 से 25 बच्चे पैदा करना इतना ही नहीं लव जिहाद, घुसपैठ के माध्यम सुनियोजित तरीके आपनी संख्या बढ़ाना फिर देश पर कब्जा करने की योजना।
8-औषधीय जिहाद
चिकित्सा के द्वारा इस्लाम का काम यानी काफिरो को समाप्त करना विश्व में इस्लाम की सत्ता को स्थापित करना अभी अभी श्री लंका में एक चिकित्सक पकड़ा गया है जो हिन्दू महिलाओं की बच्चादानी निकालने, पुरुषों को नपुंसक बनाने की दवा देना कोई भी रोगी हो उसे इस प्रकार की दवा देना जिससे वह बच्चा नहीं पैदा कर सके, इस समय भारत में यह कार्य बहुत तेजी से हो रहा है एक प्रकार से मानवता के विरुद्ध जिहाद है।
9-केटरिंग जिहाद
भारत में जितने भी मुस्लिम होटल हैं उसमें यह कार्य जोरों से चल रहा है आज कल हिंदू समाज में छोटा परिवार का प्रचलन हो गया है जो केवल भारत के लिए ही हानिकारक नहीं बल्कि मानवता के लिए हानिकारक है, पति पत्नी दोनों सर्विस करते हैं भोजन होटल से मंगाते हैं यादि केटरर्स मुस्लिम है तो वह नपुसंकता की दवा खाने में डाल देता है, यदि हिन्दू होटल वाला है तो भोजन पहुचाने वाला यदि मोमिन है तो वह रास्ते में भी दवा मिला देता है, मोमिनों का प्रथम कर्तब्य जिहाद (धर्म के लिए युद्ध) है इसलिए कोई भी मोमिन कितना भी पढ़ा लिखा हो वह इसे करेगा ही।

जिहाद क्या है–?
1- ‘जिहाद’ (जान तोड़ कोशिश) करो अल्लाह के मार्ग में ठीक-ठीक जिहाद” (२२:78,पृष्ठ601)
2-“अल्लाह के मार्ग में युद्ध करो और जान लो कि अल्लाह सुनने और जानने वाला है।” (2:244, पृष्ठ169)
3-“जो अल्लाह के मार्ग में मारे गए, उन्हें मरा हुआ न समझो, बल्कि वे अपने रब के पास जीवित हैं, रोजी पा रहे हैं।”(3:169 पृष्ठ 211)
4- “उसकी (अल्लाह की) राह में जिहाद करो ताकी तुम सफल हो जाओ।” (5:35, पृष्ठ 263)
5- “तुम अल्लाह के मार्ग में युध्द करो -तुम पर अपने शिवा किसी और का दायित्व नहीं– और ‘ईमान’ वालों को भी इसके लिए तैयार करो! हो सकता है अल्लाह ‘काफ़िरों’ का जोड़ तोड़ दे।” (4:48, पृष्ठ 236)
अल्लाह का जिहाद के लिए आदेश

१- “हे नबी! काफिरों और मुनाफिकों के साथ जिहाद करो और उनपर सख्ती करो और उनका ठिकाना ‘जहन्नुम’ है।” (66:9 पृष्ठ1055)
2- “तो काफ़िरों की बात न मानना और इस (कुरआन) से तुम उसने बड़ा जिहाद करो”(25:52, पृष्ठ 643)
3- “फिर हराम महीने बीत जाय, तो ‘मुशरिकों’ को जहां कहीं पाओ कत्ल करो, और उन्हें पकड़ो, और उन्हें घेरो, और हर घात की जगह उनकी ताक में बैठो, यदि वे तोबा कर लें और नमाज कायम करें और ‘जकात’ दे तो उनका मार्ग छोड़ दो।” (9:5 पृष्ठ 368)
4- “हे नबी ! काफ़िरों और मुनाफ़िक़ों से जिहाद करो! और उनके साथ सख्ती से पेश आओ, उनका ठिकाना जहन्नुम है और वह क्या ही बुरा ठिकाना है” (9:73, पृष्ठ 380)
जिहाद का उद्देश्य

अन्य धर्मों को समाप्त कर, विश्व में इस्लामी राज्य स्थापित करना—!
1- “और उसने युध्द करो जहां तक कि ‘फितना’ (उपद्रव) शेष न रहे और ‘दीन’ अल्लाह का हो जाये” (2:193, पृष्ठ 158)
2- किताब वाले जो न अल्लाह पर ईमान लाते हैं और न ‘आख़िरत’ पर और न उसे हराम करते हैं जिसे ‘अल्लाह’ और उसके ‘रसूल’ ने हराम ठहराया है और वे न सच्चे दीन को अपना दीन बनाते हैं, उनसे लड़ो यहाँ तक कि वे अप्रतिष्ठित होकर अपने हाथ से जजिया देने लगें।” (9:29 पृष्ठ 372)
3- “सबसे आखिरी वक्तब्य जो मुहम्मद ने दिया था कि”हे अल्लाह! यहूद.और ईसाईयों को समाप्त कर दे, वे अपने पैगम्बरों के कब्रों पर चर्च (पूजा घर) बनाते हैं, अरेबिया में दो धर्म नहीं रहेंगे।” पहले चार खलीफाओं के समय में यह नीति पूरी तरह अपनायी गई और सभी गैर मुसलमान अरेबिया से बाहर निकाल दिया ।” (मलिक,511; 1588)
4- “ओ अल्लाह-! तूने जो मुझसे वादा किया था वह सब दिला ओ अल्लाह ! यदि ये थोड़े से मुसलमान मारे गए तो संसार में तुम्हारी पूजा करने वाला कोई न रहेगा।” (मुस्लिम खण्ड-3 4360, पृष्ठ 1158)
जिहाद के परिणाम

