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भारत में कानून का राज क्या ‘वेटिकन’ के पोप के निर्देश से चलेगा?

जिस देश में शंकराचार्य तक को झूठे आरोप में गिरफ्तार कर जेल भेज दिया गया बाद में वे निर्दोष साबित हुए कोई हंगामा नहीं उस देश में एक रोमन कैथलिक बिशप को रेप के आरोप में सबूत मिलने के बाद भी गिरफ्तार करने को लेकर पुलिस के हाथ पांव फूल रहे हैं। पीड़िता की तस्वीर जारी की जा रही है निर्दलिए विधायक पीसी जार्ज उसे वेश्या साबित कर रहे हैं यह कह कर कि 12 बार उसे मजे लिए तेरहवें बार रेप हो गया! बावजूद इसके देश की अदालते मौन हैं।

भारत के केरल में नन के साथ बलात्कार हुआ, पुलिस ने स्टेटस रिपोर्ट हाईकोर्ट में दाखिल कर साफ कर दिया कि बलात्कारी कौन है? लेकिन न तो पुलिस की हैसियत है बलात्कारी के गिरेवान पर हाथ डालने की न ही देश की अदालत इसे गंभीरता से ले रही है। भारत में पोप के प्रतिनिधी ये रिपोर्ट लेकर वेटिकन गए हैं, अब पोप के निर्देश का इंतजार किया जा रहा है। कानून के मुताबिक बलात्कार के अभियुक्त बिशप फ्रैंक मुलक्कल की गिरफ्तारी हो जानी चाहिए लेकिन उसकी गिरफ्तारी के बदले पीड़िता की तस्वीर जारी कर उसका चरित्रहनन किया जा रहा है। वेटिकन के पोप का खौफ इस कदर है कि पुलिस प्रशासन, अदालत और मीडिया ने चुप्पी लाद ली है। अब भारत की सुप्रीम कोर्ट को यह तय करना चाहिए कि देश अपराधिक कानून भारत के संविधान और कानून व्यवस्था के मुताबिक चलता है या वेटिकन के पोप के निर्देश के मुताबिक!

केरल में नन के साथ बलात्कार के पुख्ता सबूत मिलने के बाद भी पुलिस ने हाईकोर्ट के सामने अभियुक्त बिशप फ्रैंको मुलक्कल को गिरफ्तार किए जाने से कानून व्यवस्था बिगड़ने का खौफ दिखा दिया। एक तरफ अभियुक्त की गिरफ्तारी में पुलिस के हाथ पांव फूल रहे हैं दूसरी तरफ मिशनरीज ऑफ जीसस ने पीड़िता की तस्वीर जारी कर यह दलील दे दी कि बलात्कार यदि सही में किसी के साथ होता है तो वो सार्वजनिक जगह पर उसके साथ नहीं आती जिस पर आरोप लगाती है। मिशनरीज ऑफ जीसस ने यह फोटो सुप्रीम कोर्ट के हाल के ही उस आदेश का उल्लंघन करते हुए जारी किया जिसमें भारत की सुप्रीम अदालत ने कठुआ रेप केस में पीड़ित की तस्वीर जारी करते हुए कहा था “मृतक की भी गरीमा होती है। पीड़ित नाबालिग हो विक्षिप्त उसके पहचान का खुलासा करना अपराध है और इसके लिए दो साल की सजा और जुर्माना का प्रावधान है”। कठुआ रेप पीड़िता की मौत हो चुकी थी लेकिन केरल में रेप पीड़िता इंसाफ के लिए दर दर भटक रही है। उसने भारत के चर्च से लेकर वेटिकन के पोप तक इंसाफ की गुहार लगाई लेकिन कार्रवाई तो दूर उसी के खिलाफ पूरी मिशनरीज हाथ धो कर पीछे पर गई।