सम्पूर्ण विश्व को दो भागों में बाटना 1- मोमिन जो मुहम्मद के विचारों को स्वीकार किया यानी इस्लाम स्वीकार किया। 2- जिन्होंने अभी इस्लाम स्वीकार नहीं किया यानी काफिर हैं यानी वे बहुदेववाद (हिंदू धर्म मानव धर्म) मानते हैं या ईसाई, यहूदी अथवा अन्य कोई मतावलंबियों का।
1- मुहम्मद ने जो भी किया वह मानकर वह सब कुछ करना जो जो मुहम्मद ने किये यही जायज, इस प्रकार इस्लाम के 72 फ़िरकों में संघर्ष असली मुहम्मद का अनुयायी कौन ? युध्द जिहाद के लिए

अलीसिना ने सरिया के कुछ उद्धरण दिये हैं!
1-जिहाद, “गैर मुस्लिमों के विरुद्ध मजहब को स्थापित करने हेतु युध्द करना”।
2- एक खलीफा बल पूर्बक सत्ता छीनकर शासन कर सकता है।
3- गैर मुस्लिम मुसलमान का उत्तराधिकारी नहीं वन सकता।

सम्पूर्ण विश्व को इस्लाम ने दो भागों में बाट दिया है मोमिन और गैर मोमिन फिर मोमिनों में 72 फिरके यह सब फिरकों के खलीफा अपने को असली मुहम्मद साहब के बाद असली खलीफा मानते हैं उसी के लिए युद्ध जारी है कुछ इस्लामिक विद्वान इस्लाम को प्रेम मुहब्बत का बताते नहीं थकते लेकिन इस शान्ति धर्म के बीच जो युद्ध का आंकड़ा है वह चौकाने वाला है 20 वर्षों में एक दूसरे पर हमला हिंसा और आतंकवाद द्वारा “एक करोड़ पच्चीस लाख” मुसलमान मारे गए हैं और जो गैर मुस्लिमों का आंकड़ा है इन चौदह सौ वर्षों में “एक अरब” से अधिक मानव समाज की हत्या की है इसी को जिहाद कहा जाता है और उसके इस प्रकार के परिणाम हैं !

(6)इस्लाम की आक्रामकता को रोकने उपाय जो सरकार और समाज को मिलकर करना चाहिए
1 सत्ता पर उनका एकाधिकार पूरी तरह खत्म किया जाए
2 अल्पसंख्यक दर्ज हटाया जाए मुसलमानो को भारत के समान नागरिक की तरह सरकारी सुविधाएं मिलनी चाहिए
3 सबके लिए एक समान कानून
4 मजहबी शिक्षा पर पूरी तरह प्रतिबंध लगाया जाए
5 कठोर जनसंख्या नियंत्रण कानून लाया जाए
6 जहां मुस्लिम डेमोग्राफी बदलने सफल हो रहे वहां पर योद्धा हिंदू जातियों आर्थिक सहायता देकर बसाया जाए जिससे हिंदू जातियां मुसलमानो को उन्हीं की

भाषा मे प्रतिकार कर सके
7 हिंदू समाज को अपना एक मजबूत इको सिस्टम तैयार करना चाहिए जिससे हिन्दू समाज को अपनी लड़ाई लड़ने के लिए किसी पर निर्भर न रहना पड़े
8 मुसलमानो मे जो 73 फिरके हैं उनके विवाद दुनिया के सामने लाना होगा मुस्लिम समाज मे अशरफ क्लास का जो वीटो हैं उसे खत्म करके जो मुस्लिम भारतीय संस्कृति मानते हैं उन्हें मुख्यधारा लाना होगा जिन्हें आम भाषा देशज मुस्लिम कहते हैं देशी मुस्लिम को सामने लाए बिना भारत मे बैठे विदेशी मुस्लिमो का प्रतिकार नहीं किया जा सकता है

9 सदगुण विकृति को छोड़ना होगा अर्थात सरकार और समाज को इस्लामिक जेहादियों पर दया भावना रखना बंद करना होगा जो जिस भाषा समझते है उन्हें उसी की भाषा मे ज़बाब देना होगा और हमारी सरकारों को जेहादियों को अराजकता फैलाने की खुली छूट देना बंद करना होगा इन अराजक तत्वों सख्ती से निपटना होगा

10इस्लाम के मूल को समझने का प्रयास करना होगा समझने के बाद इस्लाम के मूल पर प्रहार करना पड़ेगा जिससे इस्लाम समस्या हमेशा के लिए जड़ से खत्म हो जाए

(7 )निष्कर्ष – 2000 साल पहले एक यहूदी बढ़ई ने कहा था सत्य आपको मुक्ति दिलाएगा यह स्वयंसिद्ध सत्य है आज से अधिक प्रासंगिक कभी नहीं रहा है आईए हम इस्लाम की गंदी सच्चाई लोगों बताए आईए हम सत्य को एक अवसर दे !

दीपक कुमार द्विवेदी

dwivedideepak9479@gmail.com

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