दरअसल केरल नन रेप केस मामले में बिशप के बचाव में चर्च ग्रुप ने पीड़िता की तस्वीर जारी कर अपना फैसला दे दिया कि उसके साथ कोई रेप ‘नहीं हुआ मिशनरीज ऑफ जीसस कमिशन ने शुरू से ही बिशप मुलक्कल पर लगे आरोपों को साजिश बताया है। चर्च ग्रुप का कहना है कि पीड़िता ने पांच दूसरी नन के साथ मिलकर जालंधर बिशप के खिलाफ साजिश की है। उसका का दावा है कि बिशप 5 मई, 2015 को कुरविलंगाड़ में नहीं रुके थे, जैसा शिकायत में नन ने आरोप लगाया है। यह भी कहा गया कि 23 मई, 2015 को एक फोटो में बिशप के साथ वे देखे जा सकते हैं और इससे साबित होता है कि रेप नहीं हुआ है।

कमिशन ने आरोप लगाया है कि पीड़िता ने अपने दोस्तों से विजिटर्स रजिस्टर में छेड़छाड़ कराई और मदर सुपीरियर से सीसीटीवी का कंट्रोल भी लिया। कमिशन ने फ्रैंको मुलक्कल को निर्दोष बताते हुए दोहराया है कि नन बदला लेने के लिए ऐसा कर रही हैं। गौरतलब है कि केरल हाई कोर्ट ने तीन याचिकाओं पर सुनवाई करते हुए मामले की जांच से संतुष्टि जताई है और कहा है कि यह जांच अधिकारी पर निर्भर करता है कि बिशप को गिरफ्तार करना है या नहीं। साथ ही कोर्ट ने सीबीआई को जांच सौंपने से इनकार कर दिया है।’ अब दिलचस्प यह है कि हाईकोर्ट ने अभियुक्त की गिरफ्तारी के लिए तो जांच अधिकारी को इसकी आजादी दे दी लेकिन अभियुक्त को निर्दोष साबित करने के लिए भारतीय कानून से ऊपर उठकर पीड़ित की पहचान सार्वजनिक करने वाली संस्था के खिलाफ कार्रवाई कौन करेगा? जिस सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर दिल्ली हाईकोर्ट ने कठुआ रेप केस पीड़िता की पहचान जारी करने वाली एक दर्जन मीडिया घराने पर दस दस लाख रुपये का जुर्माना किया गया था उसी सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन केरल हाईकोर्ट क्यों नही कर रहा? इस बेहद गंभीर मामले पर भारत की मीडिया ने चुप्पी क्यों लाद ली है?

भारतीय कानून में बलात्कार और यौन उत्पीड़न के पीड़ितों की पहचान उजागर करने पर पाबंदी है। देश की राजधानी में बलात्कार के दो बेहद चर्चित मामले हैं एक हाल के वर्षों में दामिनी रेप केस जिसने पूरे देश को हिला कर रख दिया जिसके बाद बलात्कार पर कानून की समीक्षा हुई दूसरी 2003 में दिल्ली में मौलाना आजाद मेडिकल कॉलेज की छात्रा के साथ बलात्कार का मामला। इस मामले में अभियुक्त को सख्त सजा हुई लेकिन आज तक यह सार्वजनिक नहीं पो पाया कि पीड़िता और उसके परिजन कौन थे। ‘दामिनी’ नाम भी मीडिया का दिया हुआ था इस मामले में जब पीड़िता के माता पिता ने कहा कि उनकी बेटी बहादुर थी उन्हे नाम सार्वजनिक करने में एतराज नहीं है तभी उनके बारे में देश जान सका। लेकिन यहां खुलेआम अभियुक्त को बचाने के लिए पीड़िता के चेहरे को सार्वजनिक कर दिया गया। मीडिया और अदालत मौन हैं, पुलिस ने तो पहले ही हाईकोर्ट में कह दिया कि अभियुक्त की गिरफ्तारी की उसकी हैसियत नहीं क्योंकि कानून व्यवस्था बिगड़ सकता है!

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URL: Will India’s law run by the Vatican’s Pope’s instructions!

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